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तो इस बार ऐसे विदा होंगे गजानन

इस बार तापी में नहीं होगा गणपति का विसर्जन, गणपति विसर्जन के लिए 22 कृत्रिम तालाब

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सूरत

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Vineet Sharma

Sep 19, 2018

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तो इस बार ऐसे विदा होंगे गजानन

सूरत. नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में लगी इआइएल के बाद इस बार तापी नदी में गणपति विसर्जन पर रोक लग गई है। इसके लिए पांच फीट से कम ऊंचाई वाली प्रतिमाओं को कृत्रिम तालाबों में विसर्जित किया जाना है। मनपा प्रशासन शहर के विभिन्न जोन क्षेत्रों में २२ कृत्रित तालाब तैयार करा रहा है।

शहर के एक एनजीओ ने तापी नदी मे ंबढ़ रहे प्रदूषण को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में एन्वायरमेंट इंटरेस्ट लिटिगेशन (इआइएल) दाखिल की थी। इस इआइएल के आधार पर एनजीटी ने तेवर सख्त किए तो स्थानीय प्रशासन ने इस बार तापी नदी में विसर्जन पर पूरी तरह रोक लगा दी।

यूं तो बीते कई वर्ष से मनपा प्रशासन छोटी प्रतिमाओं के विसर्जन के लिए कृत्रित तालाबों का निर्माण करा रहा था, लेकिन इस बार पांच फीट तक की गणपति प्रतिमाओं के विसर्जन को देखते हुए मनपा प्रशासन का काम बढ़ गया है। बीते वर्ष मनपा प्रशासन ने शहरभर में 11 कृत्रिम तालाबों का निर्माण कराया था। इन तालाबों के निर्माण पर करीब एक करोड़ रुपए खर्च हुए थे। इस बार यह संख्या बढक़र 22 तक पहुंच गई है और खर्च का आंकड़ा दो करोड़ पार कर गया है।

वराछा-कतारगाम में सबसे ज्यादा

मनपा प्रशासन ने तापी नदी में प्रतिमाओं को जाने से रोकने के बाद की स्थितियों से निपटने के लिए शहरभर में 22 कृत्रित तालाब बनाए हैं। इनमें सबसे ज्यादा पांच-पांच तालाब वराछा और कतारगाम जोन में बनाए जा रहे हैं। इसके अलावा अठवा जोन में चार, रांदेर जोन में तीन, सेंट्रल व उधना जोन में दो-दो और लिंबायत जोन में एक तालाब पर काम हो रहा है। इन तालाबों में करीब एक लाख प्रतिमाओं को विसर्जित किया जा सकेगा।

पत्रिका ने बार-बार उठाया मुद्दा

तापी शुद्धिकरण को अभियान के रूप में राजस्थान पत्रिका ने बार-बार उठाया है। इन खबरों को लेकर सामाजिक संस्थाएं तो सक्रिय होती हैं, लेकिन स्थानीय और राज्य स्तर पर प्रशासनिक मशीनरी हर बार तापी नदी को लेकर असंवेदनशील रही है। पत्रिका ने सिलसिलेवार खबरें छापकर अभियान भी चलाया था, जिसके बाद शहर भाजपा इकाई ने तापी शुद्धिकरण अभियान शुरू किया था।