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SURAT SOCIAL NEWS: बस चिकित्सक की पर्ची लाओ और दवा ले जाओ

-घरों में उपयोग से रह गई दवा का करते हैं जगह-जगह से संग्रह, छंटनी के बाद प्रति माह सवा-डेढ़ लाख रुपए मूल्य की दवा मुफ्त में होती है वितरित

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SURAT SOCIAL NEWS: बस चिकित्सक की पर्ची लाओ और दवा ले जाओ

SURAT SOCIAL NEWS: बस चिकित्सक की पर्ची लाओ और दवा ले जाओ

सूरत. लोकमाता तापी की गोद में बसी सेवा और संस्कार की सूरतनगरी में एक ऐसा बैंक भी है जहां से आपको रुपया-पैसा नहीं बल्कि स्वास्थ्य-चिकित्सा के लिए गोली-दवा मिलती है और वो भी बिल्कुल नि:शुल्क। कोरोना के विकट काल में स्थापित हुई यह अनोखी करुणा दवा बैंक आमजन के सहयोग से संचालित है और प्रत्येक माह सवा-डेढ़ लाख रुपए मूल्य की दवा-गोली सैकड़ों मरीजों को नि:शुल्क देती है।
जीवदया, पर्यावरण सुरक्षा व मानवता के कार्यों में श्रीचंद्र अशोक सोम करुणा संस्थान लम्बे समय से सूरत महानगर में सक्रिय है। कोरोना काल में आमजन व मरीजों को आई मेडिकल संबंधी दिक्कतों को ध्यान में रख मरीजों व उनके परिजनों तक नि:शुल्क दवा-गोली पहुंचाने के उद्देश्य से करुणा दवा बैंक की शुरुआत की गई। संस्थान से जुड़े फार्मासिस्ट नितेश शाह ने बताया कि शहर के सोनीफलिया में करुणा दवा बैंक प्रारम्भ किया गया है और रोजाना दर्जनभर से ज्यादा लोगों को यह बैंक विभिन्न रोगों की आवश्यक दवा-गोली उपलब्ध करवा रहा है। यह सिलसिला कोरोना काल के बाद गत सवा साल से लगातार जारी है। बैंक से मुफ्त दी जाने वाली दवा-गोली के संग्रह का तरीका भी बेहतर है और इस संबंध में शाह बताते हैं कि शहर के कई क्षेत्रों की सोसायटी-अपार्टमेंट व जैन मंदिरों में डिब्बे रखे हैं और इनमें आसपास के लोग घरों में बीमारी के दौरान उपयोग से रह गई दवा-गोली का संग्रह करते हैं। यहीं दवा-गोली बाद में शहर में कई स्थानों पर रखे डिब्बों से संग्रहित कर सोनीफलिया स्थित करुणा दवा बैंक लाई जाती है और छह-सात सेवाभावी सदस्यों के साथ मिलकर दवा-गोली की छंटनी की जाती है। इसमें एक्सपायरी व कटी-फटी दवा-गोली को हटाकर साफ-सुथरी दवा-गोली को अलग-अलग रैक में रखकर बाद में जरुरतमंद मरीजों को मुफ्त दिया जाता है और यह महीने में यह सवा-डेढ़ लाख रुपए मूल्य तक की होती है।

-फिलहाल 70 फीसदी दवा-गोली मुंबई से

संस्थान ने बताया कि शहर में बेकार दवा-गोली जरुरतमंद मरीज तक पहुंचाने के मामले में लोग जागरूक होने लगे हैं, लेकिन करुणा दवा बैंक को 70 फीसदी मुंबई की मानवज्योत संस्था की तरफ से ऐसी दवा-गोली उपलब्ध होती है। उपयोग में लेने से रह गई दवा-गोली में एलोपेथी के अलावा होम्योपैथी व आयुर्वेदिक दवाएं भी शामिल होती है, जिन्हें छंटनी करने के बाद रेलवे स्टेशन स्थित आयुर्वेदिक कॉलेज व गोपीपुरा स्थित होम्योपैथी क्लीनिक पहुंचाया जाता है।