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आय बढ़ाने के लिए नागरिकों की जेब पर डाका

नगरपालिका ने की करों में बेतहाशा बढ़ोतरी

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सूरत

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Sunil Mishra

Oct 05, 2018

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आय बढ़ाने के लिए नागरिकों की जेब पर डाका


दमण. नगरपालिका प्रशासन ने आय में आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिए अब तमाम तरह के टैक्स में भारी भरकम वृद्धि की है। इसका आम लोगों पर असर पडऩा तय है। कहा जा रहा है कि चुनाव के दौरान पार्षदों द्वारा जीत के लिए खर्च की गई रकम अब नागरिकों से ही टैक्स के रूप में वसूली जा रही है।
पालिका ने दुकानों के लाइसेंस शुल्क में बढ़ोतरी की है। पिछले वर्ष जिसके 4०० रुपए प्रतिमाह थे, उसके इस वर्ष से एक हजार रुपए देने पड़ेंगे। मेडिकल का दो हजार रुपए, जन्मप्रमाण पत्र के पहले 5 रुपए थे अब 50 रुपए, निवास प्रमाण पत्र के 30 रुपए से बढक़र 100 रुपए किए गए हैं। पानी और विद्युत एनओसी के लिए पहले 100 रुपए थे, अब इसे दोगुना कर दिया गया है। गृहकर वर्ष 2010 से 5 प्रतिशत था, अब 20 प्रतिशत हो गया है। लीगल संपत्ति स्थानान्तरण पहले 5०० रुपए था, जो अब एक हजार रुपए हो गया है। फुटपाट पर जिस स्टॉल के २० रुपए देने होते थे, उसका ४० रुपए किया गया है। नगर पालिका बाजार का नवीनीकरण के बाद किराया कई गुना बढ़ा है अभी तक एक हजार रुपया प्रतिमाह था, जो अब 7 हजार रुपया प्रतिमाह होने की आशंका है। इसके अलावा अन्य कई कार्यों के लिए दरों में बढ़ोतरी की गई है।

कमाई नहीं तो अध्यक्ष पद का मोह नहीं
नगरपालिका चुनाव में लाखों रुपए खर्च करके बने पार्षदों को आज अपना खर्च निकालना भी मुश्किल हो गया है। अब प्रत्येक कार्य के टेन्डर ऑनलाइन होने लगे हैं और ठेकेदारों की ङ्क्षरग प्रणाली भी समाप्त हो गई है। ज्यादातर कार्य ऑनलाइन टेन्डर के माध्यम से बड़ी एजेंसी को दिए जाने लगे हंै। नगर पालिका के सीओ प्रत्येक कार्य पर नजर रखते हैं। शौकत मिठानी के त्यागपत्र के बाद अध्यक्ष पद के लिए भाजपा से कोई आगे नहीं आ रहा है। अब पार्षद भाजपा के मेंडेंट का इंतजार कर रहे हैं, जिसे मेंडेंट दे दे, वही अध्यक्ष बनेगा। नगर पालिका में अवैध कमाई बंद होने के कारण कोई भी अध्यक्ष पद के लिए खर्चा नहीं करना चाहता।

पालिका को स्वनिर्भर बनाना जरूरी
नगरपालिका अधिकारियों ने बताया कि नगरपालिका अन्य राज्यों और शहरों से बहुत कम टैक्स लेती थी। इसको चलाने के लिए प्रशासन से ग्रांट लेनी पड़ती थी। अब प्रशासन ने भी नगरपालिका को आत्मनिर्भर होने को कहा है। इसके कारण अब टैक्स सहित आय के विभिन्न साधनों पर ध्यान दिया जा रहा है। प्रशासक प्रफुल्ल पटेल की नियुक्ति के बाद भ्रष्टाचार और ऐशोआराम के साधनों पर अंकुश लगा है।