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CYBER CRIME IN SURAT : बेलगाम साइबर अपराधियों पर कस रहा सूरत पुलिस का शिकंजा!

  - डाटा स्टोरी - तीन वर्षो में साइबर पुलिस की सफलता का ग्राफ 78 से 94 फीसदी तक पहुंचा

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CYBER CRIME IN SURAT : बेलगाम साइबर अपराधियों पर कस रहा सूरत पुलिस का शिकंजा!

CYBER CRIME IN SURAT : बेलगाम साइबर अपराधियों पर कस रहा सूरत पुलिस का शिकंजा!

दिनेश एम.त्रिवेदी

सूरत. तेजी से बढ़ रहे साइबर अपराधों को रोकने के लिए सूरत साइबर क्राइम पुलिस धीरे-धीरे साइबर अपराधियों पर अपना शिकंजा कस रही है। पुलिस का दावा हैं कि इसमें अपेक्षित सफलता भी मिल रही हैं।

जागरुकता अभियान के चलते पुलिस तक पहुंचने वाले मामलों संख्या मेें भी बढ़ रही हैं। लेकिन इन्हें सुलझाने में साइबर पुलिस सफलता का औसत भी लगातार बढ़ रहा है। साइबर थाना पुलिस के साथ स्थानीय थाना पुलिस की सफलता का औसत भी सुधरा है।

जानकारों की मांगे तो पांच साल पूर्व तक साइबर क्राइम से जुड़े मामलों को सुलझाने में पुलिस की सफलता का ग्राफ बेहद नीचे थे। अव्वल तो पुलिस साइबर क्राइम से जुड़े मामले दर्ज करने से बचती थी। जो मामले दर्ज भी होते थे, तो उनमें से विशेषज्ञता के साथ अनुसंधान नहीं होता था।

जिसका साइबर अपराधी भरपूर फायदा उठाते थे। 2018 में सूरत में अलग से साइबर क्राइम पुलिस थाना शुरू किया गया, साथ ही लोगों में साइबर अपराधों के प्रति जागरुकता बढ़ाने के लिए साइबर संजीवनी प्रोजेक्ट भी शुरू किया गया। इसके तहत विभिन्न माध्यमों से लोगों में साइबर अपराधों के प्रति जागरुकता लाने का प्रयास किया गया।

2022 में सूरत पुलिस ने 1200 से अधिक अवेरनेस कार्यक्रम किए। प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 12.75 लाख लोगों को इससे जोड़ा। इतना ही नहीं विभिन्न सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए 12.50 करोड़ लोगों तक अपनी पहुंच बनाई। एक लाख पुस्तकों का भी वितरण किया। पुलिस के साइबर संजीवनी अभियान को नेशनल लेवल पर स्कॉच सिल्वर अवार्ड से भी सम्मानित किया गया।

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पिछले तीन वर्षो के दौरान सूरत में दर्ज साइबर अपराध

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साइबर क्राइम पुलिस थाने में दर्ज मामले

वर्ष - दर्ज मामले - सुलझाएं मामले - सफलता का प्रतिशत - पकड़े गए आरोपी - ठगी रूपए में - जब्त की राशि

2020 - 38-30-78-40-28234342-630200

2021 - 50-44-88-58-10347784-7212408

2022 - 80-75-94-142-57774661-23174639

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स्थानीय थानों में दर्ज मामले

वर्ष - दर्ज मामले - सुलझाएं मामले - सफलता का प्रतिशत

2020 - 132-71-36

2021- 272-44-88

2022 - 376-218-60

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तीन वर्षो में कुल 95 लाख लौटाएंपिछले तीन वर्षो के दौरान सूरत साइबर क्राइम सेल ने तुंरत मिली शिकायतों का निपटारा भी किया है। ट्रांजेक्शन के बाद अन्य खातों में ट्रांसफर हुए 116 पीडि़तों के 95 लाख 63 हजार 932 बैंकों व विभिन्न पेंमेंट गेटवे मदद से फ्रिज करवाए और फिर तस्दीक के बाद पीडि़तों को रिफंड करवाए।

नेशनल पोर्टल से 1.60 करोड़ लौटाए

सूरत साइबर क्राइम सेल ने नेशनल साइबर क्राइम रिर्पोटिंग पोर्टल (एनसीसीआरपी) व इंडीफिसेबल राइट ऑफ यूज(आईआरयू) में दर्ज की गई 849 शिकायतों पर भी तुरंत कार्रवाई कर उन्हें सुलझाया। साइबर पुलिस ने कार्रवाई के बाद अलग अलग बैंकों में फ्रिज किए गए एक करोड़ 60 लाख 45 हजार 720 रुपए पीडि़तों को उनके बैंक खातों में लौटाए।

2022 में इन गैंग्स और घपलों को पकड़ा

1. बैंग्लूरू की अफ्रिकन गैंग - देश के नामी अस्पतालों की फर्जी वेबसाइट बना कर किडऩी के बदले करोड़ों रुपए देने का झांसा देकर लोगों के साथ की लाखों की ठगी।

2. दिल्ली एनसीआर की बीमा फ्रोड़ गैंग - बीमा लोकपाल के नाम से बीमा कंपनियों के ग्राहकों से संपर्क कर उन्हें बीमा लाभ दिलवाने का झांसा देकर ऑनालाइन रुपए ऐंठते थे।

3. जामतारा आरबीएल क्रेडिट कार्ड गैंग - विभिन्न तरह से आरबीएल बैंक के ग्राहकों से क्रेडिट कार्ड का ओटीपी हासिल कर फ्रोड़ करते थे।

4. पश्चिम बंगाल की एप इंवेस्टमेंट गैंग- लोगों से संपर्क कर मोबाइल एप में निवेश करने पर तगड़े मुनाफे का झांसा देकर उनसे निवेश करवाते हैं और फिर ठगी करते हैं।

5. हरियाणा मेवात की सैक्सटॉर्सन गैंग -सोशल मीडिया के जरिए युवती लोगों से दोस्ती करती है। उसके बाद वीडियो कॉल पर न्यूड वीडियो बना कर पूरा गिरोह पीडि़त को ब्लैकमेल करता है।

6. बिना टेस्ट ड्राइविंग लाइसेंस गैंग - आरटीओ के भ्रष्ट कर्मचारियों व एजेन्टों की गैंग द्वारा लोगों से मुंह मांगे रुपए लेकर बिना टेस्ट के ड्राइविंग लाइसेंस एप्रूव किया जा रहा था।

7. जीएसआरटीसी टिकट रिफंड घोटाला - गुजरात रोड़वेज के एजेन्टों द्वारा यूजरनेम और पासवर्ड का अवैध रूप से बसों की ट्रिप ऑनलाइन कैंसल कर रिफंड लेने का घपला पकड़ा गया था।

इनका कहना

साइबर क्राइम थाने में आवश्यकता अनुसार प्रशिक्षित पुलिसकर्मियों को नियुक्त किया गया। इसके अलावा अन्य थानों में भी दो-दो प्रशिक्षित पुलिसकर्मी नियुक्त किए गए।

साथ ही साइबर अपराधों की जांच में हो रही प्रगति पर लगातार नजर रखी गई और जरुरी दिशा निर्देश भी दिए गए। इसके अलावा पुलिसकर्मियों की अपनी मेहनत से अच्छे परिणाम मिले।

- अजय कुमार तोमर (शहर पुलिस आयुक्त सूरत)

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