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नौकरी और मुआवजे की मांग को लेकर ग्रामीणों ने बंद कराई कोल खदान, गेट पर जमाया डेरा, 50 लाख का नुकसान

Coal mines closed: इमरजेंसी सेवा के लिए कुछ कर्मचारियों को खदान में जाने दे रहे ग्रामीण, किसानों व ग्रामीणों का कहना कि खदान खुलने के दौरान एसईसीएल प्रबंधन (SECL administration) ने हमसे नौकरी व मुआवजा देने का किया था वादा लेकिन अब बना रहे बहानें

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Closed coal mines

Protest by villagers

जरही/भटगांव. अधिग्रहित भूमि के बदले नौकरी और मुआवजे की मांग को लेकर गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के बैनर तले किसानों ने पिछले 2 दिनों से भटगांव क्षेत्र की शिवानी भूमिगत कोयला खदान को बंद करा दिया है। गेट के सामने बड़ी संख्या में महिला व पुरुष डट गए हैं। इसकी वजह से हजारों टन कोयला का उत्पादन नहीं हो पा रहा है। कोयला कम्पनी को लाखों का नुकसान हो चूका है। वहीं कोयला कामगार खदान में जाने में असमर्थ हैं। इधर खदान बंद होने से सकते में आए एसईसीएल प्रबंधन व प्रशासन द्वारा आंदोलनकारियों से वार्ता की जा रही है। लेकिन गुरुवार की शाम तक खदान कोयला उत्पादन प्रारंभ नहीं किया जा सका था।


गोंडवाना गणतंत्र पार्टी और बंशीपुर के किसानों का आरोप है कि एसईसीएल प्रबंधन को पूर्व में अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा गया था और कहा गया था कि मांग पूरी नही होने पर 21 सितंबर से खदान बंद कराया जाएगा। आंदोलनकारियो का आरोप है कि पिछले 10 वर्षों से किसानों की सैकड़ों एकड़ जमीन को एसईसीएल भटगांव क्षेत्र प्रबंधन द्वारा कोयला उत्खनन के लिए अधिग्रहित कर लिया गया था।

लगातार किसानों को आश्वासन दिया जा रहा था कि उन्हें नौकरी और मुआवजा मिलेगा। लेकिन 10 वर्ष बीत जाने के बाद भी किसानों को उनके हक की नौकरी व मुआवजा नहीं मिली। इससे किसानों में भारी आक्रोश था। इसी कड़ी में अपनी मांगों को लेकर गोंडवाना गणतंत्र पार्टी और बंशीपुर के किसानों ने बुधवार की तडक़े 4 बजे अचानक बड़ी संख्या में पहुंचकर शिवानी खदान के गेट को बंद करा कर वहीं सामने धरने पर बैठ गए।

उन्होंने खदान के गेट को बंद करा दिया, जिससे खदान में अफरा-तफरी का माहौल निर्मित हो गया और प्रबंधन में हडक़ंप मच गया। सुबह होते ही एसईसीएल प्रबंधन सामने आया और प्रशासन की मदद से आंदोलनकारी किसानों से बातचीत का दौर शुरू हुआ।

आंदोलनकारियों का ये कहना
आंदोलनकारी किसानों का कहना है कि कोयला खदान प्रबंधन द्वारा उनकी जमीन का अधिग्रहण किया गया था, इस वादे के साथ कि उन्हें नौकरी और मुआवजा दिया जाएगा।

कुछ को नौकरी देकर खदान खोलकर लगातार कोयले का उत्खनन करके लाभ कमाया जा रहा है, लेकिन हम सब किसान जब भी नौकरी व मुआवजा की बात करते हैं तो हमें तरह-तरह के कारण और बहाने बना करके लौटा दिया जाता है। मजबूरी में आज हम सब खदान को बंद करने के लिए बाध्य हुए हैं।


जारी रही वार्ता
गुरुवार को एसडीएम, प्रतापपुर तहसीलदार, प्रतापपुर नायब तहसीलदार, जरही एसईसीएल महाप्रबंधक कार्यालय के अधिकारी व आंदोलनकारियों के बीच लगातार वार्ता चल रही थी। लेकिन शाम तक मामले का समाधान नहीं हो सका और आंदोलनकारी डटे हुए थे।

आंदोलनकारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगे पूरी नहीं की जाएगी तब तक प्रदर्शन वापस नहीं लेंगे। उनका कहना है कि जब तक उन्हें नौकरी व मुआवजा के लिए ठोस आश्वासन नहीं मिलेगा, तब तक वे खदान की गेट से नहीं हटेंगे। चाहे कितने दिन न बैठना पड़े।

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50 लाख से अधिक नुकसान का अनुमान
नौकरी व मुआवजा की मांग को लेकर चल रहे खदान बंद आंदोलन से एसईसीएल कम्पनी को अब तक पचास लाख से ज्यादा का नुकसान हो चूका है। दो दिन से शिवानी खदान में कोयले का उत्पादन नहीं हुआ है, जबकि सामान्य दिनों में प्रतिदिन 600 टन से ज्यादा कोयले का उत्पादन होता है।

अभी तक इस आंदोलन की वजह से एसईसीएल प्रबंधन को 1200 टन कोयला उत्पादन नहीं कर पाने का नुकसान हुआ है। ये क्षति 50 लाख से अधिक की है। खदान बंद आंदोलन की वजह से लगभग 600 कामगार जो शिवानी खदान में काम करते थे उनको 2 दिन से बैठा करके वेतन देना पड रहा है उसका नुकसान अलग है।

वही कामगारों का कहना है कि हम काम करने खदान आ रहे हैं, हमें काम करने के लिए अनुकूल माहौल देना प्रबंधन का काम है। खदान के गेट के पास कर्मचारी हाजिरी लगा करके धरना स्थल से कुछ दूर पर बैठ करके अपना समय काटकर घर चले जा रहे हैं।


खदान के सामने लगाया टेंट
गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के बैनर तले चल रहे इस आंदोलन में इस बार आंदोलनकारी आर पार की लड़ाई की लडऩे की तैयारी करके आए हुए हैं। आंदोलनकारी इस बार खदान के गेट के सामने टेंट लगाकर बैठ गए हैं और वहीं पर किसानों द्वारा खाना बना कर लंगर का आयोजन किया जा रहा है। इस आंदोलन में महिला, पुरुष और बच्चे भी शामिल हैं, जो पीछे हटने के लिए तैयार नहीं हैं।