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ईस्ट इंडिया कम्पनी का पहला जहाज ‘हेक्टर’ आज पहुंचा था सूरत के तट पर

सूरत बना था ब्रिटिश हुकूमत का गेटवे ऑफ इंडिया, 24 अगस्त 1608 थी वह तारीख जिसने हिन्दुस्तान का इतिहास और भूगोल बदल दिया था

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सूरत

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Vineet Sharma

Aug 24, 2021

ईस्ट इंडिया कम्पनी का पहला जहाज ‘हेक्टर’ आज पहुंचा था सूरत के तट पर

ईस्ट इंडिया कम्पनी का पहला जहाज ‘हेक्टर’ आज पहुंचा था सूरत के तट पर

विनीत शर्मा

सूरत. इतिहास के छात्रों के लिए आज का दिन बड़ा खास है। जिस ब्रितानी हुकूमत ने देश को सैकड़ों बरस गुलाम रखा, कारोबार के बहाने उसे देश में घुसने का रास्ता सूरत ने दिया था। ईस्ट इंडिया कंपनी का पहला जहाजी बेड़ा हेक्टर साल 1608 में 24 अगस्त को कैप्टन हॉकिन्स के नेतृत्व में सूरत के तट पर पहुंचा था। आगे चलकर यह तारीख इतिहास में दर्ज हो गई, जिसने हिंदुस्तान का इतिहास ही नहीं, भूगोल भी बदल दिया। 1857 की क्रांति के बाद 1874 में ब्रितानी हुकूमत ने कंपनी को बंद कर औपचारिक रूप से देश का शासन अपने हाथ में ले लिया था।

मुगल शासक जहांगीर के शासनकाल में ईस्ट इंडिया कम्पनी का पहला जहाज ‘हेक्टर’ पहले-पहल कारोबार के विस्तार के लिए सूरत के तट पर पहुंचा था। इससे पहले पुर्तगालियों और डच व्यापारियों का भी देश के साथ कारोबारी नाता बन गया था। उस वक्त सूरत के तट से दुनियाभर के 84 शहरों से कारोबार होता था। इन देशों के जहाज सूरत तट पर डेरा डाले रहते थे। ये कारोबारी मूलरूप से काली मिर्च और अन्य मसालों व मलकल के कपड़े के आकर्षण में सूरत आए थे।

सूरत ने दिया सहारा

16वीं शताब्दी में जब अंग्रेजी साम्राज्य ढह रहा था, सूरत ने सहारा दिया था। अंग्रेजों के मुकाबले हालैंड और पुर्तगाल अपना कारोबारी साम्राज्य फैला रहे थे। इसी बीच 31 दिसंबर 1600 में इंग्लैंड की महारानी ने ईस्ट इंडिया कंपनी को पूर्वी दुनिया के देशों में व्यापार का एकाधिकार दिया था। पूरब के देशों में कारोबार के लिए ईस्ट इंडिया कंपनी ने इंडोनेशिया और दक्षिण अफ्रीका के बाद सूरत के तट पर लंगर डाला था। बाद के दिनों में ईस्ट इंडिया कंपनी ने मुंबई, कोलकाता और चेन्नई जैसे महानगरों की बुनियाद भी रखी।

पहले भी कर चुके थे भारत से व्यापार की कोशिश

अंग्रेज इससे पहले भी भारत से व्यापार करने की कोशिशें कर चुके थे। यहां पहले से कारोबार कर रहे पुर्तगालियों और डच व्यापारियों की वजह से अंग्रेजों की शुरुआती कोशिशें सिरे नहीं चढ़ पाई। बाद में अंग्रेजों ने ब्रितानी हुकूमत के संरक्षण में एक बार फिर भारत में पैर जमाने की कवायद की और कामयाब हो गए। कंपनी के विस्तार के लिए तत्कालीन मुगल शासक जहांगीर को मनाने में ईस्ट इंडिया कंपनी को करीब बीस साल लगे थे। हालांकि औरंगजेब ने एक बार अंग्रेजों को भारत से चले जाने का आदेश भी दिया था, लेकिन बाद में मान-मनौव्वल के बाद कारोबार की अनुमति जारी रखी थी।

सूरत में लगाई थी फैक्ट्री

ईस्ट इंडिया कंपनी ने 1646 तक सूरत समेत भारत के समुद्रतटीय इलाकों के बड़े शहरों में अलग-अलग सामानों को बनाने के लिए 23 फैक्ट्रियां लगाई थीं। इन फैक्ट्रियों में भारत से ही कच्चा माल लेकर उत्पाद तैयार होते थे। 1689 में सूरत की फैक्ट्री का दौरा करने वाले अंग्रेज़ पादरी जॉन ओविंगटन ने अपने संस्मरण में यहां की कैंटीन के खाने की तारीफ की है।