देशभर में जितनी भी नदियां हैंं, उनका पुराणों में जिक्र है। तापी अकेली नदी, जिसका महत्व समझाने के लिए पूरा पुराण लिखा गया। तापी पुराण में 'गंगा स्नाने, नर्मदा दर्शनेश्चव, तापी स्मरणे पाप नाश्यतिÓ मंत्र के माध्यम से तापी की महत्ता बताई गई है। इस मंत्र के मुताबिक गंगा में स्नान और नर्मदा में दर्शन से पाप का नाश होता है, जबकि तापी के स्मरण मात्र से व्यक्ति के पाप नष्ट हो जाते हैं। बैतूल (मध्य प्रदेश) जिले के मुलताई तहसील मुख्यालय के पास ताप्ती तालाब से निकलने वाली सूर्य पुत्री ताप्ती के जन्म का प्रसंग महाभारत में आदि पर्व में है। कहते हैं कि भगवान सूर्य ने स्वयं की गर्मी या ताप से रक्षा के लिए ताप्ती को धरती पर अवतरित किया था। तापी का सौंदर्य थाई राजा को इतना भाया था कि उसने अपने देश में सूरत के नाम पर शहर बसाया और उसके किनारे बह रही नदी का नाम तापी रख दिया था।