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इंतजार की घडिय़ां पूरी, आज खुल जाएगी राह

केबल ब्रिज समेत 913 करोड़ के नौ प्रोजेक्ट्स का होगा भूमिपूजन और उद्घाटन

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सूरत

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Vineet Sharma

Oct 01, 2018

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इंतजार की घडिय़ां पूरी, आज खुल जाएगी राह

सूरत. सूरतीयों के इंतजार की घडिय़ां पूरी हो चुकी हैं। आठ साल से तैयार हो रहा केबल ब्रिज मंगलवार को आमजन के लिए खुल जाएगा। मुख्यमंत्री विजय रुपाणी समारोहपूर्वक केबल ब्रिज का उद्घाटन कर ब्रिज से गुजरेंगे। केबल ब्रिज का स्थलीय उद्घाटन करने के बाद मुख्यमंत्री संजीवकुमार ऑडिटोरियम में सूरत मनपा के अन्य प्रकल्पों का उद्घाटन और भूमिपूजन करेंगे। मनपा प्रशासन केबल ब्रिज समेत मुख्यमंत्री के हाथों ९१३ करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट्स का लोकार्पण और भूमिपूजन कराने जा रहा है। लोकार्पण से पहले सोमवार शाम को मनपा अधिकारियों ने मौके पर पहुंच कर साइट विजिट किया और व्यवस्थाएं देखीं।

किसी ने किसी वजह से कई बार केबल ब्रिज का काम अटकता रहा। ब्रिज के मूल ठेकेदार गैमन के काम बीच में छोड़ देने के बाद किसी तरह काम दोबारा शुरू हुआ तो केबल टेस्टिंग में समय लग गया। वर्ष 2014 में अठवा लाइंस पर ब्रिज का स्पान गिरने से भी इसके निर्माण में देरी हुई। उस हादसे में दस लोगों की जान गई थी। बार-बार अटकने के बावजूद आखिरकार ब्रिज का काम पूरा हो गया। मनपा प्रशासन और सत्तापक्ष की कोशिश थी कि इसका उदघाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों कराया जाए, लेकिन मोदी ने 30 सितंबर को गुजरात दौर के बीच सूरत के लिए समय नहीं दिया। इसके बाद सत्तापक्ष ने मुख्यमंत्री से संवाद कर ब्रिज के उद्घाटन के लिए गांधी जयंती का दिन तय कर दिया। मनपा प्रशासन ने केबल ब्रिज का लोकार्पण स्थल पर ही कराने का निर्णय किया है।

बीच में छोड़ दिया था काम

अडाजण और अठवा क्षेत्र को जोडऩे के लिए तापी नदी पर केबल स्टेड ब्रिज का टेंडर सितम्बर, 2010 में मंजूर किया गया था। करीब 90 करोड़ रुपए के एस्टीमेट एमाउंट पर गैमन ने 62 फीसदी भाव ऊंचा भरा था। इसे मंजूर कर 143.74 करोड़ रुपए में टेंडर सौंपा गया। ब्रिज पूरा करने के लिए 30 महीने की अवधि तय की गई थी। अवधि पूरा होने के बाद भी ब्रिज का आधा से कम काम पूरा होने और केबल आदि की टेस्टिंग में लेटलतीफी आदि को देखते हुए मनपा प्रशासन ने जब सख्ती दिखाई तो कांट्रेक्टर फर्म ने कई तरह की शर्त रखकर मनपा को पशोपेश में डाल दिया था। मनपा की स्थाई समिति ने गैमन के रवैए को देखते हुए वर्ष २०१५ में उसे पांच साल के लिए काली सूची में डाल दिया था। इसके बाद अधूरे पड़े केबल ब्रिज को पूरा करना मनपा के लिए चुनौती बन गया था। बाद में नए ठेकेदार को काम सौंपकर इसे २०१६ में पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया था।