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बहरादेव हाथी के गले में साढ़े 3 लाख का रेडियो कॉलर आखिर किस काम का? जब खुलेआम घूमता रहा गांव में

ग्रामीणों को अलर्ट करने नजर नहीं आए एक भी कर्मचारी, सिर्फ लोकेशन पाकर खुश हैं वन अफसर

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Bahradev elephant

Elephants in village

पोड़ी मोड़/प्रतापपुर. वन विभाग द्वारा जिन हाथियों को लोकेट करने के लिए रेडियो कॉलर लगाया गया है, वही स्वच्छंद विचरण कर उत्पात मचा रहे हैं। रेडियो कॉलर लगने के बाद 'बहरादेव' हाथी प्रतापपुर और राजपुर परिक्षेत्र में घूमकर नुकसान तो पहुंचा ही रहा है, वह मंगलवार की सुबह प्रतापपुर-अंबिकापुर मुख्य मार्ग पर स्थित ग्राम जगन्नाथपुर पहुंच गया।

यहां वह घंटों मुख्य मार्ग व घरों के आसपास घूमता रहा लेकिन इस दौरान वहां लोगों को अलर्ट करने एक भी कर्मचारी नजर नहीं आया। अब सवाल यह है कि आखिर रेडियो कॉलर लगाने का क्या फायदा, जब लोगों को अलर्ट ही नहीं किया जा रहा है।


गौरतलब है कि बहरादेव नामक हाथी में ही सीसीएफ केके बिसेन और उनकी टीम ने रेडियो कॉलर लगाने के बाद इसे बड़ी उपलब्धि बताकर अपनी पीठ जमकर थपथपाई थी। लेकिन यही हाथी अब स्वच्छंद विचरण कर उत्पात मचा रहा है। हाथी मंगलवार की सुबह लगभग ७ बजे प्रतापपुर-अम्बिकापुर मुख्य मार्ग पर आ गया।

वह जगन्नाथपुर बस्ती में कई घंटे तक घूमता रहा। इस दौरान वह मुख्य मार्ग के साथ ही वहां घरों के आसपास भी पहुंच जा रहा था जिसे लेकर ग्रामीणों में दहशत व्याप्त हो गया था। हाथी काफी देर तक घूमता रहा लेकिन वहां लोगों को अलर्ट करने एक भी वन कर्मचारी नजर नहीं आया। इससे लाखों की लागत से रेडियो कॉलर की उपयोगिता पर सवाल खड़े हो गए हैं।


काफी देर तक अवरूद्ध रहा मार्ग
कुछ लोग तो उसे भगाने के फिराक में उसके आसपास दिखे, लेकिन भय से अधिकांश लोगों ने घरों के दरवाजे बंद कर लिए ताकि वह अंदर न घुस जाए। बहरादेव काफी देर तक सड़क पर घूमता रहा, जिससे मार्ग अवरूद्ध रहा।

काफी देर बाद स्थानीय ग्रामीणों ने हिम्मत दिखाई और अपने जुगाड़ से उसे खदेडऩे में कामयाबी पाई, वह सरनापारा होते हुए जंगल में चला गया। इस दौरान उसने आसपास कई खेतों में फसलों को भी नुकसान पहुंचाया।

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