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SURAT KAPDA MANDI: लिनेन कपड़ा उत्पादन में लगाई लंबी छलांग

-एक दशक से थोड़ा पहले ही सिंथटिक कपड़े की सूरत मंडी में हुई थी लिनेन कपड़ा उत्पादन की शुरुआत-बंगाल, बोइसर व तारापुर की मंडियों को भी छोड़ा पीछे, प्रत्येक माह 8 से 10 लाख मीटर कपड़े का होने लगा है उत्पादन

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SURAT KAPDA MANDI: लिनेन कपड़ा उत्पादन में लगाई लंबी छलांग

SURAT KAPDA MANDI: लिनेन कपड़ा उत्पादन में लगाई लंबी छलांग

सूरत. सूरत कपड़ा मंडी के हुनरमंद व्यापारियों के पास भी कपड़ा व्यवसाय का बड़ा व लम्बा तजुर्बा है और इसी के बूते वे नए-नए प्रयोग भी करते रहते हैं। सिंथेटिक साडिय़ों की वैश्विक पहचान वाली सूरत कपड़ा मंडी में महज एक दशक से थोड़े समय पहले ही दस्तक देने वाले लिनेन कपड़े ने उत्पादन के क्षेत्र में लंबी छलांग लगाई है और एक समय के सर्वाधिक उत्पादक बंगाल, बोइसर व तारापुर की कपड़ा मंडियों को भी पीछे छोड़ दिया है।
एशिया की सबसे बड़ी सूरत कपड़ा मंडी की यूं तो पहचान सिंथेटिक कपड़े की है, लेकिन अब इसमें कपड़े की अन्य वैरायटियां भी विपुल मात्रा में शामिल होने लगी है। इसमें ड्रेस, मंडप, पर्दे, शर्टिंग आदि के अलावा 2008-09 के दौरान शामिल हुए लिनेन कपड़े ने भी अपनी अच्छी-खासी साख बना ली है। करीब एक दशक में जिस तरह से सूरत ने लिनेन कपड़ा उत्पादन में जो छलांग लगाई है, उससे वह देश का सबसे बड़ा उत्पादक मार्केट बन गया है। प्रत्येक माह सूरत कपड़ा मंडी में 8 से 10 लाख मीटर लिनेन कपड़ा उत्पादन होता है और उसकी बाजार कीमत 50 करोड़ तक आंकी जाती है। इस तरह से लिनेन कपड़ा उत्पादन का सालाना कारोबार 600 करोड़ तक का हो जाता है।

-महंगा होने से कम उपयोगी व उत्पादन

अलसी के पौधे से निकलने वाला रेशा लिनेन होता है और इस फाइबर से तैयार कपड़े आरामदायक व मजबूत होते है। इस फेब्रिक्स में लचक कम होती है और महंगा अधिक होने से इसका उत्पादन व उपयोग बड़े पैमाने पर नहीं हो पाता है। लिनेन से पहनने के कपड़ों के अलावा पर्दे, सोफा कवर, जैकेट, टेबल क्लॉथ, बिस्तर और उसके कवर, तौलिये आदि भी बनते हैं। महंगा होने के बावजूद मौजूदा दौर में लिनेन कपड़ा मध्यमवर्ग को भी लुभाने लगा है और यहीं वजह है कि सूरत कपड़ा मंडी में गुणवत्तायुक्त लिनेन कपड़ा बहुतायत में उत्पादन होने लगा है।

-बंगाल-बोइसर को छोड़ दिया पीछे

करीब 10-12 साल पूर्व लिनेन कपड़े का बड़ा बाजार पश्चिम बंगाल था और इसके बाद महाराष्ट्र के बोइसर स्थित तारापुर और दक्षिण भारत का नंबर आता था, लेकिन एक दशक के सफर में ही लिनेन के कारोबार में सूरत कपड़ा मंडी ने बंगाल और तारापुर को पीछे छोड़ दिया है। शुरुआती दौर में लिनेन कपड़ा करीब एक दर्जन रंगों में ही उपलब्ध था मगर अब यह सौ से ज्यादा रंगों में सूरत के बाजार में उपलब्ध है। वेरायटी बढऩे से प्लेन के साथ प्रिंटेड लिनेन कपड़ा भी लोगों को भाने लगा है। लिनेन वस्त्र के परिधान देश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खासे पसंदीदा होने से भी अधिक चलन में आए है।

-मशीनों का इस्तेमाल, उत्पादन अधिक

जेकार्ड मशीन पर पहले शेरवानी ज्यादा बनती थी, लेकिन अब लिनेन कपड़े की विविंग होने लगी है। स्थानीय कपड़ा व्यापारियों की मानें तो अंतर्राष्ट्रीय मार्केट में टिके रहने के लिए आधुनिक तकनीक की मशीनें जरूरी हो गई है और यहीं वजह हैकि सूरत में जेकार्ड, जेकार्ड रेपियर, जेकार्ड इलेक्ट्रोनिक, वाटरजेट, एयरजेट आदि मशीनें हजारों की संख्या में लग चुकी है और इनसे लिनेन कपड़े का उत्पादन बढ़ रहा है। इन मशीनों से निटिंग क्लॉथ भी बेहतर बनता है और इसकी एक अन्य खासियत यह भी है कि डिफेक्ट लेस लिनेन भी यहां बन रहा है।

-निर्यात मामले में सीधे चीन से टक्कर

सूरत कपड़ा मंडी में उत्पादित लिनेन कपड़ा यूरोप के विभिन्न देशों, यूएसए और दुबई आदि में निर्यात होता है, हालांकि इसकी मात्रा अभी काफी कम है। इसकी बड़ी वजह में लिनेन का रेशा पूरी तरह से आयात होता है और भारत की तुलना में चीन का लिनेन सस्ता होता है। इस वजह से सूरत के व्यापारियों को नुकसान भी हो रहा है। इसके अलावा लिनेन रेशा आयात पर एंटी डंपिंग ड्यूटी होने से यह महंगा मिलता है। इसके बावजूद लिनेन में प्लेन के अलावा जेकार्ड विविंग से तैयार लिनेन और डिजिटल प्रिंट की अधिक डिमांड रहती है और निर्यात मामले में चीन से सीधी टक्कर होती है।

-गर्मी में अधिक पसंदीदा परिधान

गर्मी में पहले सूती कपड़े को प्राथमिकता देते थे, लेकिन अब इसकी जगह धीरे-धीरे लिनेन कपड़ा लेने लगा है। गर्मी अधिक सोखने के साथ लिनेन सूती से अधिक आरामदायक है। लिनेन के जैकेट और अन्य गर्म वस्त्र बनाने में भी उपयोग होता है और यह 795 रुपए से 4200 रुपए प्रति मीटर तक बाजार में उपलब्ध होता है।

-संतोषकुमार बुधिया, कपड़ा उद्यमी

-मांग में तेजी होने से बढ़ेगा कारोबार

सूरत में ओरिजिनल लिनेन कपड़ा डिफेक्ट लेस बनता है। रेपियर, जेकार्ड, ऐयरजेट और वॉटरजेट जैसी आधुनिक मशीनों पर कई विख्यात कंपनी का लिनेन कपड़ा भी सूरत की मिलों में बनता है। जिस तेजी से लिनेन कपड़ों की मांग बढ़ी है उससे सूरत का कारोबार और बढऩे के आसार है।
योगेश मित्तल, कपड़ा उद्यमी