
बाल अधिकारों की हिफाजत के लिए चाइल्ड ट्रिब्यूनल जरूरी - सत्यार्थी
सूरत. नोबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी का कहना है कि देश में बालकों के साथ यौन अत्याचारों की हालत भयावह है। हर घंटे में चार बच्चे यौन अत्याचार का शिकार होते हंै। इसे रोकने के लिए हमारे प्रयास जारी हैं। सरकार ने इसके लिए पोक्सो जैसे कड़े कानून तो बनाए हैं, लेकिन कई राज्यों में मामलों की सही मॉनीटरिंग नहीं होने से निपटारे में ५० साल से भी अधिक समय लग रहा है। नेचुरल जस्टिस भी जरूरी है। यानी पीडि़त को ध्यान में रखकर न्याय हो। उसका सही ढंग से पुनर्वास जरूरी है, जो हमारी व्यवस्था के कारण नहीं हो पाता। इसके लिए अलग से बजट होना चाहिए। जिस तरह पर्यावरण को बचाने के लिए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की रचना की गई है तथा उसे कई प्रकार की शक्तियां दी गई हैं, उसी तरह नेशनल चाइल्ड ट्रिब्यूनल जरूरी है, जो बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए मॉनिटरिंग कर सके।
संतोक बा अवार्ड समारोह में आए कैलाश सत्यार्थी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि केन्द्र सरकार चाइल्ड ट्रैफिकिंग रोकने के लिए प्रयासरत है। इसके लिए नया बिल तैयार किया गया है। इसे पिछले महीने अनुमति मिल गई है, जल्द संसद में पेश होगा। सीरिया, सूडान समेत कई देशों में एक करोड़ बच्चे युद्ध का शिकार होकर विस्थापित हुए। कई जगहों पर प्राकृतिक आपदाओं का शिकार हो रहे हैं। हम उनके अधिकारों के लिए भी प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने अवार्ड में मिली एक करोड़ रुपए की राशि बच्चों के कल्याण के लिए समर्पित करने की घोषणा की।
बाल मजदूरी के उन्मूलन के लिए सरकार कटिबद्ध
मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने सत्यार्थी के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार बाल मजदूरी के उन्मूलन के लिए कटिबद्ध है। इसके लिए प्रयास किए जा रहे है। उन्होंने दुनियाभर में देश का नाम रोशन करने वाले इसरो के किरण कुमार को भी सराहा। राज्यपाल ओ.पी.कोहली ने कहा कि वह एसआरके के संतोक बा अवार्ड समारोह का पहले भी हिस्सा बन चुके हैं। दलाई लामा को पुरस्कृत किए जाने के दौरान वह उपस्थित थे। उन्होंने प्रतिभाओं और समाज के लिए उपयोगी लोगों के सम्मान को ऋषि ऋण बताया और अन्य लोगों को इससे प्रेरणा लेने की बात कही।
अवार्ड बहुत बड़ी बात : किरण कुमार
इसरो के अध्यक्ष ए.एल.किरण कुमार ने कहा कि विक्रम साराभाई के प्रयासों से इसरो का सफर शुरू हुआ था और आज हमारी गिनती दुनिया के उन ५-६ बेहतरीन देशों में होती है, जो अंतरिक्ष में दखल रखते हैं। हम मछुआरों, किसानों और अन्य लोगों तक सही जानकारियां पहुंचा कर उनकी मदद कर पा रहे हैं। इस अवार्ड के जरिए हमारे काम की जो सराहना की गई है, वह हमारे लिए बहुत बड़ी बात है।
Published on:
29 May 2018 09:09 pm
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