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CG Human Story : आखिर कौन कर रहा विक्षिप्त युवती से दुष्कर्म? कोख से जन्मी चौथी संतान

अविवाहित विक्षिप्त युवती पिछले 7 साल से हो रही दैहिक शोषण का शिकार, युवती के कोख से जन्मी ३ संतानों का भी नहीं है अता-पता

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Newborn

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सूरजपुर. ग्राम सलका में मानवता को शर्मशार कर देने वाला एक मामला सामने आया है। मानसिक रूप से विक्षिप्त एक ३६ वर्ष की अविवाहित युवती ने अस्पताल में अपनी चौंथी संतान को जन्म दिया है। आश्चर्य की बात यह है कि गांव में किसी को इस बात की जानकारी नहीं है कि इस युवती का कौन दैहिक शोषण कर रहा है।

समाज के ठेकेदार और समाज सेवी संस्थाओं की चुप्पी आज लोगों को उनकी कार्यशैली पर सवाल उठाने को मजबूर कर रही है। बताया जा रहा है कि इसके पूर्व भी युवती ने ३ बच्चों को जन्म दिया है लेकिन वे कहां है, इसकी जानकारी किसी को नहीं है।


सलका प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में एक 36 वर्षीय विक्षिप्त युवती ने 18 फरवरी को एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया। स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सकों ने जब इसकी जानकारी पुलिस को दी, तब यह मामला सामने आया। इस संबंध में महिला सेल प्रभारी आराधना बनौदे और भटगांव थाना प्रभारी प्रद्युम्र तिवारी ने बताया कि 18 फरवरी को सलका के प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में नवजात शिशु के जन्म होने की बात बताई गई थी।

डाक्टरों ने बताया था कि महिला विक्षिप्त है और उसकी देखरेख करने वाला भी कोई नहीं है। इसके बाद पुलिस ने प्रसूता एवं नवजात को देखरेख हेतु जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया।


लगातार हो रही है दैहिक शौषण का शिकार
पुलिस ने अपने स्तर पर जांच के दौरान पाया कि विक्षिप्त युवती का यह चौथा प्रसव है, इससे पूर्व तीन संतान है, लेकिन वर्तमान में विक्षिप्त महिला के पास नवजात के अलावा और कोई संतान नहीं है। महिला की सबसे बड़ी संतान की उम्र लगभग 6 वर्ष बताई जा रही है। पहली संतान की उम्र के अनुसार महिला की परिस्थिति का फायदा उठाकर किसी एक या अनेक द्वारा विगत 7 वर्षों से लगातार दैहिक शोषण किया जा रहा है।

गांव के पंच, सरपंच और अन्य जिम्मेदार लोगों ने भी युवती के लगातार गर्भवती हो जाने के बावजूद इस बात का पता नहीं लगाया। सबसे शर्म की बात तो यह है कि अपने स्वार्थ के लिए हर छोटे-छोटे मुद्दों पर पंचायत बैठाने वाले गांव के जनप्रतिनिधियों ने भी पीडि़ता को हक दिलाने के लिए अब तक कोई पहल नहीं की।


तीन संतान कहां गए... पता लगाने की है जरूरत
यदि यह बात सही है कि विक्षिप्त प्रसूता ने अब तक 4 बच्चों को जन्म दिया है तो यह जानना भी आवश्यक है कि शेष तीन संतान कहां है। पुलिस के अनुसार इसके तीन बच्चों का कोई अता- पता नहीं है। ऐसे में उन समाज सेवी संस्था द्वारा किए जा रहे कार्यों पर भी सवाल उठ रहे हैं। ऐसी संस्था को चाहिए कि विक्षिप्त महिला की लापता हुई संतानोंका पता लगाए व उनका सुरक्षित परिवेश सुनिश्चित करें।


पिता है बेबस और बहन मनमौजी
ग्रामीणों ने पूछताछ के दौरान बताया कि विक्षिप्त प्रसुता बाल्यावस्था से ही मानसिक रूप से कमजोर रही है। लम्बे समय से इसके पिता अस्वस्थ है और बिस्तर पर ही लेटे रहते है। देखरेख करने वाला भी कोई जिम्मेदार व्यक्ति नहीं है। एक बहन है, जो अपने मन की मालिक है, विक्षिप्त बहन और लाचार पिता की देखरेख के प्रति गैर जिम्मेदार होने के कारण घर की हालत भी काफी दयनीय है।


इलाज के लिए प्रसुता को भेजा जायेगा सेंदरी
प्रसूता की स्थिति को देखते हुए स्वास्थ्य महकमें में अलग-अलग राय है। महकमें के कुछ डाक्टर उसे विक्षिप्त नहीं मानते औरा दावा करते हैं कि एक जिम्मेदार मां की तरह यह भी अपने बच्चे का निरंतर देखरेख कर रही है। ऐसी स्थिति में महिला के स्वास्थ्य जांच और उपचार हेतु इसे मनोचिकित्सालय सेंदरी बिलासपुर भेजने की बात की जा रही है।


प्रसुता की दो बच्चों को बेच देने का दावा
विक्षिप्त की अब तक चार संतान होने की बात जब सामने आई तो नवजात के अलावा तीन अन्य संतानों की स्थिति की जांच शुरू कर दी गई है। जांच में यह बात निकलकर आई कि प्रसूता ने वर्ष 2012 और वर्ष 2016 में जिन दो संतानों को जन्म दिया था उसे किसी ने मोटी रकम लेकर बेच दिया है। जबकि इस अंतराल में हुई एक संतान की जन्म के बाद ही मौत हो गई थी। जब उसे सूरजपुर चिकित्सालय में भर्ती कराया गया तो रायगढ़ से पहुंचे एक दम्पति ने दावा किया कि वह इसे गोद ले चुके हंै। 5 माह पूर्व ही सौदा हो चुका है।


जांच कराकर करेंगे कड़ी कार्रवाई
मुझे इस बात की जानकारी पत्रिका के माध्यम से ही मिली है, बहुत ही संवेदनशील विषय है। पूरे मामले की जांच कराई जायेगी, जिले की महिला सेल, महिला एवं बाल विकास विभाग, बाल संरक्षण इकाई और मेडिकल बोर्ड के माध्यम से इस विषय के सभी पहलुओं की जांच और प्रसुता व नवजात के हित को ध्यान में रखकर कार्रवाई की जायेगी। दोषी कोई भी हो उसकी पहचान कर उसके विरूद्ध कार्रवाई की जायेगी।
केसी देवसेनापति, कलक्टर, सूरजपुर


काफी गंभीर विषय है ये
विक्षिप्त महिला का विगत 7- 8 वर्षों से शोषण किया जा रहा है, यह काफी गंभीर विषय है। अविवाहित युवती से चार संतानों की उत्पति और दैहिक शोषण के इस मामले में पुलिस गंभीर है और पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। दोषी एक हो या अनेक सभी के विरूद्ध कार्रवाई होगी।
आराधना बनौदे, प्रभारी महिला सेल, सूरजपुर


कराना चाहिए डीएनए टेस्ट
परिस्थितियों का फायदा उठाकर पीडिता के साथ दैहिक शोषण करने वालों पर अपराध पंजीबद्ध करने का प्रावधान है। दुराचारी की पहचान कर डीएनए टेस्ट करा बच्चों व पीडि़ता को हक दिलाने की जरूरत है। शासन को आगे का फर्ज निभाना चाहिए।
अनिल गोयल, वरिष्ठ अधिवक्ता


अन्य संतानों का लगाएंगे पता
नवजात शिशु को संरक्षित करना प्रमुख उद्देश्य है, यदि प्रसूता विक्षिप्त है तो बाल संरक्षण इकाई नवजात शिशु का संरक्षण करेगी और हालातों को देखते हुए जिला प्रशासन को पत्र लिखा गया है, मातृछाया में नवजात का ख्याल रखा जायेगा, विक्षिप्त युवती की अन्य संतानों का भी पता लगाया जायेगा। यदि किसी ने गोद लिया होगा तो उनसे नियमानुसार कार्रवाई कराई जायेगी।
मनोज जायसवाल, जिला बाल एवं संरक्षण अधिकारी

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