
सजने लगा आसपास दादा का दरबार
सूरत.दिपावली के बाद छुट्टियों में शहर के बाजार भले ही सूनसान पड़े हो लेकिन शहर के गोड़ादरा क्षेत्र में इन दिनों जमकर खरीददारी होती है। यहां महर्षि आस्तिक (आसपास दादा) मंदिर पर लगे सालाना मेले में लोग दर्शनों के साथ खरीददारी का भी आनंद लेते है।
मेला कमेटी के लोगों ने बताया दिपावली के बाद भाई दूज से पंचमी तक मंदिर पर श्रद्धालुओं का मेला लगता था। लेकिन कालान्तर में दिपावली से ही मेला शुरु होने लगा। जो पंचमी बाद भी जारी रहने लगा। दूर दराज से आने वाले श्रृद्धालु अपनी समयानुकलता के चलते एक दो दिन पहले तथा एक दो दिन बाद तक आते है।
आठ से दस दिनों के दौरान लाखों श्रद्धालु महर्षि आस्तिक (आसपास दादा) के दर्शन करते है। दूज से पंचमी तक श्रृद्धालुओं की संख्या बहुत अधिक होती है। इसके लिए व्यवस्थाएं की गई है। मंदिर परिसर में दर्शनार्थियों के लिए बैरिकेट लगाए गए है, ताकी भीड़-भाड़ में किसी तरह की अव्यवस्था नहीं हो। इसके अलावा महर्षि आस्तिक स्कूल में झूले, खेल तमाशों वालों व खान-पान की सामग्री बेचने वालों को जगह आवंटित कई गई है।
जहां व्यापारियों ने अपने शामियाने लगाए है। पुलिस व दमकल विभाग के सहयोग से मेला स्थल पर पार्किंग व यातायात की व्यवस्था भी की जा रही है। बुधवार से ही मेले में श्रद्धालुओं का आना शुरु हो गया है। उल्लेखनीय हैं कि गोड़ादरा में प्रतिवर्ष दिपावली के दौरान महर्षी आस्तिक (आसापास दादा) मंदिर पर श्रृद्धालुओं का मेला लगता है।
जिसमें गोडादरा, देवध, कुंभारिया, डिंडोली समेत जिले के अन्य गांवों के लोग बड़ी संख्या में मेले में हिस्सा लेते है। केन्या, दक्षिण अफ्रिका व अन्य देशों में बसे इन गांवों के लोग भी इस मौके पर महर्षि आस्तिक के दर्शनों के लिए सूरत आते है। वर्तमान में इस क्षेत्र में रहने वाले उत्तरप्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान के प्रवासियों में भी गोड़ादरा का मेला लोकप्रिय है।
Published on:
07 Nov 2018 04:09 pm
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