
पहला स्टेट ऑफ द आर्ट रेस्ट रूम सूरत में बनेगा
विनीत शर्मा
सूरत. कारोबारी जरूरतों के लिए जो लोग सूरत आते हैं, उन्हें फ्रेश होने के लिए जगह तलाशना मुश्किल होता है। भले सुबह आकर शाम को लौटना हो, होटल में कमरा लेना पड़ता है। शहर में रह रहे लोगों को भी कई बार उस वक्त मुश्किल पेश आती है, जब घंटे-दो घंटे बैठकर किसी पेचीदा मसले पर बातचीत करनी हो और मन माफिक जगह नहीं मिलती। उनके लिए किसी रेस्टोरेंट में देर तक बैठना संभव नहीं होता। ऐसे लोगों की मुश्किल आसान करने के लिए गुजरात कॉरपोरेट सोशल रेस्पांसिबिलिटी अथॉरिटी सिंगापुर की तर्ज पर सूरत में पहला स्टेट ऑफ द आर्ट अर्बन रेस्ट रूम कॉम्प्लेक्स तैयार करने जा रहा है। यह प्रदेश ही नहीं, देशभर में अकेला प्रोजेक्ट है, जिसके लिए अथॉरिटी ने सर्वे कर लोगों से फीडबैक लिया और दिल्ली एयरपोर्ट समेत सिंगापुर तक के मॉडल का अध्ययन किया।
रेस्ट रूम का पायलट प्रोजेक्ट तैयार होने के बाद दिनभर के कामकाज के लिए सूरत आना लोगों को भारी नहीं लगेगा। सूरतीयों को भी किसी के साथ मीटिंग करनी हो और जगह की दिक्कत हो तो यह रेस्ट रूम उन्हेें जगह मुहैया कराएगा। महिलाओं के लिए रेस्ट रूम को फ्रेंडली बनाया जाएगा। महिलाओं को सेनेटरी नेपकिन की जरूरत हो तो रेस्ट रूम में लगी वेंडिंग मशीन से ले सकेंगी। रेस्ट रूम कॉम्प्लेक्स पूरी तरह एसी होगा। इसमें वेटिंग एरिया होगा। मीटिंग एरिया और बच्चों की सार-संभाल के लिए बेबी केयर सेक्शन होगा। नहाने और फ्रेश होने के लिए बॉथ एंड टॉयलेट ब्लॉक होगा। इसके अलावा बैठक के लिए आने वाले लोगों के लिए कॉफी-टी, स्नैक्स की वेंडिंग मशीन, शू पॉलिश मशीन, पेपर नेपकिन आदि की सहूलियत रहेगी। वाइफाइ की सुविधा भी होगी।
बाहर से आने वाले लोगों को रेस्ट रूम में एक किट दिया जाएगा, जिसमें टूथब्रश, पेस्ट, साबुन, तौलिया आदि चीजें रहेंगी। जिन लोगों को दिनभर काम कर शाम को लौटना है, उनके सामान को रखने के लिए क्लॉक रूम रहेगा। रेस्ट रूम में लॉकर्स की सुविधा भी होगी।
मनपा देगी जमीन
इस प्रोजेक्ट के लिए मनपा प्रशासन चौपाटी पर अपनी जमीन दे रहा है। अथॉरिटी इस पर रेस्ट रूम का निर्माण कराएगी। पूरे प्रोजेक्ट पर करीब ५० लाख रुपए खर्च होंगे। यहां शुल्क सामान्य रखा जाएगा, जबकि ऑपरेशन एंड मेंटिनेंस के लिए सर्विस स्टैंडर्ड फाइव स्टार होटल के स्टैंडर्ड के हिसाब से तय किए गए हैं।
फीडबैक में मिले सुझाव
रेस्ट रूम के प्रोजेक्ट पर काम करने से पहले प्रोजेक्ट से जुड़ी टीम ने शहर में रेलवे स्टेशन, सिविल अस्पताल, बस अड्डे समेत अन्य जगह सर्वे कर लोगों से फीडबैक लिया था। इस दौरान लोगों ने साफ-सफाई का मुद्दा उठाया था। लोगों ने बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत भी बताई थी। शहर के टॉयलेट ब्लॉक्स से नाखुश लोगों ने बताया था कि मजबूरी में ही उनका इस्तेमाल करना पड़ता है।
बन सकता है मॉडल
हम इसे पायलट प्रोजेक्ट की तरह ले रहे हैं। इस पर काम करने से पहले रिसर्च वर्क किया और हर जगह से इनपुट लिया। तैयार कर इसकी रिपोर्ट गुजरात सरकार को देंगे। राज्य और केंद्र चाहेेंगे तो यह प्रोजेक्ट अन्य शहरों के लिए मॉडल बन सकता है।
चिराग व्यास, प्रोजेक्ट ऑफिसर, गुजरात कॉरपोरेट सोशल रेस्पांसिबिलिटी अथॉरिटी

Published on:
13 Aug 2018 12:41 pm
बड़ी खबरें
View Allसूरत
गुजरात
ट्रेंडिंग
