
दशा माता की सैकड़ों प्रतिमाओं को तापी किनारे छोड़ गए भक्त
सूरत. वही हुआ, जिसके आसार नजर आ रहे थे। दस दिन के दशा माता पर्व की पूर्णाहुति के बाद सोमवार को आधी रात से दशा माता की प्रतिमाओं का विसर्जन शुरू हुआ, जो मंगलवार दोपहर तक चला। तापी में कम पानी की वजह से विसर्जन में खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
सूरत में तीन दिन से हो रही रिमझिम और उकाई के कैचमेंट क्षेत्र में अच्छी बारिश के बावजूद तापी की धार में इतनी तेजी नहीं आई है कि हजारों प्रतिमाओं को बहा ले जाए। नतीजतन कई भक्त दशा माता की सैकड़ों प्रतिमाओं को तापी के विभिन्न घाटों पर छोड़ कर चले गए। मंगलवार को नदी के किनारे इन प्रतिमाओं से अटे पड़े रहे। नावड़ी समेत तापी के अन्य घाटों पर प्रतिमाएं बदहाल पड़ी रहीं। विसर्जन के दौरान प्रतिमाओं के साथ श्रद्धालु भारी मात्रा में पूजा सामग्री भी लेकर आए थे। वह भी घाट पर इधर-उधर बिखरी पड़ी थी। तापी के जलस्तर का आने वाले दिनों में यही हाल रहा तो गणपति विसर्जन के दौरान और बड़ी समस्या से जूझना पड़ सकता है।
खुशहाली की कामना के साथ दशा माता को दी गई विदाई
सूरत. दस दिवसीय दशा माता व्रत-आराधना पर्व की पूर्णाहुति पर सोमवार मध्यरात से खुशहाली की कामना के साथ शुरू हुआ माता को विदाई देने का क्रम मंगलवार दोपहर तक चलता रहा। श्रद्धालु ढोल-नगाड़ों के साथ माता की प्रतिमा को विदाई देने तापी नदी के विभिन्न घाटों पर पहुंचे।
श्रद्धालु महिलाओं ने घर-परिवार और समाज की दशा-दिशा सुधारने की मन्नत के साथ दशा माता व्रत-आराधना के पर्व की शुरुआत दस दिन पहले बाजे-गाजे के साथ की थी। घर, सोसायटी एवं अन्य स्थलों पर स्थापित दशा माता की प्रतिमा के समक्ष व्रती महिलाओं ने नियमित पूजा-अर्चना, भोग, कथा श्रवण के कार्यक्रम के अलावा गरबा नृत्य के आयोजन किए। दस दिन चला पूजा का दौर सोमवार मध्यरात को थमा। पूर्णाहुति के साथ श्रद्धालु ढोल-नगाड़ों के साथ दशा माता की प्रतिमाओं को विदाई देने तापी नदी के नावड़ी घाट, उमरा घाट, रामजी घाट समेत अन्य घाटों पर पहुंचे। माता को विदाई देने का दौर मंगलवार दोपहर तक चला। श्रद्धालुओं ने घाट पर माता की पूजा-आराधना की और सर्वत्र खुशहाली की कामना के साथ प्रतिमाओं को विसर्जित किया।
Published on:
21 Aug 2018 09:47 pm
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