
कांग्रेस ने किया गुजरात में महिलाओं और मुस्लिमों से किनारा
विनीत शर्मा
सूरत. भाजपा के लिए तो गुजरात दशकों से हिंदुत्व की प्रयोगशाला रहा है, लेकिन कांग्रेस भी कमोबेश इसी राह पर आगे बढ़ रही है। बीते कई लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की ओर से एक ही मुस्लिम को टिकट दिया गया। इस बार इसकी भी उम्मीद नहीं दिख रही है। कांग्रेस की महिला कार्यकर्ताओं के लिए भी गुजरात से दिल्ली की राह कठिन दिख रही है।
कई दशक से भाजपा और संघ पर गुजरात को हिंदुत्व की प्रयोगशाला बनाने के आरोप लगते रहे हैं। संघ के आनुषांगिक संगठन विश्व हिंदू परिषद को गुजरात से ऑक्सीजन मिली और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ताओं की मेहनत ने कांग्रेस को प्रदेश में अप्रासंगिक बना दिया। ढाई दशक से ज्यादा समय से कांग्रेस प्रदेश की सत्ता से बाहर है। लोकसभा में हालांकि गुजरात से कांग्रेस को समर्थन मिलता रहा, लेकिन वर्ष 2014 में भाजपा ने क्लीन स्वीप कर कांग्रेस को गहरा सदमा दिया था।
जिस तरह से गुजरात भाजपा का गढ़ बनता गया, कांग्रेस ने भी धीरे-धीरे नरम हिंदुत्व का जामा पहनना शुरू कर दिया। हालत यह है कि भाजपा के सबका साथ सबका विकास पर तंज कसते हुए गुजरात में मुस्लिम उम्मीदवार को टिकट नहीं देने का आरोप लगाने वाली कांग्रेस पिछले कई लोकसभा चुनावों में रस्मी तौर पर एक मुस्लिम को टिकट देकर औपचारिकता निभाती रही। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा की सर्वाधिक सुरक्षित सीटों में से एक नवसारी पर मुस्लिम प्रत्याशी उतार कर कांग्रेस ने साफ कर दिया था कि गुजरात में पार्टी अपनी मुस्लिम समर्थक छवि से छुटकारा पाना चाहती है। इससे पहले कई चुनावों से भरुच में पार्टी मुस्लिम प्रत्याशी उतारती रही थी।
लोकसभा चुनाव 2019 के लिए कांग्रेस ने अब तक 13 प्रत्याशियों का ऐलान किया है। फिलहाल एक भी मुस्लिम या महिला को टिकट नहीं दिया गया है। जानकारों के मुताबिक इस बार पार्टी किसी मुस्लिम को टिकट देगी, ऐसे आसार दिख नहीं रहे हैं। महिलाओं के लिए भी गुजरात से कोई उम्मीद नहीं दिख रही है। प्रचार के दौरान भाजपा ने इस मुद्दे पर काउंटर किया तो गुजरात की यह तस्वीर कांग्रेस के लिए गुजरात से बाहर मुश्किल खड़ी कर सकती है।
भरुच में आदिवासी की तैयारी
किसी मुस्लिम प्रत्याशी को लोकसभा चुनाव के लिए दावेदारी करनी हो तो प्रदेश की भरुच और कच्छ दो सीटें ही उपयुक्त हैं। इनमें कच्छ आरक्षित सीट होने के कारण एकमात्र भरुच पर ही मुस्लिम प्रत्याशी की संभावना शेष रहती है। भरुच लोकसभा सीट कई टर्म से आदिवासी को संसद में भेज रही है। यहां से भाजपा के मनसुख वसावा जीत दर्ज करते आ रहे हैं, जबकि वर्ष २०१४ से पहले तक कांग्रेस मुस्लिम प्रत्याशी को मैदान में उतारती रही थी। इस बार भरुच सीट से पार्टी किसी आदिवासी को ही मैदान में उतारने का मन बना रही है। ऐसे में इस इकलौती सीट पर भी किसी मुस्लिम को टिकट मिलने की संभावना क्षीण हो गई है।
Published on:
01 Apr 2019 09:15 pm
