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आर्थिक तंगी के चलते पढ़ाई रुके योग्य नहीं: सीए रवि छावछरिया

आर्थिक परिस्थिति की वजह से सीए का सपना नहीं पूरा करने वालों का सपना सच करने के लिए सूरत के सीए चला रहे है सीए स्टारस प्रोग्राम

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सूरत.आर्थित तंगी के चलते सीए नहीं कर पाने वाले प्रतिभाशाली विद्यार्थियों का सपना सूरत के सीए रवि छावछरिया ने पूरा करने का बीड़ा उठाया है। सीए रवि ने ऐसे विद्यार्थियों के लिए सीए स्टारस नामक प्रोग्राम शुरू किया है। इस प्रोग्राम के अंतर्गत पढऩे वाले 38 विद्यार्थियों में से 27 विद्यार्थियों ने सीए का दूसरा पड़ाव यानि के आईपीसीसी की परीक्षा पास कर ली है। अब यह सभी विद्यार्थी सीए बनने से मात्र एक कदम की दूरी पर है। इनमें से राजस्थान के भीलवाड़ा का एक विद्यार्थी आईपीसीसी में इंडिया टॉप फिफ्टी में 40वां स्थान हासिल करने में सफल हुआ है।


सीए बनने के लिए चार साल का वक्त लगता है। वैसे सीए इस प्रोफेशन कोर्स है, इसके लिए किसी विश्वविद्यालय या महाविद्यालय में पढ़ाई नहीं करवाई जाती है। सीए बनने वाले ज्यादातर विद्यार्थियों को निजी ट्यूशन क्लासीस के भरोसे ही रहना पड़ता है। चार साल की ईस पढ़ाई के लिए कम से कम 2 से 3 लाख रुपए मात्र ट्यूशन के पीछे ही खर्च हो जाते है। इसके अलावा आने-जाने, रहने खाने व किताबों का खर्च अलग से वहन करना पड़ता है। देश में लाखो विद्यार्थी ऐसे है जो प्रतिभाशाली होने के बावजूद आर्थित स्थिति को लेकर आगे की पढ़ाई नहीं कर पाते है। ऐसे विद्यार्थियों के लिए सूरत के घोड़दौड़ क्षेत्र में सीए का ट्यूशन चलाने वाले सीए रवि छावछरिया ने सीए स्टारस नामक प्रोग्राम शुरू किया है। सीए रवि ने बताया कि पिछले दो साल से यह प्रोग्राम चलाया जा रहा है। इस प्रोग्राम में आर्थिक तंगी से सीए नहीं बनने वाले विद्यार्थियों का चयन किया गया है। इनका इन्टरव्यू लेकर और एक सामान्य परीक्षा के बाद चयन किया गया है। पहले बेच में 38 विद्यार्थियों को चूना गया। चूनने से पहले इनकी ओर से दी गई जानकारी की जांच की गई के विद्यार्थी सच में सही बोल रहा है या गलत फिर ही इन्हें पढऩा शुरू किया गया है। आज पढ़ाने का परिणाम उत्कृष्ट मिला है। 38 बच्चों में से 27 विद्यार्थियों ने नवम्बर 2017 में ली गई द इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड एकाउन्ट ऑफ इंडिया की आईपीसीसी की परीक्षा पास कर ली है। यह परीक्षा सीए का दूसरा पड़ाव है, अब यह सभी विद्यार्थी सीए बनने से एक कदम दूरी पर है। आर्थिक परिस्थिति के चलते सीए का सपना अधूरा ना रह जाए इस उदेश्य से यह नि:शुल्क प्रोग्राम शुरू किया गया है। इसमें मात्र सूरत के ही नहीं गुजरात व राजस्थान के विभिन्न कौनो के विद्यार्थी है। जिनके पास रहने की सुविधा नहीं है उन्हें यहा रहने व खाने की सुविधा भी नि:शुल्क दी जा रही है। बस इनसे एक ही उम्मीद है कि यह सीए बन जाए।


अन्य छात्रों का बनूगां सहारा
राजस्थान के भीलवाड़े के निवासी है, परिवार के सहारे के लिए पिता ने साबरकांठा के हिम्मतनगर में कपड़ो की दुकान शुरू की थी। व्यापार में भारी नुकसान हुआ तो दो साल पहले सूरत में आकर पिता ने टेक्सटाइल में जोब शुरू की। घर की महिने की आय मात्र 20 हजार रुपए है। ऐसे में घर चलाना और मेरी पढ़ाई पर खर्च करना परिवार वहन नहीं कर सकता है। इस प्रोग्राम के कारण मेरी पढ़ाई के खर्च की चिंता दूर हो गई है। इस प्रोग्राम के माध्यम से आज इंडिया टॉप फिफ्टी में 40वां स्थान हासिल कर पाया हुं। आगे अन्य गरीब छात्रों का सहारा बनने का सपना है।
विनय तातेड़, सीए छात्र, भीलवाड़ा, राजस्थान


यह प्रोग्राम पूरा करेगा मेरा सपना
राजस्थान के नवलगढ़ का निवासी हुं, पिता निवृत शिक्षक है। घर की आय बहोत कम है। ऐसे में सीए बनना सोच ही नहीं सकता था। लेकिन रवि सर के इस प्रोग्राम ने मेरा सपना और मेरे परिवार का यह सपना पूरा करेगा। यहा पढ़ाई के साथ रहने की सुविधा भी दी जा रही है। पूरा ध्यान अब सीए बनने में है और अन्य गरीब विद्यार्थियों की मद्द करना ही उदेश्य बन गया है।
पियुष गोर, सीए छात्र, नवलगढ़, राजस्थान

मिली पिता की छत्रछाया
10 साल पहले ब्रेन हेमरेज के कारण पिता की मृत्यु हो गई थी। माता टीफीन बनाकर घर चला रही है। सीए के लिए कम से कम 2 से 3 लाख की आवश्यरक्ता पड़ती है। घर की आय ही देढ़ लाख के आसपास होती है। ऐसे में रवि सर के इस प्रोग्राम के कारण सीए बनने का सपना पूरा होने जा रहा है। यहां पिता की छत्रछाया मिल गई है।
उवर्षी पंड्या, सीए छात्रा, सूरत

पढऩे का सपना अधूरा रह जाता
राजस्थान के सिरोही के निवासी है, कमाने के लिए सूरत आए हैं। पिता कपड़ो की दूकान में नौकरी करते है, मुश्किल से साल में 2 लाख कमाते हैं। ऐसे में सीए कैसे बन पाता। अपना खर्च वहन करने के लिए ट्यूशन पढ़ाता हुं। इस प्रोग्राम की मद्द से अब सीए बनने का अधूरा सपना पूरा होता नजर आ रहा है।
अभिषेक बोराना, सीए छात्र, राजस्थान सिरोही


इस प्रोग्राम से मिलता है स्टाइपेन
राजस्थान के नारोग से यहां सूरत में कमाने आए है। पिता की 2010 में केन्सर के चलते मृत्यु हो गई। घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। इस प्रोग्राम की मदद से सीए का पहला और दूसरा पड़वा पार कर लिया अब स्टाइपेन मिलता है। इससे परिवार को भी थोड़ी मददे मिल जाती है और सीए की पढ़ाई भी पूरी हो पाएगी। परिवार का आर्थिक सहारा बन सकता हुं।
अजय अग्रवाल, सीए छात्र, नागोर, राजस्थान