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कलक्टर ने दूसरे दिन तुड़वाए 65 दुकान व मकान, मंत्री की बात को कर दिया था दरकिनार

पुलिस बल की मौजूदगी में दूसरे दिन भी नगर से गुजरे एनएच पर 72 फिट चौड़ाई के दायरे में आने वाले अवैध कब्जे पर हुई कार्रवाई

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broken shops and houses

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सूरजपुर. नगर में एनएच के लिए निर्धारित किए गए 72 फिट की चौड़ाई के दायरे में आने वाले घरों, दुकानों और अवैध कब्जा तोडऩे की प्रशासनिक मुहिम शुक्रवार को भी जारी रही। शुक्रवार को 65 मकानों में तोडफ़ोड़ की गई।

गौरतलब है कि जिला मुख्यालय सूरजपुर का मेन रोड एनएच के रूप में चिन्हांकित है। जिले के प्रभारी मंत्री भइयालाल राजवाड़े और पूर्व विधायक रेणुका सिंह द्वारा स्थानीय नागरिकों को यह आश्वासन दिया गया था कि एनएच के लिए निर्धारित ७२ फिट के दायरे की बजाए 60 फिट का दायरा लागू किया जाएगा।

लेकिन इनके आश्वासन के विपरीत प्रशासन ने जिले के प्रभारी मंत्री के निर्देशों व पूर्व विधायक के आश्वासन की अनदेखी करते हुए गुरूवार को सूरजपुर के एनएच के दायरे वाले 67 घरों में सख्ती के साथ तोडफ़ोड़ शुरू कर दी थी। यह कार्रवाई दूसरे दिन भी जारी रही। दूसरे दिन ६५ घरों में जेसीबी व चैन मोनटेन मशीन लगाकर तोडफ़ोड़ की गई।

प्रशासन की इस कार्रवाई से काफी मात्रा में मलबा इक_ा हो रहा है जिन्हें ट्रैक्टरों के माध्यम से उठाया जा रहा है। कार्रवाई के लिए बड़ी संख्या में पुलिस बल की भी मदद ली जा रही है। वहीं इस कार्रवाई के दौरान न तो प्रभारी मंत्री ने हस्तक्षेप किया और न ही सूरजपुर में रहते हुए पूर्व विधायक रेणुका सिंह ने शहरवासियों की सुध ली।


विद्युत लाइन बंद रखने से जनजीवन प्रभावित
एनएच के दायरे में आने वाले मकानों और कब्जों को तोडफ़ोड़ कर हटाने के उद्देश्य से समूचे नगर की विद्युत सप्लाई बाधित कर दिए जाने की प्रशासनिक कार्रवाई का शुक्रवार को स्थानीय नागरिकों द्वारा विरोध किया गया। प्रभावित क्षेत्रों को छोड़कर सुरक्षित मोहल्लों में विद्युत सप्लाई बाधित किए जाने से मोबाइल व इमरजेंसी लाइट चर्चा करने के लिए भी लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। एनएच के दायरे वाले क्षेत्र में तो विगत दो दिन से विद्युत सप्लाई पूरी तरह से ठप रखी गई। परिणामस्वरूप विद्युत प्रकाश व पेयजल जैसी सुविधाओं के लिए भी लोग परेशान नजर आए।


को-ऑपरेटिव बैंक की पहचान उजागर
नगर के हृदय स्थल पर जिला सहकारी केंद्रीय बैंक का अपना परिसर है। शायद ही अधिकांश लोग जानते होंगे। बैंक परिसर की चारदिवारी के बाहरी हिस्से में चारों तरफ से अतिक्रमण हो जाने के कारण बैंक की पहचान विलुप्त प्राय हो गई थी। लेकिन एनएच चौड़ीकरण के तहत जब इस परिसर पर काबिज लोगोंं का कब्जा हटाया गया तो को ऑपरेटिव बैंक जन सामान्य स्पष्ट नजर आने लगा। लंबे समय से दुकानदारों के बेजा कब्जा से घिरकर गुम रहा को ऑपरेटिव बैंक अतिक्रमण हट जाने से स्पष्ट नजर आया।


खुद कब्जा हटाने लगे लोग
सूरजपुर एसडीएम विजेंद्र सिंह पाटले ने बताया कि पहले दिन ६७ घरों व कब्जों को मिलाकर अब तक १३२ घरों व कब्जों के विरूद्ध दायरे से कब्जा हटाने की कार्रवाई की गई है। उन्होंने बताया कि दूसरे दिन एक खास पहल देखी गई। यहां के कई लोगों ने स्वत: कब्जा हटाने में रूचि दिखाई है।


अभी जारी रहेगी कार्रवाई
एसडीएम विजेंद्र सिंह पाटले ने बताया कि शहर के अंदर चिन्हांकित अधिकांश बेजा कब्जा के विरूद्ध कार्रवाई कर ली गई है। लेकिन समयाभाव की वजह से कई मकानों के विरूद्ध कार्रवाई नहीं हो सकी है। एनएच के लिए निर्धारित ७२ फिट के दायरे में आने वालों कोई भी कब्जा शेष न बचे तब तक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि शनिवार को लगभग सभी बेजा कब्जा हटा लिए जाएंगे।


जल संकट से बढ़ी परेशानी
प्रशासनिक स्तर पर तोडफ़ोड़ के लिए वैसे तो पूरी तैयारी कर ली गई थी। लेकिन प्रशासनिक कार्रवाई के दौरान पूरे शहर की विद्युत व्यवस्था ठप कर देने की रणनीति के मध्य एक बड़ी चूक यह हुई कि उन्होंने नगर की बीस हजार की आबादी के समक्ष पेयजल की आपूर्ति की चिंता नहीं की।

यदि नेहरू पार्क रोड स्थित पानी टंकी तक की विद्युत आपूर्ति बहाल रख लिया होता तो शहर के लोगों को पेयजल के लिए तरसना नहीं पड़ता। दो दिन से विद्युत आपूर्ति ठप होने से जहां एक ओर नल-जल योजना के उपभोक्ताओं को एक ही पाली में आधी-अधूरी जल सप्लाई मिल सकी। वहीं दूसरी ओर कुएं, ट्यूबवेल, टूल्लू पंप के न चलने से कनेक्शनविहीन घरों में भी पानी के लिए हाहाकार मच गया।

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