रक्तदान महादान - आज विश्व रक्तदाता दिवस
सूरत
मानव रक्त किसी कारखाने में नहीं बनाया जा सकता। इसका विकल्प तो मानव खुद ही है। इसलिए रक्तदान को महादान, श्रेष्ठदान और जीवनदान माना जाता है। शहर में कई रक्तदाता ऐसे हैं जिन्होंने सौ से अधिक बार रक्तदान किया है। इनमें कोसंबा निवासी रक्तदाता महेश टेलर ने दोहरा शतक पूरा कर लिया है। नियमित रक्तदान से अन्य की जिंदगी बचाई जा सकती है। रक्तदान के प्रति समाजिक जागरुकता जितनी फैलाई जाए उतना कम है। 'राजस्थान पत्रिकाÓ ने बुधवार को शतकवीर रक्तदाताओं से बातचीत की।
महेश टेलर ने लगाया दोहरा शतक
कोसंबा आंबावाड़ी मनोज नगर निवासी महेश टेलर (७३) ने रक्तदान करने में दोहरा शतक पूरा किया है। हाल में वह सेवानिवृत्त जीवन जी रहे हैं। महेश शुरू से ही सेवा कार्यों में जुड़े रहे हैं। हाइवे तथा ट्रेक के किनारे से करीब दस हजार से अधिक शव लेकर उनका अंतिम संस्कार करवाया है। घायलों को अस्पताल पहुंचाने पर रक्त की अहमियत पता चली और रक्तदान करने लगा। अब तक २०० बार रक्तदान किया है।
पूरा परिवार रक्तदाता
रामपुरा राधाकृष्ण मंदिर के पास निवासी हीरा व्यापारी अक्षय भजियावाला (६०) अब तक ११४ बार रक्तदान कर चुके हैं। इनके परिवार में लगभग सभी लोग रक्तदान करते हैं। बड़े भाई प्रफुल्ल भजियावाला सूरत रक्तदान केन्द्र से जुड़े हैं और चालीस वर्ष से रक्तदान के लिए जागरुकता अभियान चला रहे हैं। अक्षय की पत्नी अल्पा तथा पुत्र चिराग ने कुल ३७ बार रक्तदान किया है। छोटे भाई जयंत, उसकी पत्नी दक्षा और पुत्र मितुल ने ३४ बार तथा छोटे भाई राजू, पत्नी हीना तथा पुत्र अभिषेक ने ३१ बार रक्तदान किया है।
रक्तदान करने में अग्रणी परिवार
वराछा निवासी डॉ. प्रफुल्ल शिरोया लोक दृष्टि चक्षु बैंक तथा इंडियन रेडक्रॉस सोसायटी चौर्यासी शाखा के चेयरमैन हैं। उन्होंने अब तक १६० बार रक्तदान किया है। उनकी पत्नी अस्मिता शिरोया ने ७८ बार, पुत्री डॉ. कोमल ने २६ बार, पिंकल ने १२ बार और हरेकृष्णा ने ८ बार रक्तदान किया है। डॉ. शिरोया ने वड़ोदरा मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस किया है। कॉलेज के दिनों में ही रक्तदान के प्रति लोगों को जागरूक करने के प्रयास शुरू कर दिए थे। दोस्तों ने मिलकर एक ग्रुप बनाया जो नियमित रक्तदान करते हैं।
ग्रीष्मावकाश में हो जाती है रक्त की कमी
ग्रीष्मावकाश में न्यू सिविल अस्पताल समेत अन्य ब्लड बैंकों में रक्त की कमी रहती है। ब्लड बैंक के चिकित्सक बताते हैं कि छुट्टियों में ज्यादातर लोग अपने गांव चले जाते है। ऐसे में रक्तदान शिविर कम होते हैं। स्वैच्छिक रक्तदान करने वाले दाताओं की संख्या भी घट जाती है। सूरत रक्तदान केन्द्र ने अप्रेल में शहरीजनों से रक्तदान की अपील की थी, जिसके बाद स्वतंत्र ग्रुप के लोगों ने केन्द्र पर 3४ यूनिट रक्तदान किया था।
मरीजों का जीवन बचाता है रक्तदान
सूरत रक्तदान केन्द्र के जनसम्पर्क अधिकारी नीतेश मेहता ने बताया कि थैलेसेमिया, कैंसर, डायलिसिस और सिकलसेल एनेमिया सड़क दुर्घटना में घायलों को रक्त की जरूरत पड़ती रहती है। समय पर रक्त नहीं मिलने पर मौत भी हो जाती है। न्यू सिविल अस्पताल समेत शहर के अन्य ब्लड बैंकों में प्रत्येक गु्रप के बहुत ज्यादा यूनिट एक साथ उपलब्ध नहीं होते हैं। मानसून के दौरान दक्षिण गुजरात में लेप्टोस्पायरोसिस के मरीजों को भी रक्त की जरूरत होती है। इसके अलावा अन्य बीमारियों के मरीजों को भी रक्त की जरूरत रहती है। न्यू सिविल अस्पताल में प्रतिदिन सौ से डेढ़ सौ मरीज ट्रोमा सेंटर में आते हैं। अस्पताल में सात सौ से आठ सौ मरीज भर्ती रहते हैं। ऑपरेशन के दौरान भी रक्त की आवश्यकता रहती है। इन सभी मरीजों को रक्त उपलब्ध कराना काफी मुश्किल होता है। ऐसे में रक्तदान के प्रति लोगों को जागरूक करना ही एकमात्र उपाय है। १४ जून को रक्तदाता दिवस के रूप में मनाया जाता है। पांच मई २००४ को वल्र्ड हेल्थ एसेम्बली की सभा में यह प्रस्ताव पास किया गया था। वल्र्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन, इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ रेडक्रॉस एंड रेड क्रिसंट सोसायटी, इंटरनेशनल सोसायटी ऑफ ब्लड ट्रांसफ्यूजन तथा इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ ब्लड डोनर्स ऑर्गेनाइजेशन ने मिलकर डॉ. कार्ल लेन्डस्टेइनर के जन्मदिन १४ जून को विश्व रक्तदाता दिवस मनाने का निर्णय किया था।
कौन कर सकता है रक्तदान
चिकित्सकों ने बताया कि 18 से ६० वर्ष उम्र वाला कोई भी स्वस्थ व्यक्ति रक्तदान कर सकता है। उसके रक्त की पूर्ति शरीर में तीन सप्ताह में हो जाती है। वजन 45 किलो से अधिक तथा हीमोग्लोबिन शरीर में १२.५ फीसदी होना चाहिए। श्वान के काटने के बाद इंजेक्शन लेने के बारह महीने बाद रक्तदान किया जा सकता है।
हीमोग्लोबिन की नियमित जांच जरूरी
पालक, मेथी, टमाटर, गाजर, बीट, सहजन, कोबी, खजूर, अंजीर और गुड़ के सेवन से हीमोग्लोबिन बढ़ता है। विटामिन सी से भरपूर खुराक मौसमी, टमाटर, आंवला, नीबू, नारंगी और अंगूर भी फायदेमंद होता है। नॉनवेज और स्किम्ड दूध का पाउडर भी असरकारक होता है। हर व्यक्ति को हीमोग्लोबिन की नियमित जांच करानी चाहिए।
ये हैं शतकवीर रक्तदाता
महेश टेलर 200
वीरल जरीवाला 168
योगेश भीखू ढिम्मर 159
प्रमोद परागजी पटेल 117
अश्विन नटवर गांधी 122
मेघनाथ रामअवतार पटेल 117
सुकेन रजनीकांत शाह 105
रोशनलाल डुंगरमाली जैन 106
समीर रजनीकांत शाह 104
प्रफुल जी. भजीयावाला 104
थ्जग्नेश किरीट रूवाला 104
कांतीलाल जेठालाल पटेल 101
नैनेश नताली 105
उन्मेश शाह 100
तेजस शकरलाल बरफीवाला 107
डिम्पल जरीवाला 100
डॉ. प्रफुल्ल शिरोया 109
अक्षय जी. भजियावाला 112
भगीरथ एन. जरीवाला 113
गिरीश गांधी 115
किरीट एन. गांधी 123
मुकेश जगीवाला 123
नरेन्द्र एम. गांधी 103
मातादीन काबरा 100