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SMC : मीजल्स और रूबेला टीके को लेकर समिति स्कूल में हंगामा

- टीका देने आए कर्मचारियों ने भीड़ देख पुलिस बुलाई

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SMC : मीजल्स और रूबेला टीके को लेकर समिति स्कूल में हंगामा

सूरत.

नगर प्राथमिक शिक्षा समिति की लिम्बायत स्कूल में मंगलवार को मीजल्स और रूबेला टीके को लेकर अभिभावकों ने जमकर हंगामा मचाया। टीका देने वाले कर्मचारियों को अभिभावकों की भीड़ देखकर पुलिस बुलानी। पुलिस ने जैसे-तैसे अभिभावकों को शांत किया।
लिम्बायत की स्कूल में मंगलवार को कई कर्मचारी मीजल्स और रूबेला का टीका देने पहुंचे। स्कूल में दो हजार से अधिक विद्यार्थी पढ़ते हैं। अभिभावकों को जैसे ही इस बारे में पता चला, वह स्कूल में एकत्रित होने लगे। अभिभावकों की भीड़ बढ़ गई। उन्होंने टीके पर विरोध जताना शुरू कर दिया। हंगामा बढ़ता गया तो टीका देने आए कर्मचारी घबरा गए और पुलिस से मदद मांगी। पुलिस स्कूल पहुंची और अभिभावकों को समझा कर मामला शांत किया। स्कूल के प्राचार्य का कहना है कि टीका लगाने से पहले अभिभावकों के साथ तीन-चार बार बैठक की गई थी और टीके के बारे में समझाया गया था। अभिभावकों से टीके लगवाने के लिए सहमति पत्र भी भरवाया गया था, लेकिन टीके को लेकर अफवाह फैली हुई है। इस कारण कई अभिभावकों ने इसका विरोध किया। मंगलवार को हंगामे के बीच करीब सौ बच्चों को टीका लगाया गया।

पुरानी गणवेश से काम चला रहे हैं
नगर प्राथमिक शिक्षा समिति का शैक्षणिक सत्र शुरू हुए एक महीने से अधिक हो चुका है, लेकिन अभी तक विद्यार्थियों को गणवेश नहीं मिली है। वह पुरानी गणवेश से काम चला रहे हैं। समिति के पदाधिकारियों का कहना है कि टेंडरिंग प्रक्रिया में देरी के कारण विद्यार्थियों को गणवेश नहीं मिल पाई है। कई तकनीकी खामियों के कारण बार-बार टेंडर प्रक्रिया में सुधार करना पड़ा। गणवेश का ऑर्डर दे दिया गया है। एक लाख 60 हजार से अधिक विद्यार्थियों के गणवेश तैयार करने में करीब 90 दिन लगेंगे। इसके बाद ही विद्यार्थियों को गणवेश मिलने के आसार हैं। इसका मतलब यह हुआ कि आधा शैक्षणिक सत्र समाप्त होने तक विद्यार्थी बिना गणवेश रहेंगे। समिति स्कूलों में पहले भी गणवेश दी जाती थी, लेकिन कई बार टेंडर में देरी के कारण शैक्षणिक सत्र समाप्त होने तक भी विद्यार्थियों को गणवेश नहीं मिल पाती थी। इसलिए गणवेश देना बंद कर दिया गया था। इसके एवज में छात्रवृत्ति देना शुरू किया गया, लेकिन यह राशि भी विद्यार्थियों को समय पर नहीं मिल पाती थी। राशि प्राचार्य के एकाउंट में पड़ी रह जाती थी। कई प्राचार्यों पर विद्यार्थियों के लिए दी गई राशि के दुरुपयोग का आरोप लगा। दोषी पाए गए ऐसे प्राचार्यों को राशि भरने का आदेश दिया गया और उनके अन्य स्कूलों में तबादले की कार्रवाई भी हुई। समिति के पदाधिकारियों का कहना है कि इस साल गणवेश में देर हो सकती है, लेकिन आने वाले शैक्षणिक सत्र में गणवेश समय पर मिल जाएगी।