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सिलवासा. शहर में टोकरखाड़ा जंक्शन, बस्ता फलिया तीन रास्ता, किलवणी नाका, सुन्दरवन, आमली चौराहा, बाविसा फलिया, बालाजी मंदिर मोड़, इन्दिरा नगर, भुरकुड़ फलिया, डोकमर्डी में सार्वजनिक होली जलाई जाएगी। पंडितों के अनुसार गुरुवार को होली पर भद्रा का संयोग बना हैं। रात 8.41 बजे के बाद होली का दहन किया जा सकेगा।
बाजारों में उमड़े खरीदार
होली पूजन सामग्री खरीद के लिए बाजारों में भीड़ रही। कई व्यापारियों ने सामान के साथ रंग व उपहार नि:शुल्क रखे हैं। पंचायत मार्केट, किलवणी नाका, टोकरखाड़ा की दुकानों में ग्राहकों की ज्यादा भीड़ है। होली के पहले दिन लोगों ने पूजा सामग्री, रंग, मिठाई, कपड़े, आभूषण आदि खरीदे। बाजार हरा, ब्राउन, पीला, गुलाबी, मेहरून, बादामी आदि रंगों से गुलजार हो गए हैं। व्यापारियों ने दुकानों के आगे टेंट बांधकर पूजा सामग्री, विभिन्न वैरायटियों के रंग, मिठाई, घरेलू उपकरण, सजावटी सामान सजा लिए हैं।
गांवों में फागोत्सव का आगाज
गांवों में चौपाल और चौराहे पर युवकों की टोलियां, ढोल की थाप पर थिरकते कदम, कानों में मिश्री घोलती तुर व थाल की आवाज के साथ होली के गीत सुनाई देने लगे हैं। आदिवासी होली का आनंद एवं परम्परा वर्षों से सहज कर रखे हुए हैं। होली के पहले रोज पेड़ के नीचे केसरदेव की स्थापना करके पूजन किया। गुरुवार को खानवेल, कौंचा, दूधनी, मांदोनी, सिंदोनों, आंबोली सहित ग्रामीण विस्तारों में होली का पर्व धूमधाम से मनाया जाएगा। गांवों में सार्वजनिक जगह पर होली दहन होगा। इसके बाद युवाओं की मंडली ढोल, तुर, थाल, तारपा बजाते हुए खुशियों के गीत गाएंगी। उत्सव में बच्चे से लेकर बड़े बुजुर्ग सभी शामिल हो जाते हैं। रंग, गुलाल से उपस्थित सभी जनों का स्वागत किया जाता है। यह उत्सव देर रात तक चलता है। ग्रामीणों ने बताया कि होली पर नौकरी-पेशा पर बाहर गए सभी युवक अपने घर आ जाते हैं। होली पर गांंव के लोग एक मंच पर एकत्रित होकर खुशियां मनाते हैं। होली एकता एवं मिलन का पर्व है। होली के बाद खेतों में मानसून के लिए तैयारी आरम्भ हो जाती है। युवक होली पर ताड़ी का अधिक सेवन करते हैं। गुरुवार को गोबर के बने कंडे एवं लकड़ों से होली जलाई जाएगी।
Published on:
28 Feb 2018 08:45 pm
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