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CS RESULT : देवांश शाह ने फिर किया शहर का नाम रोशन

देवांश ने सीए की आइपीसीसी की परीक्षा में भी देश में तीसरा स्थान प्राप्त किया था। सीए की एक्जीक्यूटिव परीक्षा में उसने देश में पांचवा और सीए फाइनल की परीक्षा में देश में चौथा स्थान हासिल किया था।

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CS RESULT : देवांश शाह ने फिर किया शहर का नाम रोशन

सूरत.

इंस्टीट्यूट ऑफ कंपनी सेक्रेटरी ऑफ इंडिया की ओर से जून में आयोजित एक्जीक्यूटिव और प्रोफेशनल की परीक्षा का परिणाम शनिवार को जारी किया गया। प्रोफेशनल की परीक्षा में सूरत के देवांश शाह ने इंडिया टॉप फिफ्टी में दूसरा स्थान हासिल कर शहर का नाम रोशन किया है। देवांश ने सीए की आइपीसीसी की परीक्षा में भी देश में तीसरा स्थान प्राप्त किया था। सीए की एक्जीक्यूटिव परीक्षा में उसने देश में पांचवा और सीए फाइनल की परीक्षा में देश में चौथा स्थान हासिल किया था। सीएस की एक्जीक्यूिटव परीक्षा में सूरत से 280 विद्यार्थियों ने परीक्षा दी थी। इनमें से सिर्फ 28 विद्यार्थी परीक्षा पास करने में सफल रहे। प्रोफेशनल परीक्षा में सूरत से सिर्फ तीन विद्यार्थी पास हुए हैं।

चौथे स्थान पर देवांश शाह

इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड एकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (आइसीएआइ) की सीए फाइनल परीक्षा के परिणाम में सूरत के विद्यार्थियों ने देशभर में श्रेष्ठ स्थान हासिल कर सफलता के परचम लहराए। नए पाठ्यक्रम की परीक्षा में शहर के प्रीत प्रीतेश शाह ने देश में पहला स्थान प्राप्त किया तो पुराने पाठ्यक्रम की परीक्षा में अनुराग बागडिय़ा तीसरे स्थान पर रहे। इसके अलावा चौथे स्थान पर देवांश शाह, पांचवे पर सौरभ गौरीसरिया, १६वें स्थान पर गोपाल मालानी, ४५वें स्थान पर वैराग शाह और राज मेहता ४८वें स्थान पर रहे। फाइनल के दोनों पाठ्यक्रमों में टॉपर रहे ५० विद्यार्थियों की सूची में सूरत के १० विद्यार्थी स्थान बनाने में सफल रहे। इसके अलावा सैकड़ों अन्य विद्यार्थियों ने भी परीक्षा में श्रेष्ठता साबित की। नए पाठ्यक्रम में नमन केजरीवाल छठे, भाविक दूधवाला ३०वें, गर्वित सेकसरिया और हेम शाह ३२वें स्थान पर रहे।

मना जश्न, टॉपर्स को दी बधाई
परिणाम आते ही नए कोर्स में अव्वल रहे प्रीत शाह को बधाइयां देने वालों का तांता लग गया। परिजनों और दोस्तों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। राजस्थान पत्रिका से बातचीत में प्रीत ने बताया कि उसने तीन साल तक निरंतर पढ़ाई जारी रखी और अंतिम परीक्षा से छह महीने पहले दुगुनी मेहनत की। उसने सफलता का श्रेय परिवार के साथ उन वरिष्ठजनों को भी दिया, जिन्होंने उसका मार्गदर्शन किया।