
क्रांतिकारी आदिवासी नेता बिरसा मुंडा को किया याद
सिलवासा. आदिवासी क्रांतिकारी नेता बिरसा मुंडा के जन्म दिवस पर आदिवासी नेताओं ने जमकर आक्रोश जताया। आदिवासी विकास उत्कर्ष संघ द्वारा उमरकुई बेहडुनपाड़ा में आयोजित सभा में विभिन्न विस्तारों से कार्यकर्ता सम्मिलित हुए। करीब चार घंटे चली सभा में आदिवासी संस्कृति, कला, शिक्षा व्यवस्था, सामाजिक समस्याएं एवं विकास के चरणों पर विचार विमर्श हुआ।
तारपा, तूर, ढोल बजाते हुए लोकनृत्य करते नजर आए
सवेरे 11 बजे सभास्थल पर आदिवासी तारपा, तूर, ढोल बजाते हुए लोकनृत्य करते नजर आए। आदिवासियों ने क्रांतिकारी जननायक की जयंती पर जमकर लोकनृत्य किया। सभा में दादरा, नरोली, रांधा, किलवणी, गलौंडा, रखोली, सामरवरणी, दपाड़ा, आंबोली, सुरंगी, खानवेल, मांदोनी, कौंचा से कार्यकर्ता पहुंचे और गांव की समस्याओं के निवारण पर चर्चा की। सभा में आदिवासी विकास उत्कर्ष संघ के प्रमुख अनिल पटेल ने कहा कि आदिवासी देश की प्रगति और विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
आदिवासियों की जमीन पर खेती करने का उनका पैतृक अधिकार
दादरा नगर हवेली में आदिवासी बाहुल्य होने के बावजूद आदिवासी अधिकारों की अनदेखी की जाती है। संविधान में आदिवासियों को विशेष अधिकार प्राप्त है। उनके साथ ज्यादती और अत्याचार बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। आदिवासी प्रकृति प्रेम एवं मेहनत में विश्वास करते हैं। जंगलों में बसे आदिवासियों की जमीन पर खेती करने का उनका पैतृक अधिकार है। आदिवासियों की सुरक्षा एवं कल्याण को लेकर भारत सरकार ने अनेक कानून बनाए हैं। प्रदेश में उद्योग स्थापित हुए हैं, अस्पताल एवं शिक्षण केन्द्र बढ़े हैं। गांव गांव सडक़ें पहुंची हैं। इसके बावजूद युवाओं को पर्याप्त रोजगार नहीं मिल रहा है। गांवों में शिक्षित बेरोजगारों की फौज खड़ी है। आदिवासियों को जंगलों में खेती का अधिकार नहीं मिला है। आदिवासियों की सुनने वाला कोई नहीं हैं। सरकारी नौकरी में स्थानीय बेरोजगारों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। सरकारी विभागों में ठेकेदारी प्रथा पर काम करने वाले कर्मचारियों की सेवा नियमित करने की जरूरत है। सभा में अन्य आदिवासी नेताओं ने भी अपने विचार व्यक्त किए।

Published on:
15 Nov 2018 07:30 pm
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