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तो अब बहुरेंगे हिंदी वालों के दिन

हिंदीभाषियों को मिल सकती है अहम जिम्मेदारी, शहर कांग्रेस की नई कमेटी के गठन की कवायद शुरू

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सूरत

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Vineet Sharma

Aug 29, 2018

patrika

तो अब बहुरेंगे हिंदी वालों के दिन

सूरत. शहर कांग्रेस अध्यक्ष पद पर बाबू रायका की नियुक्ति के बाद से ही शहर में कांग्रेस की नई कमेटी को लेकर हलचल शुरू हो गई थी। मंगलवार को रायका के शहर अध्यक्ष का पद संभालने के बाद इसने रफ्तार पकड़ ली है। माना जा रहा है कि रायका की टीम में हिंदी भाषियों को अहम जिम्मेदारी मिल सकती है।

विधानसभा चुनाव 2017 में सूरत शहर में कांग्रेस के निराशाजनक प्रदर्शन के बाद से ही शहर अध्यक्ष बदले जाने की मुहिम शुरू हो गई थी। पूर्व प्रमुख हसमुख देसाई ने भी शहर की सभी 12 सीटों पर पार्टी को मिली करारी शिकस्त के बाद शहर प्रमुख का पद छोडऩे की पेशकश की थी, जिसे प्रदेश हाइकमान ने होल्ड पर रखा था। टिकट वितरण के दौरान प्रत्याशियों के चयन पर भी सवाल उठे थे और पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. तुषार चौधरी भी इसकी लपेट में आ गए थे।

लंबे इंतजार के बाद प्रदेश कांग्रेस ने पिछले दिनों सूरत समेत विभिन्न अन्य महानगरों और जिलों में नए प्रमुखों का ऐलान किया था। उसके बाद से ही शहर कांग्रेस की नई टीम को लेकर अटकलों का दौर शुरू हो गया।
बाबू रायका के मंगलवार को शहर प्रमुख का पद ग्रहण करने के बाद इन कोशिशों में तेजी आई है। शहर इकाई में अपनी जगह पक्की करने के लिए लोगों ने रायका के साथ अपने संबंधों का हवाला देने के साथ ही पार्टी में उच्च पदस्थ पदाधिकारियों से भी संपर्क शुरू कर दिया है। इसी बीच नई कमेटी में हिंदी भाषियों की भागीदारी को लेकर भी पार्टी के बीच चर्चा शुरू हो गई है।

लोगों का आरोप है कि पूर्व प्रमुख हसमुख देसाई के समय हिंदी पट्टी के नेताओं-कार्यकर्ताओं को करीब-करीब हाशिए पर रखा गया था। स्थानीय निकाय चुनावों मेें पाटीदार बहुल इलाकों में मिली बढ़त को बनाए रखने के लिए संगठन में पाटीदार समाज को विशेष तरजीह दी गई थी। माना जा रहा है कि इस बार हिंदी भाषियों को संगठन में अहम जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है।

नजर 2019 पर

बाबू रायका को उस वक्त पार्टी की कमान सौंपी गई है, जब लोकसभा 2019 के चुनाव सिर पर हैं। नई लोकसभा के चुनावों के लिए एक वर्ष से भी कम समय शेष बचा है। ऐसे में शहर में जो संगठन खड़ा होगा, उस पर 2019 का असर साफ देखा जा सकेगा। प्रदेश हाइकमान भी इसी नजरिए के साथ संगठन में सकारात्मक परिवर्तन की उम्मीद कर रहा है। चुनावों में हिंदी भाषी समेत अन्य प्रांतों के सूरत में रह रहे लोगों का रुझान निर्णायक साबित होता रहा है। ऐसे में इन मतदाताओं को साधना रायका के लिए आसान नहीं होगा।

सभी को मिलेगा प्रतिनिधित्व

मेरी कोशिश रहेगी कि समाज के सभी लोगों को उचित प्रतिनिधित्व दिया जाए। शहर में संगठन को मजबूत करना पहली प्राथमिकता है और मैं सभी को साथ लेकर चलूंगा।
बाबू रायका, शहर कांग्रेस प्रमुख, सूरत