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ADMISSION 2018 : आर्किटेक्चर में भी खाली पड़ी हैं सीटें

- वीएनएसजीयू समेत अन्य आर्किटेक्चर संस्थानों को नहीं मिले विद्यार्थी

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ADMISSION 2018 : आर्किटेक्चर में भी खाली पड़ी हैं सीटें

सूरत.

राज्य के आर्किटेक्चर महाविद्यालयों को विद्यार्थी नहीं मिल रहे हैं। कभी पहले राउंड में हाउसफुल हो जाने वाले आर्किटेक्चर महाविद्यालय भी आज विद्यार्थियों को तरस रहे हैं। आर्किटेक्चर की 1327 में से 551 सीटें खाली पड़ी हैं। वीर नर्मद दक्षिण गुजरात विश्वविद्यालय को भी विद्यार्थी नहीं मिल रहे हैं।
इंजीनियरिंग, एमबीए, एमसीए के साथ-साथ आर्किटेक्चर में भी सीटें खाली रहने की नौबत आ गई है। आर्किटेक्चर में प्रवेश देने का जिम्मा भी एसीपीसी को सौंपा गया है। पहले राउंड में 1327 सीटों के मुकाबले 1201 विद्यार्थियों को एसीपीसी ने प्रवेश दिया गया। इनमें से 776 ने ही प्रवेश निश्चित किया है। पहले ही राउंड में 551 सीटें खाली रह गई हैं। इनका भरना मुश्किल नजर आ रहा है। सूरत राज्य का सबसे तेजी से विकास करता शहर है। यहां आर्किटेक्चर पाठ्यक्रम की काफी मांग हुआ करती थी, लेकिन सूरत के महाविद्यालयों की सीटें खाली देख कर लग रहा है कि विद्यार्थियों में आर्किटेक्चर के प्रति रुचि घट रही है। वीर नर्मद दक्षिण गुजरात विश्वविद्यालय की 20 सीटों पर 15 विद्यार्थियों ने प्रवेश निश्चित किया है। वेसू के भगवान महावीर कॉलेज में 80 सीटों के मुकाबले 41, बारडोली की उकातरसाडिय़ा यूनिवर्सिटी में 60 सीटों के मुकाबले 42, वेसू के महावीर स्वामी कॉलेज में 40 सीटों के मुकाबले 7 और पी.पी.सवाणी कॉलेज में 30 सीटों के मुकाबले 17 विद्यार्थियों ने प्रवेश निश्चित किया है।

लगातार घटती गईं सीटें
शैक्षणिक सत्र 2013-14 में वीएनएसजीयू ने 120 सीटों के साथ आर्किटेक्चर विभाग की शुरुआत की थी। 2014-15 में सीओए द्वारा 40 सीटें कम कर देने से 80 सीटों पर प्रवेश दिया गया। शैक्षणिक सत्र 2015-16 में 40 और सीटें काट ली गईं। उस साल 40 सीटों पर प्रवेश दिया गया था। शैक्षणिक सत्र 2016-17 में सीओए ने 10 और सीटें कम कर दीं। सीटें काटने से पहले विश्वविद्यालय प्रशासन को नोटिस भेजा गया था। विश्वविद्यालय ने इसे अनदेखा कर दिया। नतीजतन सीओए ने 10 सीटें और काट लीं। शैक्षणिक सत्र 2017-18 में 30 सीटों पर प्रवेश दिया गया था। फिर भी विश्वविद्यालय ने विभाग को सुधारने के लिए कोई कदम नहीं उठाए तो इस साल 10 और सीटें कट गईं। विश्वविद्यालय की लापरवाही के कारण 120 सीटों में से 100 सीट कट चुकी हैं और बाकी 20 सीटों में से 15 पर ही विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया है।