22 सितंबर 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

EDUCATION VNSGU : यस-नो पर क्लिक नहीं करना पड़ा भारी ..!

- कई विद्यार्थियों के प्रवेश रद्द -प्रवेश समिति के सदस्य ही प्रक्रिया पर उठाने लगे अंगुली
2 min read
Google source verification
EDUCATION VNSGU : यस-नो पर क्लिक नहीं करना पड़ा भारी ..!

EDUCATION VNSGU : यस-नो पर क्लिक नहीं करना पड़ा भारी ..!

सूरत.

वीर नर्मद दक्षिण गुजरात विश्वविद्यालय की प्रवेश प्रक्रिया के कारण कई विद्यार्थियों के भविष्य पर संकट मंडरा रहा है। सॉफ्टवेयर के चक्कर में इनके प्रवेश खारिज हो गए। प्रवेश प्रक्रिया को लेकर प्रवेश समिति के सदस्यों ने ही अंगुली उठाई तो अब इन विद्यार्थियों को प्रवेश देना शुरू कर विवाद शांत करने का प्रयास किया जा रहा है।
विश्वविद्यालय के पीजी पाठ्यक्रम में सैकड़ों विद्यार्थियों के प्रवेश रद्द कर दिए गए। यह विद्यार्थी कक्षा में जाने लगे थे, लेकिन एक क्लिक नहीं करना उनके लिए भारी पड़ गया। ऑनलाइन प्रवेश प्रक्रिया में प्रवेश निश्चित करने के लिए विद्यार्थियों को यस और नो पर क्लिक करना होता है। बाद में उनसे पूछा जाता है कि उन्होंने सही ऑप्शन पर क्लिक किया है या नहीं। इस बार भी उन्हें यस या नो पर क्लिक करना होता है। जिनके प्रवेश रद्द हुए हैं, वह इस दूसरे ऑप्शन का शिकार हुए। दूसरा ऑप्शन समझ नहीं आने के कारण उन्होंने यस या नो पर क्लिक नहीं किया। जिन्होंने दूसरे ऑप्शन में क्लिक नहीं किया, उन सभी के प्रवेश रद्द कर दिए गए। कॉलेज को उन्हें फीस लौटाने का आदेश दिया गया। इसको लेकर प्रवेश समिति के कई सदस्य प्रवेश प्रक्रिया पर अंगुली उठाने लगे। मामला तूल पकड़ता, इससे पहले इन विद्यार्थियों को प्रवेश देना शुरू किया गया है। ऐसे में, जब पीजी की कई सीटें रिक्त पड़ी हैं, कई विद्यार्थी प्रवेश से वंचित हैं। सिंडीकेट सदस्यों ने रिक्त सीटों पर विद्यार्थियों को प्रवेश देने की मांग की है। प्रथम सेमेस्टर की परीक्षा पास आ रही है। अंतिम समय पर प्रवेश दिया गया तो विद्यार्थी फेल हो सकते हैं या उनकी एटीकेटी आ सकती है। इस मामले में विश्वविद्यालय को ज्ञापन भी सौंपा गया है।

SURAT EDUCATION : सरकारी आदेश का विश्वविद्यालय में हो रहा उल्लंघन..?

एडमिशन न मिलने से भड़कीं छात्राएं, गल्र्स कॉलेज में नारेबाजी

स्कूल शिक्षा विभाग की रिपोर्ट में खुलासा : सरकारी स्कूलों में बच्चे बढ़े, निजी में हुए कम