आदिवासी क्षेत्रों में एक लाख से अधिक बच्चों में फैलाया शिक्षा का उजाला

- दक्षिण गुजरात के पांच जिलों में दिवाली बेन ट्रस्ट ने 400 गांव में एकलव्य स्कूल की स्थापना की

By: Sanjeev Kumar Singh

Updated: 05 Sep 2020, 10:31 PM IST

संजीव सिंह @ सूरत.

दक्षिण गुजरात के आदिवासी इलाकों में शिक्षा का उजाला फैलाने के लिए जीवन खपा देने वालों को शिक्षक दिवस के दिन याद नहीं करना बड़ी भूल होगी। बारडोली के सरदार आश्रम में संचालित कन्या विद्यालय में पढ़ाई करने वाली लड़कियां आज डॉक्टर और नर्स के अलावा विभिन्न क्षेत्रों में योगदान दे रही है। इसी तरह बारडोली की दिवाली बेन ट्रस्ट ने अब तक पांच जिलों के आदिवासी बेल्ट में 90 हजार से अधिक बच्चों को प्राथमिक शिक्षण देने का कार्य किया है। सबसे अधिक जीडीपी वाले सूरत शहर के बड़े घरों में काम करने वाली अधिकांश लड़कियां या महिलाएं आदिवासी इलाकों से आती हैं। स्थानीय स्तर पर स्कूल की कमी के कारण आज भी ग्रामीण इलाकों में लड़कियों को शिक्षा मिलने में दिक्कतें आ रही हैं।


ऐसे में बारडोली में दिवालीबेन उकाभाई पटेल सार्वजनिक ट्रस्ट का गठन 20 सितम्बर 2001 को हुआ था। अमेरिका निवासी भीखु पटेल की पुत्री माया ट्रस्ट का संचालन करती हैं। जबकि अमेरिका से बारडोली आए नलिन जोशी दक्षिण गुजरात में ट्रस्ट के कामकाज को देखते हैं। उन्होंने पत्रिका को बताया कि सूरत के अलावा नवसारी, तापी, वलसाड, डांग जिले में रहने वाले आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों में ट्रस्ट के द्वारा अलग-अलग प्रोग्राम चलाए जाते हैं। शिक्षा के लिए ‘शिक्षा उजास’ प्रोजेक्ट में अब तक 90 हजार से अधिक बच्चों को प्राथमिक शिक्षण दिया गया है।

आदिवासी क्षेत्रों में एक लाख से अधिक बच्चों में फैलाया शिक्षा का उजाला

आदिवासी इलाकों के पांच जिलों के 400 गांव में एकलव्य स्कूल की स्थापना की है। शिक्षा के अलावा गांव के विकास के लिए सर्वांगी उत्कर्ष और स्वास्थ्य जांच की भी व्यवस्था भी की गई है। शिक्षा के बाद लड़कियों को अपने पैर पर खड़ा करने के लिए सिलाई और ब्यूटी पार्लर का कोर्ष भी करवाया जाता है। दक्षिण गुजरात के 22 गांव में टेलरिंग और ब्यूटीपार्लर केन्द्र शुरू किए हैं। 20 हजार से अधिक लड़कियों ने सिलाई का प्रशिक्षण लिया है। वहीं 6000 से अधिक लड़कियों ने ब्यूटी पार्लर का कोर्स किया है।

शिक्षा के साथ आदर्श गांव का संकल्प

आदिवासी इलाकों में शिक्षा क्षेत्र में मानस उर्जा प्रागट्य योजना के साथ-साथ आदर्श गांव बनाने की मुहिम भी दिवालीबेन ट्रस्ट के द्वारा चलाया जा रहा है। पांच जिलों में 1015 केन्द्रों पर एक लाख 12 हजार बच्चों को शिक्षा दी जा रही है। इसके अलावा 418 गांव को गोद लेकर उन्हें आदर्श गांव में बदला जा रहा है। बच्चों के लिए शिक्षा के साथ सर्वांगी विकास के लिए भी योजना चल रही है जिससे प्री-प्रणाम प्रार्थन प्रमुख हैं। इससे बच्चों में एकाग्रता, यादशक्ति समेत अन्य मानसिक विकास होते हैं।

- डॉ. मुकेश भगत, एक्जुकेटिव, डायरेक्टर, दिवालीबेन ट्रस्ट, बारडोली।

Sanjeev Kumar Singh Reporting
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