
सूरत. कपड़ा उद्योग में श्रमिकों की कमी के कारण तीस प्रतिशत से अधिक कारखाने बंद हो गए हैं। लग्नसरा और ग्रीष्म अवकाश के कारण अपने राज्य गए श्रमिक एक महीने बाद लौटेंगे, तब तक कपड़ा उद्यमियों को उत्पादन कम कर काम चलाना पड़ेगा।
सूरत के कपड़ा उद्योग में कार्यरत श्रमिक ज्यादातर यूपी, बिहार, महाराष्ट्र सहित अन्य राज्यों से हैं, जो कि त्यौहारों, लग्नसरा व ग्रीष्म अवकाश के दिनों में अपने राज्य में चले जाते हैं। हाल में लग्नसरा और ग्रीष्म अवकाश के कारण कपड़ा उद्योग में काम करने वाले ज्यादातर श्रमिक एक महीने बाद लौटेंगे। ऐसे में श्रमिकों की कमी होने के कारण कपड़ा उद्यमियों को कारखाने बंद करने की नौबत आ गई है। कपड़ा उद्यमियों का कहना है कि मंदी और श्रमिकों की कमी के कारण वीवर्स निराश हो गए हैं। एक ओर यार्न की कीमत ने वीवर्स को परेशान कर रखा है, वहीं वीवर्स का लाभ घट गया है। छोटे वीवर्स की हालत खराब होती जा रही है। श्रमिकों की कमी के कारण भी समस्या खड़ी हो गई है। ऐेसे ठंडे माहौल में वीवर्स कारखाने चलाने की अपेक्षा उत्पादन बंद करना पंसद कर रहे हैं। कुछ क्षेत्रों में एक शिफ्ट में काम चल रहा है और कई जगह तो कारखाने बिल्कुल बंद हो गए हैं। सूरत समेत दक्षिण गुजरात में लगभग 40 प्रतिशत लूम्स कारखाने बंद हो गए हैं।
सचिन क्षेत्र के कपड़ा उद्यमी महेन्द्र रामोलिया ने बताया कि कपड़ा उद्योग में इन दिनों श्रमिकों की 60 प्रतिशत कमी है। मंदी और श्रमिकों की कमी के कारण वीवर्स निराश हो गए हैं। इसके अलावा यार्न की कीमत बढऩे से वीवर्स निराश है। इस कारण कई उद्यमी सिर्फ एक शिफ्ट में काम चला रहे हैं और सप्ताह में दो दिन अवकाश रख रहे हैं लग्नसरा और ग्रीष्म अवकाश के कारण अपने राज्य गए श्रमिक एक महीने बाद लौटेंगे, तब तक कपड़ा उद्यमियों को उत्पादन कम कर काम चलाना पड़ेगा।।
Published on:
05 May 2018 08:23 pm
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