28 मई 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

FEE ISSUE : सूरत जोन के 661 विद्यालयों ने नहीं दिया एफिडेविट और फीस प्रपोजल

एफआरसी 350 स्कूलों को नोटिस भेजने की तैयारी में, बाद में होगी कड़ी कार्रवाई

2 min read
Google source verification
surat photo

FEE ISSUE : सूरत जोन के 661 विद्यालयों ने नहीं दिया एफिडेविट और फीस प्रपोजल


सूरत.

सूरत जोन के सात जिलों के स्कूलों की फीस तय करने वाली फीस नियामक समिति (एफआरसी) ने एफिडेविट और फीस प्रपोजल नहीं देने वाले स्कूलों की जानकारी जुटा ली है। सूरत जोन के 661 स्कूल ऐसे हैं, जिन्होंने एफिडेविट और फीस प्रपोजल की जानकारी नहीं दी है। ऐसे स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई की शुरुआत की गई है। एफआरसी ने पहले चरण में 350 से अधिक स्कूलों को नोटिस देने का फैसला किया है। नोटिस के संदर्भ में स्पष्टीकरण नहीं देने पर एफआरसी ने कड़ी कार्रवाई करने के संकेत दिए हैं।
एफआरसी को एफिडेविट और प्रपोजल के आधार पर स्कूलों की फीस तय करने का अधिकार है। निजी स्कूलों की फीस पर लगाम कसने के लिए राज्य सरकार ने एफआरसी का गठन किया था। दक्षिण गुजरात के सूरत, वलसाड, भरुच, नवसारी, तापी, नर्मदा और डांग जिलों के स्कूलों की फीस तय करने का जिम्मा सूरत जोन की एफआरसी को सौंपा गया है। पिछले दिनों मजूरा गेट के गांधी डिग्री इंजीनियरिंग कॉलेज में एफआरसी के चेयरपर्सन अशोक दवे की अध्यक्षता में पत्रकार वार्ता का आयोजन किया गया था। इसमें जिला शिक्षा अधिकारी यू.एन. राठौड़, एफआरसी सदस्य रुपिन पच्चीगर, किशोर चावड़ा, प्रशांत देसाई और जगदीश चावड़ा भी मौजूद थे। पत्रकार वार्ता में बताया गया था कि शैक्षणिक सत्र 2017-18 में 123 स्कूलों ने फीस के लिए दरख्वास्त दी थी। इनमें से 55 स्कूलों की फीस तय कर दी गई। 68 स्कूलों की फीस तय की जानी है। जिन 1782 स्कूलों ने एफिडेविट जमा किए हैं, उनमें से 1578 की फीस तय कर दी गई है। 58 स्कूलों में से 25 ऐसे हैं, जिनके 71 माध्यमों में 10 हजार रुपए से अधिक की फीस कम की गई है। शैक्षणिक सत्र 2018-19 के लिए 117 स्कूलों ने प्रपोजल भेजे हैं। इनमें से 91 स्कूलों की फीस तय कर दी गई है। 1383 एफिडेविट आए हैं, जिनमें से 582 की फीस तय कर आदेश दे दिया गया है। पहले राउंड में 58, दूसरे राउंड में 46 और तीसरे राउंड में 33 स्कूलों की फीस तय की गई। इनमें सूरत, वलसाड, भरुच, नवसारी, तापी, नर्मदा और डांग जिले के स्कूल शामिल हैं। जिलों में कितने निजी स्कूल हैं, इनमें कितने प्राथमिक, माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक स्कूल हैं, एफआरसी के पास इसकी जानकारी नहीं थी। इनमें से कितने स्कूलों ने एफआरसी के समक्ष एफिडेविट और प्रपोजल जमा नहीं किए है, इसकी भी एफआरसी के पास जानकारी नहीं थी। आश्चर्य की बात यह थी कि जिला शिक्षा अधिकारी के पास भी ऐसे स्कूलों के आंकड़े नहीं थे। एफआरसी ने आश्वासन दिया था कि वह ऐसे स्कूलों की जानकारी जुटाएगा और कार्रवाई शुरू करेगा। पत्रकार वार्ता के तीन सप्ताह बाद एफआरसी ने सूरत जोन में आने वाले ऐसे स्कूलों की जानकारी जुटा ली है। एफआरसी के सदस्य रुपिन पच्चीगर ने बताया कि सूरत जोन के 661 स्कूलों ने अभी तक एफआरसी के समक्ष एफिडेविट और प्रपोजल जमा नहीं करवाए हैं। इन स्कूलों के खिलाफ एफआरसी ने कार्रवाई शुरू कर दी है। पहले चरण में 350 से अधिक स्कूलों को नोटिस भेजा जा रहा है।

दी जाएगी मोहलत
स्कूल संचालकों को भेजे जाने वाले नोटिस में पूछा जाएगा कि अभी तक एफिडेविट और प्रपोजल क्यों जमा नहीं किया गया है। उन्हें एफिडेविट और प्रपोजल जमा करने के लिए समय दिया जाएगा। स्पष्टीकरण नहीं आने पर स्कूलों के खिलाफ एफआरसी ने कार्रवाई करने की बात कही है। एफआरसी ऐसे स्कूलों की फीस खुद ही तय कर देगा।