
सूरत.
वीर नर्मद दक्षिण गुजरात विश्वविद्यालय में गुरुवार को एनएसयूआई ने रामधुन गाकर विरोध प्रदर्शन किया। संगठन ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय में विद्यार्थी हित नहीं, बल्कि राजकीय हित को ध्यान में रखकर निर्णय किए जा रहे हैं। एनएसयूआई ने कुलपति की नियुक्ति और महाविद्यालयों की मान्यता पर भी सवाल खड़े किए। विभिन्न मामलों को लेकर कुलपति को ज्ञापन सौंपा गया।
विश्वविद्यालय में गुरुवार को सिंडीकेट सदस्य भावेश रबारी की अगुवाई में एनएसयूआई ने विरोध प्रदर्शन किया। संगठन के कार्यकर्ताओं ने जैसे ही प्रशासनिक भवन में प्रवेश किया, सुरक्षाकर्मी एकत्रित हो गए। कुलपति कार्यालय के पास सुरक्षा कड़ी कर दी गई। कुलपति कार्यालय के पास लगी जाली को बंद कर एनएसयूआई के कार्यकर्ताओं को आगे जाने से रोक दिया गया। संगठन का कहना है कि विश्वविद्यालय में इन दिनों विद्यार्थी हित की जगह राजकीय हित को ध्यान में रखकर निर्णय किए जा रहे हैं। शॉपिंग सेंटरों में चल रहे महाविद्यालयों को मान्यता दी जा रही है। कुलपति डॉ. शिवेन्द्र गुप्ता की नियुक्ति गैर-कानूनी है। कुलपति पद का गलत उपयोग कर महाविद्यालयों को मान्यता प्रदान कर रहे हैं। विद्यार्थियों को रीएसेसमेंट की सुविधा नहीं मिल रही है। लॉ संकाय की एक छात्रा को परीक्षा में नहीं बैठने दिया गया तो उसने आत्महत्या कर ली थी। इस मामले में अभी तक जांच रिपोर्ट नहीं सौंपी गई है। एनएसयूआई ने प्रवेश प्रक्रिया में विलंब का भी आरोप लगाया। ऐसे कई मामलों को लेकर संगठन ने विरोध प्रदर्शन किया।
कार्यकर्ताओं ने विरोध जताने के लिए स्वामी विवेकानंद और सरस्वती की प्रतिमा का जलाभिषेक किया। कुलपति कार्यालय की ओर जाने से रोकने पर सभी कार्यकर्ता प्रशासनिक भवन में बैठ गए और रामधुन गाकर विरोध प्रदर्शन किया।
गुटबाजी और आरोप-प्रत्यारोप
विश्वविद्यालय में इन दिनों दो गुट बन गए हैं। एक गुट कुलपति समर्थकों का है, जबकि दूसरा सिंडीकेट सदस्यों का। दोनों गुट एक-दूसरे के खिलाफ तरह-तरह के आरोप लगा रहे हैं। कुलपति ने कई सिंडीकेट सदस्यों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई कर जांच के आदेश दिए तो सिंडीकेट सदस्यों ने कुलपति की डिग्री और उनकी योग्यता पर प्रश्न खड़े करते हुए राष्ट्रपति और राज्यपाल से शिकायत की है। इस तनातनी के बीच विद्यार्थियों के लिए किए जाने फैसले विवादित होते जा रहे हैं।
Published on:
17 May 2018 09:32 pm
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