
सूरत.
न्यू सिविल अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों की पहचान बारकोड से करने का निर्णय किया गया है। मरीज को भर्ती करने के दौरान इंडोर केस पेपर के साथ अलग से 15 छोटे स्टीकर की पर्ची दी जा रही है, जिस पर मरीज की जानकारी दर्ज है। पैथोलॉजी और रेडियोलॉजी विभाग में इसी स्टीकर/बारकोड से उनकी जांच होगी। अस्पताल प्रशासन ने फिलहाल यह व्यवस्था ट्रायल बेसिस पर शुरू की है।
दक्षिण गुजरात के सबसे बड़े सरकारी न्यू सिविल अस्पताल में प्रतिदिन दो हजार से ज्यादा मरीज ओपीडी में आते हैं। केस खिड़की संख्या आठ या ट्रोमा सेंटर की केस पेपर खिड़की से इनके केस पेपर निकाले जाते हैं। कई गंभीर मरीजों को अलग-अलग वार्ड में भर्ती किया जाता है। इनके लिए दोबारा केस पेपर निकालना होता है। प्रशासन ने चिकित्सकों का कार्य हल्का करने के लिए मरीजों को बारकोड नम्बर जारी करना शुरू किया है। केस पेपर पर बारकोड नम्बर देना बहुत पहले शुरू हो गया था, लेकिन इसका उपयोग नहीं हो रहा था। अब अस्पताल प्रशासन ने मरीज को भर्ती करने के दौरान अलग से 15 छोटे स्टीकर की पर्ची देना शुरू किया है। स्टीकर पर मरीज का आईपी एड्रेस, नाम, विभाग और वार्ड का नाम, दिनांक और समय होता है। अस्पताल अधीक्षक डॉ. एम.के. वाडेल ने बताया कि यह व्यवस्था ट्रायल बेसिस पर इंडोर मरीजों के लिए शुरू की गई है। स्टीकरों का उपयोग मरीज के वार्ड के चिकित्सक विभिन्न जांच, जैसे पैथोलॉजी या रेडियोलॉजी के लिए करेंगे। चिकित्सकों को अब तक अलग-अलग जांच के लिए फार्म भरना होता था, जिसमें मरीज की ढेरों जानकारी लिखनी होती थी। इसमें चिकित्सक को काफी समय लगता था। नए सिस्टम से चिकित्सकों की यह समस्या हल हो गई है। स्टीकर को मरीज के लिए जारी फार्म तथा नमूने पर चिपका दिया जाता है। इसी के आधार पर मरीज के नमूने की जांच होगी और बारकोड देखकर रिपोर्ट सौंप दी जाएगी।
स्टाफ को ट्रेनिंग
बारकोड सिस्टम के लिए अस्पताल ने अलग से प्रिंटर और स्कैनर की खरीद की है। बारकोड स्कैनर को चलाने के लिए स्टाफ प्रशिक्षित नहीं था। सिस्टम लागू करने के लिए अलग-अलग जगह तैनात कर्मचारियों को इसके बारे में ट्रेनिंग दी गई। स्कैनर का उपयोग कैसे करना है और मरीज को कैसे रिपोर्ट देनी है, उन्हें इसके बारे में बताया गया।
क्यों पड़ी जरूरत
न्यू सिविल अस्पताल में सूरत शहर और जिले के अलावा निकटवर्ती भरुच, नवसारी, वलसाड, तापी, डांग जिले से मरीज भी आते हैं। गुजरात-महाराष्ट्र के बॉर्डर क्षेत्र में रहने वाले लोग भी यहां आते हैं। प्रतिदिन ओपीडी की संख्या दो हजार से बाइस सौ के बीच होती है। यहां ग्यारह सौ बेड की व्यवस्था है। प्रतिदिन अलग-अलग विभागों से डेढ़ सौ से पौने दो सौ मरीज भर्ती किए जाते हैं। मरीजों को भर्ती करने के बाद उनकी कई जांच करवानी होती है। इसके लिए चिकित्सकों को विभिन्न फार्म भरने पड़ते थे। नई व्यवस्था से इससे छुटकारा मिल जाएगा।
टेली रेडियोलॉजी योजना का अता-पता नहीं
रेडियोलॉजी विभाग में पिछले दिनों टेली रेडियोलॉजी सिस्टम लागू किया गया था। इसमें व्यवस्था थी कि सूरत जिले या राज्य के किसी भी कोने के अस्पताल से एक्स-रे की जानकारी कंप्यूटर पर उपलब्ध होगी और यहां से चिकित्सक उसकी रिपोर्ट बनाकर भेजेंगे। ग्रामीण क्षेत्रों के अस्पतालों को सूरत के विशेषज्ञ चिकित्सकों की सेवाएं मिलने की बात कहते हुए इसे शुरू किया गया था, लेकिन यह व्यवस्था कब बंद हो गई, पता नहीं चला। अस्पताल ने ट्रोमा सेंटर और वार्ड में कंप्यूटर लगाए थे। डिजिटल एक्स-रे के बाद मरीज को प्लेट नहीं देकर डॉक्टर सीधे कंप्यूटर पर उसे देखकर इलाज शुरू कर सकते हैं। ट्रोमा सेंटर में एक्स-रे देखने के लिए ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है।
जानकारी रहेगी गुप्त
न्यू सिविल अस्पताल में बड़ी संख्या में मरीज आते हैं। उनके इलाज के दौरान कई टेस्ट करवाने होते हैं। मरीज के बारे में सभी जानकारी सिस्टम में सेव रहेगी, लेकिन उसे अन्य लोग नहीं देख सकेंगे। बारकोड से मरीजों को रिपोर्ट दी जाएगी।
डॉ. एम.के. वाडेल, अधीक्षक, न्यू सिविल अस्पताल

Published on:
12 Apr 2018 01:24 pm
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