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CENTRAL SCHOOL : खेलने निकले कई बच्चे भटकते रहे, स्कूल ने नहीं किया कोई बंदोबस्त

- केंद्रीय विद्यालय पीपलोद का मामला : न पीटी टीचर, न ही कोई दूसरा शिक्षक साथ- बच्चों ने खुद वेबसाइट पर खेल महाकुंभ का वेन्यू खोजा, किराए की गाड़ी से पहुंचे

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सूरत.

सरकार बच्चों में खेलों को प्रोत्साहन देने के लिए कई कार्यक्रम चला रही है, लेकिन कई स्कूलों में खेलों की किस हद तक उपेक्षा हो रही है, इसकी बानगी गुरुवार को देखने को मिली। पीपलोद के केंद्रीय विद्यालय-एक के विद्यार्थियों को खेल महाकुंभ में हिस्सा लेने के लिए कई घंटे तक शहर में यहां से वहां भटकना पड़ा। वह खुद ही आयोजन स्थल पर पहुंचे। स्कूल की ओर से उनके लिए किसी तरह की व्यवस्था नहीं की गई। विद्यार्थी कब और कैसे आयोजन स्थल पर पहुंचे तथा आयोजन स्थल से कहां गए, इसके बारे में स्कूल प्रशासन को कोई परवाह नहीं थी। छोटे बच्चे स्कूल समय में स्कूल से ही स्कूल के लिए खेलने निकले, लेकिन उनके साथ स्कूल से कोई नहीं गया। स्कूल प्रशासन का कहना है कि खेल महाकुंभ उनका आयोजन नहीं है, इसलिए उसने किसी तरह की व्यवस्था नहीं की।
इन दिनों राज्यभर में खेल महाकुंभ चल रहा है। पीपलोद के केंद्रीय विद्यालय क्रमांक एक के विद्यार्थियों ने भी खेल महाकुंभ में हिस्सा लेने के लिए पंजीकरण करवाया। स्कूल की कक्षा 7 और 8 के विद्यार्थियों ने खो-खो में हिस्सा लेने के लिए पंजीकरण करवाया था। पंजीकरण स्कूल के पीटी टीचर आर.बी.सिंह ने किया था। गुरुवार को विद्यार्थियों को खो-खो प्रतियोगिता में हिस्सा लेना था। उनका कहना है कि बुधवार को उन्हें बताया गया कि प्रतियोगिता मजूरा गेट में कहीं होनी है। वहां जाना पड़ेगा। विद्यार्थी गुरुवार को स्कूल पहुंचे तो पता चला कि स्कूल प्रशासन ने उन्हें आयोजन स्थल तक पहुंचाने के लिए कोई व्यवस्था नहीं की। उनसे कहा गया कि वह अपनी सुविधा के अनुसार आयोजन स्थल पर पहुंच जाएं। विद्यार्थी यह सुनकर हैरान रह गए। कुछ विद्यार्थी अभिभावकों के साथ मजूरा गेट पहुंचे। वहां पता चला कि प्रतियोगिता यहां नहीं है। फिर बच्चों ने नेट पर खेल के आयोजन स्थल को सर्च किया। पता चला कि डूमस के पास के.जी. पीठावाला स्कूल में आयोजन है। मजूरा गेट से विद्यार्थी निजी वाहनों में पीठावाला कॉलेज पहुंचे। उन्हें पता नहीं था कि पीठावाला कॉलेज और स्कूल अलग-अलग हैं। जैसे-तैसे बच्चे पीठावाला स्कूल पहुंचे। तब तक वह मानसिक और शारीरिक रूप से थक चुके थे। शायद इसीलिए वह मेच भी हार गए। स्कूल की ओर से न कोई शिक्षक और न ही कोई कर्मचारी बच्चों के साथ था।

पीटी शिक्षक ने कहा- कोई आदेश नहीं था
संवाददाता : खेल महाकुंभ के लिए बच्चों का पंजीकरण किसने और कहां करवाया?
पीटी शिक्षक आर.बी.ङ्क्षसह : स्कूल की ओर से पंजीकरण करवाया गया।
संवाददाता : स्कूल ने बच्चों को आयोजन स्थल पर ले जाने की व्यवस्था क्यों नहीं की?
आर.बी.ङ्क्षसह : केन्द्रीय विद्यालय की ओर से कोई आदेश नहीं था, इसलिए नहीं की गई।
संवाददाता : बच्चे स्कूल के लिए खेलने निकले। कोई शिक्षक साथ क्यों नहीं था?
आर.बी.सिंह : केन्द्रीय विद्यालय का आदेश नहीं था, इसलिए कोई नहीं गया।
संवाददाता : छोटे बच्चों को आयोजन स्थल खोजने में परेशानी हुई। इस बीच कुछ अप्रिय हो जाता तो कौन जिम्मेदार होता?
आर.बी.सिंह : आदेश नहीं था.. प्राचार्य का तबादला हो गया है, कार्यकारी प्राचार्य जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। बच्चों के साथ किसी को होना चाहिए था, लेकिन आदेश नहीं था।