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अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस विशेष – सूरत में रक्तदान करने वाली महिलाओं का प्रतिशत घटा

डब्लूएचओ की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में महिलाओं की हिस्सेदारी छह फिसदी अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर महिलाओं के लिए अलग से रक्तदान शिविर लगेगा

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संजीव सिंह. सूरत.

महिलाओं के सशक्तीकरण तथा जागरुकता के लिए आठ मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर सूरत रक्तदान केन्द्र एंड रिसर्च सेन्टर ने खासतौर से रक्तदान में महिलाओं की हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए रक्तदान शिविर का आयोजन किया है। भारत में रक्तदान करने में महिलाओं की हिस्सेदारी सिर्फ छह फीसदी है। सूरत में होने वाले रक्तदान शिविरों का आंकलन करें तो दो से पांच फीसदी महिला ही रक्तदान करती हैं। पिछले कुछ सालों में ब्लड बैंक की रिपोर्ट पर नजर डाले तो महिलाओं का ग्राफ नीचे गया है।


दुनिया में रक्त की कमी को दूर करने के लिए वैज्ञानिक उपाय तलाश रहे हं,ै लेकिन अभी तक सफलता नहीं मिली है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) के सर्वे के मुताबिक भारत में प्रतिवर्ष करीब दो करोड़ युनिट रक्त की जरुरत होती है। उसके सामने सिर्फ 80 लाख यूनिट की ही जरुरत रक्तदान से पूरी हो पाती है। देश में प्रति दो सेकंड में किसी न किसी को रक्त की जरुरत पड़ती है। डब्लूएचओ के मुताबिक विकासशील देशों में जागरूकता के अभाव में रक्तदान शिविर में बड़ी संख्या में लोग शामिल नहीं होते। नतीजतन प्रति वर्ष हजारों लोगों की बीमारी या दुर्घटना के घायल मरीजों की रक्त नहीं मिलने के कारण मौत हो जाती है।
विश्व में आठ मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है। इस मौके पर महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। डायमंड और कपड़ा उद्योग से देश-दुनिया में अपनी पहचान बना चुका सूरत हमेशा कुछ नया करने के प्रयास में रहता है। सूरत रक्तदान केन्द्र एंड रिसर्च सेंटर ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर श्री गणपतिशंकर इच्छाराम मजूमदार पब्लिक चेरीटेबल ट्रस्ट और चांल्लागली युवक मंडल के सहयोग से थेलेसेमिया सेन्टर, चांल्लागली, गोपीपुरा में शाम छह से रात दस बजे तक महिलाओं के लिए 'स्वैच्छिक रक्तदानÓ शिविर का आयोजन किया है।


शहर में महज दो फीसदी
शहर में रक्तदान करने वाले कुल रक्तदाताओं में महिलाओं की हिस्सेदारी का आंकलन करें तो यह प्रतिशत दो से पांच फिसदी के बीच ही रहा है। पिछले कुछ सालों में रक्तदान करने वाली महिलाओं का ग्राफ घटा है। न्यू सिविल अस्पताल के ब्लड बैंक में एकत्र होने वाले कुल रक्त युनिट में महिला रक्तदाताओं पर गौर करें तो यह डेढ़ से दो फिसदी के बीच ही रहा है।


यह है मापदंड
स्वस्थ्य शरीर में हिमोग्लोबीन १२.५ प्रतिशत से अधिक और वजन ४५ किलोग्राम से अधिक हो तभी व्यक्ति रक्तदान कर सकता है। हिमोग्लोबीन कम होने के लिए अधूरी खुराक, महिलाओं में अधिक मासिक स्राव, पेट में कृमी की बीमारी और मसा की बीमारी हो सकती है। हिमोग्लोबीन बढ़ाने के लिए हरी पत्ती वाली सब्जी, टमाटर, बीट, गाजर, खजुर, अंजीर आदि का सेवन करना चाहिए।


पुरुषों का योगदान 94 प्रतिशत
देश में एक तरफ ब्लड डोनेशन की पूरी जिम्मेदारी पुरुषों ने उठा रखी है। देश में होने वाले रक्तदान में 94 फिसदी यूनिट पुरुषों के द्वारा दान किया जाता है। वहीं महिलाओं की हिस्सेदारी छह फिसदी है। रक्त की जरुरत जिंदगी बचाने के लिए महिलाओं को भी रक्तदान के लिए आगे आना चाहिए। रक्तदान से शरीर को नुकसान नहीं होता है। पुरुषों में प्रति किलोग्राम (76 एमएल) और महिलाओं में (66 एमएल) रक्त होता है। स्वस्थ्य शरीर को सिर्फ प्रति किलोगराम (50 एमएल) रक्त की जरुरत होती है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति के पास अधिक मात्रा में रक्त होता है और रक्तदान कर सकता है।


महिलाएं इसलिए नहीं कर पातीं रक्तदान
ब्लड बैंक द्वारा आयोजित रक्तदान शिविरों में महिलाओं की हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए समाजिक कार्यो में अग्रणी तथा जनप्रतिनिधियों को जागरूकता के लिए प्रयास किया जाना चाहिए। न्यू सिविल अस्पताल के ब्लड बैंक से प्रति वर्ष सवा सौ से डेढ़ सौ रक्तदान शिविरों का आयोजन किया जाता है। इसमें महिलाओं की हिस्सेदारी बहुत कम होती है। गर्भवती महिला, बच्चे को दूध पिलाने वाली मां, गर्भपात करवाने के तुरंत बाद या फिर मासिक धर्म में होने पर महिलाएं रक्तदान नहीं कर सकती। शिविर में महिलाएं आए और जांच करवाएं उसके बाद मापदंडों पर खरा उतरने पर ही रक्तदान की अनुमति मिलती है। हिमोग्लोबीन कम होने पर उसे बढ़ाने के लिए चिकित्सक का परामर्श लिया जा सकता है।


परिजनों को करें मोटीवेट
महिलाओं में रक्तदान का प्रतिशत सूरत में अन्य शहरों तथा राज्यों के मुकाबले अच्छा है। ब्लड बैंक द्वारा आयोजित शिविरों में जमा होने वाले रक्त युनिट में महिलाओं की हिस्सेदारी डेढ़ से दो फिसदी रहती है। इसे बढ़ाने के लिए महिलाएं घर के सदस्यों तथा रिश्तेदारों को प्रेरित कर सकती है। भारत में महिलाओं में कम हिमोग्लोबीन होने के चलते ज्यादातर इच्छूक महिलाएं भी रक्तदान नहीं कर पाती है।
डॉ. मयूर जरग, ब्लड बैंक, न्यू सिविल अस्पताल।

सूरत रक्तदान केन्द्र और रिसर्च सेंटर के रिकार्ड
वर्ष रक्तदाता महिला रक्तदाता प्रतिशत
२०१७ ३०४५१ ६८२ २.२४
२०१६ ३१६५३ ८४८ २.६८
२०१५ ३२९१६ १४८० ४.५०
२०१४ ३५३८४ १७६६ ४.९९
२०१३ ३३२८३ १४९६ ४.४९

न्यू सिविल अस्पताल के ब्लड बैंक की रिपोर्ट
वर्ष रक्तदाता पुरुष महिला प्रतिशत
२०१७ ९२१२ ९२१२ १५४ १.६
२०१६ १०२८० १००१० २७० २.६
२०१५ ९०९५ ८९०६ १८९ २.०