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पत्रिका रिकॉल: अमृतसर ट्रेन हादसे ने ताजा कर दी अनसुनी चीखों की याद

दस साल पहले सूरत और उधना के बीच रेलवे ट्रेक पर कटे थे सोलह लोग पैदल काकरा खाड़ी रेलवे ब्रिज पार कर रहे थे प्रवासी श्रमिक  

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पत्रिका रिकॉल: अमृतसर ट्रेन हादसे ने ताजा कर दी अनसुनी चीखों की याद

सूरत.

पंजाब के अमृतसर में रावण दहन के दौरान ट्रेन की चपेट में आने से ६० से अधिक लोगों की मौत की घटना ने दस साल पूर्व सूरत में हुए ऐसे ही दर्दनाक हादसे को ताजा कर दिया। दस साल पूर्व सूरत और उधना रेलवे स्टेशन के बीच काकरा खाड़ी रेलवे ब्रिज पर रात के अंधेरे में सोलह जने कच्छ एक्सप्रेस की चपेट में आ गए थे। इनमें से एक भी व्यक्ति जिंदा नहीं बचा।

जानकारी के अनुसार 19046 वाराणसी-सूरत ताप्ती-गंगा एक्सप्रेस से 28 फरवरी २००८ की रात उत्तरप्रदेश से प्रवासी श्रमिक परिवारों का एक समूह उधना स्टेशन पर उतरा था। इसमें छोटे बच्चे और महिलाएं भी थीं। उन्हें कड़ोदरा क्षेत्र में किसी परिचित के यहां पहुंचना था। इन सभी लोगों ने उधना से सहारा दरवाजा पहुंचने के लिए रेलवे ट्रेक के किनारे पैदल चलना शुरू कर दिया। उनका इरादा सहारा दरवाजा पहुंच कर वहां से कडोदरा जाने का था।

उधना से थोड़ी दूरी पर काकरा खाड़ी रेलवे ब्रिज है। इस ब्रिज को पार करने के लिए ट्रेक के नजदीक कोई दूसरा पाथ-वे नहीं है। यह सभी लोग काकरा खाड़ी रेलवे पटरी पर चलते हुए ब्रिज पार कर रहे थे। वे लोग ब्रिज के बीचों-बीच पहुंचे तभी मुम्बई से सूरत आ रही 22955 बांद्रा टर्मिनस-भुज कच्छ एक्सप्रेस ने पीछे से उन्हें चपेट में ले लिया था। उनके पास इतना भी समय नहीं था कि वे पुल के किसी एक छोर तक पहुंच कर खुद को बचा पाते।

हादसे के बाद कच्छ एक्सप्रेस के चालक ने स्टेशन पर इसकी सूचना भी नहीं दी। घटना के बाद तीन अन्य ट्रेनें इसी ब्रिज से गुजरी, लेकिन उनके चालकों को कुछ पता नहीं चला। उसके बाद मुम्बई से सूरत आ रही फ्लाइंग रानी एक्सप्रेस के चालक ने पटरी पर खून एवं मानव अंगों के टुकड़े बिखरे देखे तो उसने सूरत स्टेशन पर सूचना दी। सूचना मिलते ही रेलवे पुलिस बल मौके पर पहुंचा और राहत कार्य शुरू किया, लेकिन वहां कोई भी व्यक्ति जीवित नहीं मिला।

अगले दिन पुलिस ने खून सनी पटरियों और आसपास बिखरे सभी सोलह शवों के टुकड़े जमा किए और उन्हें पोस्टमार्टम के लिए स्मीमेर अस्पताल भेजा। मुम्बई रेल मंडल के वरिष्ठ रेलवे अधिकारियों ने इस घटना को गम्भीरता से लेते हुए बांद्रा टर्मिनस-भुज कच्छ एक्सप्रेस के चालक ए.के. सिंह और सह चालक अरुण कुमार को निलंबित कर दिया था।

इन दोनों ने घटना होने के बाद सूरत रेलवे स्टेशन को हादसे की कोई जानकारी नहीं दी थी। तत्कालीन रेल राज्य मंत्री नारण राठवा ने पीडि़तों को अंतिम संस्कार के लिए सहायता राशि देने की घोषणा की थी। लोकसभा में विपक्ष के नेता लालकृष्ण आडवाणी तथा काशीराम राणा ने सरकार से पांच लाख रुपए मुआवजा देने की मांग की थी।