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कछुआ चाल से हो रहा काम

तापी शुद्धिकरण, पत्रिका ने सिलसिलेवार खबरें छापकर अभियान चलाया
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सूरत

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Vineet Sharma

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Updated: 1 Aug 2018, 9:46 PM IST

patrika

कछुआ चाल से हो रहा काम

सूरत. तापी शुद्धिकरण के लिए ऐलान तो कई हुए, लेकिन अधिकांश कागजों पर ही सिमट कर रह गए। कुछ संस्थाओं ने भी यदा-कदा तापी किनारे जाकर साफ-सफाई के अभियान चलाए, लेकिन वह औपचारिकता अधिक रहे।

पिछले दिनों भाजपा ने सूरत मनपा के साथ मिलकर तापी शुद्धिकरण का लंबा अभियान चलाया था, जो कोजवे पर ही सिमट कर रह गया था। इस अभियान का फोकस जलकुंभी हटाने पर था, जो अभियान पूरा होने के हफ्तेभर बाद फिर नदी पर दिखने लगी थी। बरसों की मशक्कत के बाद मनपा ने काकरापार से ओएनजीसी ब्रिज तक तापी शुद्धिकरण के लिए 922.18 करोड़ रुपए का मास्टर प्लान तैयार किया, जो केंद्र के पाले में है।

तापी स्मरणे पाप नाश्यति

देशभर में जितनी भी नदियां हैंं, उनका पुराणों में जिक्र है। तापी अकेली नदी, जिसका महत्व समझाने के लिए पूरा पुराण लिखा गया। तापी पुराण में 'गंगा स्नाने, नर्मदा दर्शनेश्चव, तापी स्मरणे पाप नाश्यतिÓ मंत्र के माध्यम से तापी की महत्ता बताई गई है। इस मंत्र के मुताबिक गंगा में स्नान और नर्मदा में दर्शन से पाप का नाश होता है, जबकि तापी के स्मरण मात्र से व्यक्ति के पाप नष्ट हो जाते हैं। बैतूल (मध्य प्रदेश) जिले के मुलताई तहसील मुख्यालय के पास ताप्ती तालाब से निकलने वाली सूर्य पुत्री ताप्ती के जन्म का प्रसंग महाभारत में आदि पर्व में है। कहते हैं कि भगवान सूर्य ने स्वयं की गर्मी या ताप से रक्षा के लिए ताप्ती को धरती पर अवतरित किया था। तापी का सौंदर्य थाई राजा को इतना भाया था कि उसने अपने देश में सूरत के नाम पर शहर बसाया और उसके किनारे बह रही नदी का नाम तापी रख दिया था।

कोजवे पर प्रवाह रोकना बड़ी भूल

किताबों में भले लिखा हो कि तापी सूरत के डूमस में समुद्र से मिलती है, हकीकत यह है कि डूमस से करीब 15 किमी पहले ही तापी के प्रवाह को बांध दिया गया है। वर्ष 1995 में सिंगणपोर पर कोजवे बनाकर तापी को वहीं रोक लिया गया। हालांकि यह फैसला वक्त की जरूरत को देखते हुए किया गया था। जानकारों के मुताबिक कोजवे से पहले नदी में गिरने वाली गंदगी तापी के बहाव के साथ समुद्र में चली जाती थी।

पत्रिका ने बार-बार उठाया मुद्दा

तापी शुद्धिकरण को अभियान के रूप में राजस्थान पत्रिका ने बार-बार उठाया। इन खबरों को लेकर सामाजिक संस्थाएं तो सक्रिय होती हैं, लेकिन स्थानीय और राज्य स्तर पर प्रशासनिक मशीनरी हर बार तापी नदी को लेकर असंवेदनशील रही है। पत्रिका ने सिलसिलेवार खबरें छापकर अभियान भी चलाया था, जिसके बाद शहर भाजपा इकाई ने तापी शुद्धिकरण अभियान शुरू किया था।