
RTI activists mundan
सूरजपुर. जिला चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी तथा सिविल सर्जन कार्यालय द्वारा दवाई खरीदी में व्यापक भ्रष्टाचार, एएनएम की भर्ती में गोलमाल और सूचना के अधिकार के तहत अपील के बावजूद आरटीआई कार्यकर्ता को जानकारी नहीं दी गई। इसके विरोध में आरटीआई कार्यकर्ता टी. हेमंत नायडू ने आज मंगलवार को सीएमएचओ कार्यालय के सामने मुंडन करवा कर विरोध जताया।
आरटीआई कार्यकर्ता का कहना है कि जिस लिपिक ने सूचना का अधिकार के तहत जानकारी नहीं दी, उसने जान से मारकर फेंकने की धमकी भी दी है। इस मामले में शिकायत के बाद भी पुलिस द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।
गौरतलब है कि बीते वित्तीय वर्ष में दवाई एवं अन्य संसाधन की खरीदी हेतु जिला चिकित्सालय में 5 करोड रुपए का बजट राज्य शासन से प्राप्त हुआ था। आरटीआई कार्यकर्ता ने मुण्डन कराने के बाद आरोप लगाया कि इस बजट का समुचित उपयोग न कर पाने के कारण लगभग 1 करोड़ 70 लाख रुपए का बजट कालातीत हो गया।
इसके अलावा प्रबंधन द्वारा जितने की सामग्री क्रय की गई, उसमें कमिशन के रूप में प्रतिशत आधार पर भ्रष्टाचार किया गया है। उन्होंने बताया कि एएनएम की भर्ती में पात्र एवं अपात्र की अनदेखी करते हुए सक्षम अभ्यर्थियों से मोटी रकम लेकर उन्हें नियुक्ति पत्र प्रदान किया गया है।
उन्होंने आरोप लगाया है कि इस सभी संवैधानिक नियमों के विपरीत हुए कार्यों में जिला के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, सिविल सर्जन और संगठित लिपिकों का गिरोह सक्रिय रहा है।
मिल रही मारकर फेंक देने की धमकी
आरटीआई कार्यकर्ता टी. हेमंत नायडू ने आरोप लगाया है कि चिकित्सालय में कार्यरत एक लिपिक के द्वारा उन्हें सूचना के अधिकार के आवेदन पर संबंधित जानकारी ना देने और मांगने पर जान से मारकर फेंक देने की धमकी दी गई है। इसकी शिकायत उन्होंने कोतवाली थाना में भी की है लेकिन अभी तक उनकी शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
16 आवेदनों का नहीं हुआ निराकरण
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय में न तो सूचना के अधिकार का बोर्ड लगा है और ना ही सूचना के अधिकार के तहत दिए गए आवेदनों का निराकरण समय सीमा में किया जाता है।
वर्तमान में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एसपी वैश्य ने जिला मानिटरिंग समिति के सदस्य को यह जानकारी दी है कि जिस लिपिक को सूचना के अधिकार की जानकारी उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई है उसके द्वारा 16 आवेदनों का निराकरण समय-सीमा पर नहीं किया गया है। इस बात की जानकारी उच्चाधिकारियों को होने के बावजूद जिम्मेदार लिपिक के विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
Published on:
17 Apr 2018 03:55 pm
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