
सूरत. राज्य सरकार ने विद्यार्थियों की सुरक्षा के लिए टू-व्हीलर के बारे में जो कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं, उनको लेकर सभी स्कूल बिना लाइसेंस वाहन की अनुमति नहीं देने की बात कर रहे हैं, लेकिन इस तरफ किसी का ध्यान नहीं है कि वाहन पर आने वाले विद्यार्थी हेलमेट पहनकर आते हैं या नहीं। शहर में गिनती के स्कूल हैं, जो किसी भी परिस्थिति में विद्यार्थियों को टू-व्हीलर लाने की अनुमति नहीं देते।
विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर जो भी कदम उठाए जा रहे हैं, कागजों पर ही नजर आ रहे हैं। राज्य सरकार ने सड़क दुर्घटना से विद्यार्थियों को बचाने के लिए लाइसेंस और हेलमेट पर जोर दिया है। इस पर राजस्थान पत्रिका ने पड़ताल शुरू की तो पता चला कि शहर की स्कूलों में टू-व्हीलर लेकर आने वाले विद्यार्थियों में से ज्यादातर के पास लाइसेंस नहीं है। कई विद्यार्थी16 साल से कम उम्र के हैं, जो लाइसेंस पाने के योग्य नहीं हैं। स्कूलों को टू-व्हीलर लेकर आने वाले विद्यार्थियों की सूची तैयार करने का आदेश दिया गया है। स्कूल इस मामले में अपना बचाव कर रही हैं। सभी स्कूलों का कहना है कि बिना लाइसेंस वाले विद्यार्थियों को स्कूल में प्रवेश नहीं दिया जाता। इस पर कड़ी निगरानी रखी जाती है। दूसरी तरफ हेलमेट को लेकर स्कूलों में कोई सख्ती नहीं है। ज्यादातर विद्यार्थी बिना हेलमेट वाहन चलाते हैं। हेलमेट उनके वाहन पर कहीं दिखाई नहीं देता।
अभिभावक लापरवाह
स्कूलों का कहना है कि वाहनों के मामले में अभिभावक लापरवाह है। बच्चों को स्कूल वाहन में भेजने की जगह वह उन्हें टू-व्हीलर वाहनों पर भेजते हैं। लाइसेंस और हेलमेट पर भी अभिभावक जोर नहीं देते। स्कूल के बाद भी छोटे विद्यार्थी ट्यूशन या कहीं और जाने के लिए वाहन पर नजर आते हैं। कई बार वह सड़कों पर तेज गति से वाहन चलाते हैं।
छुपाकर लाते हैं वाहन
कई स्कूलों का कहना है कि उन्होंने लाइसेंस को लेकर कड़ा नियम तो बना रखा है, लेकिन सभी पर ध्यान रखना संभव नहीं हो पाता। जिनके पास लाइसेंस नहीं होता, ऐसे विद्यार्थी छुपाकर वाहन लेकर आते हैं। वह स्कूल के बाहर गलियों में वाहन पार्क करते हैं। स्कूल को पता चलने पर अभिभावकों को इसके बारे में सूचित किया जाता है।
स्कूल वाहन ही प्राथमिकता
विद्यार्थियों को स्कूल वाहन में आने का निर्देश दिया गया है। दुर्घटना से विद्यार्थियों को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से स्कूल वाहन को प्राथमिकता दी जाती है। कई विद्यार्थी खुद का वाहन लेकर आते हैं। इसके लिए अभिभावकों की अनुमति अनिवार्य है। लाइसेंस भी देखा जाता है, फिर अनुमति दी जाती है।
डेविड सोलंकी, प्राचार्य, रायन स्कूल, डूमस
स्कूल में वाहन लाने पर मनाही
हमारे स्कूल में बच्चों के वाहन लाने पर मनाही है। विद्यार्थी स्कूल के वाहन में आते-जाते हैं। बच्चों की सुरक्षा को लेकर पहले से यह नियम बना रखा है, जिसका सख्ती से पालन किया जा रहा है। अभिभावकों को कहा गया है कि बच्चों को वाहन नहीं दें।
मीता वकील, प्राचार्य, भूलका विहार, पाल
दिया जाता है स्टीकर
16 साल से कम उम्र के विद्यार्थियों को वाहन लाने की अनुमति नहीं है। सबकी जांच होती है। जिनके पास लाइसेंस है, उन्हें स्कूल की ओर से स्टीकर दिया जाता है। उसी स्टीकर वाले वाहन को गेट से प्रवेश मिलता है। बिना लाइसेंस वाले विद्यार्थी बाहर वाहन रखकर आते हैं। जानकारी मिलने पर उनके अभिभावकों को सूचना दी जाती है। अभिभावकों को ध्यान रखने की आवश्यकता है।
दीपिका शुक्ला, प्राचार्य, प्रेसिडेंसी स्कूल, अडाजण
अभिभावकों को कड़े निर्देश
विद्यार्थियों की सुरक्षा का ध्यान रखा जाता है। स्कूल का सुरक्षाकर्मी सभी के लाइसेंस की जांच करता है। जिनके पास लाइसेंस नहीं है, उन्हें वाहन नहीं लाने का आदेश दे रखा है। आदेश का उल्लघंन करने वालों के अभिभावकों को सूचित किया जाता है।
अजुर्न परमार, प्राचार्य, विद्याभारती स्कूल, भटार
अभिभावक पल्ला न झाड़ें
टू-व्हीलर पर स्कूल आने वाले विद्यार्थियों के लिए लाइसेंस और हेलमेट अनिवार्य होना चाहिए। स्कूल इसे लागू करने के लिए तत्पर हैं। इसमें अभिभावकों का सहयोग जरूरी है। अभिभावक सारी जिम्मेदारी स्कूल पर डालकर अपना पल्ला न झाड़ें।
प्रीति वासन, प्राचार्य, एल.पी.सवाणी स्कूल, वेसू
Published on:
09 Feb 2018 08:40 pm
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