
SURAT NEWS: दही मटकी नहीं मनेगी, स्टॉक में पड़ी है मटकियां
सूरत. कोरोना काल में इस बार श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर्व मनाने की रियायत तो राज्य सरकार ने दे दी है, लेकिन दही हांडी के आयोजनों की इजाजत नहीं मिली है। इससे जहां युवावर्ग में उत्साह का अभाव है वहीं, कुंभकार समाज के पेशेवर मटकी विक्रेताओं के लिए मुश्किलें खड़ी हो गई है।
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व भाद्रपद कृष्णपक्ष अष्टमी के अवसर पर सूरत समेत पूरे गुजरात में धूमधाम से मनाया जाता है। कोरोना काल में पिछले वर्ष पर्व पर पूरी तरह से पाबंदी रही और लोगों ने घरों में ही भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाया था। इसके बाद इस वर्ष अभी कुछ दिन पहले ही राज्य सरकार ने श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर्व व गणपति महोत्सव मनाने की रियायत कई शर्तों के साथ दी है। ऐसी स्थिति में श्रद्धालु श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर्व तो मनाएंगे लेकिन, पर्व के मौके पर आयोजित होने वाले दही हांडी के कार्यक्रम नहीं कर पाएंगे। जबकि सूरत में भगवान के जन्म के मौके पर दही हांडी के सैकड़ों आयोजन होते हैं। दही हांडी के कार्यक्रम आयोजित नहीं होने से जहां युवा वर्ग में उत्साह कमजोर पड़ गया है वहीं, कुंभकार समाज के पेशेवर मटकी विक्रेताओं के लिए भी व्यापारिक मुश्किलें खड़ी हो गई है। उनके पास पिछले साल से ही मटकियों का जमा स्टॉक धूल खा रहा है और मिट्टी से बनी मटकियों के टूटने-फुटने से नुकसान की आशंका भी लगातार बनी रहती है।
-तीन सौ से ज्यादा बिक जाती है
दही हांडी कार्यक्रम के लिए विशेष मटकियां बनाने वाले विनोद प्रजापति ने बताया कि वे पिछले कई वर्षों से मटकियों का व्यापार करते है लेकिन, कोरोना काल में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर्व पर विशेष शृंगार वाली मटकियों की बिक्री नाममात्र रह गई है अन्यथा पहले पर्व पर प्रतिदिन तीन सौ से ज्यादा मटकियां बिक जाती थी। इस बार पर्व मनाने की रियायत तो मिल गई लेकिन, दही हांडी के आयोजन नहीं होने से भी यह मुश्किल बनी हुई है। सूरत शहर में एक सौ से ज्यादा ऐसे कारोबारी है जो श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर्व पर विशेष शृंगार वाली मटकियां बनाते और बेचते हैं।
Published on:
30 Aug 2021 06:47 pm
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