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सरस्वती आवास में स्लैब गिरने से बच्ची की मौत, माता-पिता घायल

- आर्थिक सहायता और मनपा अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग को लेकर धरना- प्रदर्शन - पोस्टमार्टम रूम पर समाज का विरोध प्रदर्शन, मुआवजा नहीं मिलने तक शव स्वीकारने से किया इनकार

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सरस्वती आवास में स्लैब गिरने से बच्ची की मौत, माता-पिता घायल

सरस्वती आवास में स्लैब गिरने से बच्ची की मौत, माता-पिता घायल

सूरत.

पांडेसरा- भेस्तान जीयाव-बुडिया रोड एसएमसी सरस्वती आवास में रविवार रात को पहली मंजिल पर एक मकान में छत के स्लैब का हिस्सा गिरने से सो रहे दंपति और उनकी एक वर्षीय पुत्री घायल हो गई। स्थानीय लोगों ने घायलों को बाहर निकाल कर अस्पताल पहुंचाया। चिकित्सकों ने बच्ची को मृत घोषित कर दिया। जबकि माता-पिता को स्मीमेर अस्पताल में प्राथमिक उपचार दिया गया। बच्ची की मौत से नाराज अभिभावकों ने रविवार को समाज के लोगों के साथ न्यू सिविल में पोस्टमार्टम रूम के बाहर मुआवजे की मांग करते हुए विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने आर्थिक सहायता नहीं मिलने तक बच्ची का शव स्वीकार करने से इनकार किया।

न्यू सिविल अस्पताल से मिली जानकारी के मुताबिक, भेस्तान एसएमसी सरस्वती आवास निवासी प्रदीप हीरालाल खांडे (30) अपनी पत्नी आशा (24) और पुत्री सिया (एक वर्ष) रविवार रात को खाना खाने के बाद परिवार के साथ सो रहा था। इसी दौरान रात 11.13 बजे बिल्डिंग नं. 5 रुम नं.15 में छत से सीमेंट का स्लैब गिरने से खांडे परिवार घायल हो गया। घायलों की चीख-पुकार सुनकर स्थानीय लोग इकठ्ठा हो गए और सभी को बाहर निकालना शुरू किया। स्थानीय लोगों ने दमकल विभाग को घटना की जानकारी दी। दमकल टीम ने गंभीर घायल बच्ची को नजदीक के सेवा अस्पताल लेकर गए। चिकित्सकों ने प्राथमिक जांच में उसे मृत घोषित कर दिया। जबकि घायल प्रदीप और आशा को स्मीमेर अस्पताल ले जाया गया।

पोस्टमार्टम रूम के बाहर रविवार सुबह परिजनों और समाज के लोगों की भीड़ जमा हो गई। परिवार के लोगों ने महानगरपालिका से मुआवजे की मांग की। आर्थिक मदद नहीं होने तक परिवार ने शव स्वीकार करने से इनकार कर दिया। इसी बात को लेकर पोस्टमार्टम रूम के बाहर काफी देर तक हंगामा चला। समाज के लोग प्रदर्शन करने लगे और घंटों तक बैठे रहे। पुलिस और मनपा अधिकारियों के काफी समझाने के बाद परिवार के लोग मान गए।

जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग

भेस्तान सरस्वती आवास में स्लैब गिरने की घटना में बच्ची की मौत के बाद स्थानीय लोगों में आक्रोश देखने को मिला। उन्होंने आवास निर्माण में लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए प्रदर्शन किया। समाज के अग्रणी सुरेश सोनवणे ने कहा कि आवास को बने हुए सात से दस साल ही हुए हैं, लेकिन अभी से मकान जर्जरित अवस्था में पहुंच गए हैं। महानगरपालिका ने आवास के मकान खाली करने के निर्देश दिए हैं। लेकिन वैकल्पिक व्यवस्था नहीं किए जाने के कारण परिवार कहां रहेंगे, यह नहीं बताया गया है। उन्होंने घटना को लेकर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

मानसून में ढहने लगे हैं जर्जरित मकान

मानसून की शुरुआत के साथ ही शहर में अलग-अलग इलाकों में पूराने जर्जरित मकान के ढहने की घटनाएं शुरू हो गई है। शनिवार रात को भारी बारिश के बाद रविवार दोपहर कोटसफिल रोड पर गोलवाड में एक चार मंजिला जर्जर मकान का हिस्सा ढहने से एक बच्चा घायल हो गया। जबकि अन्य फंसे हुए लोगों को दमकल विभाग ने बचाया। इस घटना के तुरंत बाद रविवार रात को भेस्तान में स्लैब गिरने की घटना में एक बच्ची की मौत से लोगों में गुस्सा है। मनपा के द्वारा आवास में रिपेरिंग कार्य नहीं किए जाने को लेकर भी लोगों ने नाराजगी व्यक्त की है।