
सूरत
सूरत की पहचान है कपड़ा उद्योग और कपड़ा उद्योग की पहचान का पर्याय हैं महिलाएं। सूरत के विकास में जितना महत्व कपड़ा उद्योग का है उतना ही यहां के कपड़ा उद्योग में महिलाओं का महत्व है। स्थानीय कपड़ा उद्योग में लगभग तीन लाख महिलाएं जुड़़ी हैं। कपड़ा उद्योग में निचले स्तर से लेकर मैनेजमेन्ट तक महिलाओं ने बखूबी काम संभाल रखा है।
सूरत के कपड़ा उद्योग में लगभग 400 डाइंग-प्रोसेसिंग यूनिट, सात लूम्स मशीनें, एक लाख एम्ब्रॉयडरी मशीनें हैं। लगभग आठ से 10 लाख लोगों को इससे रोजगार मिलता है। इनमें महिलाओं की संख्या भी लगभग ढाई से तीन लाख है। पांच साल पहले कपड़ा उद्योग में महिलाओं का प्रमाण पांच प्रतिशत से भी कम था। उद्यमियों का कहना है कि समय के साथ महिलाओं की संख्या तेजी से बढ़ रही है। छोटे लूम्स यूनिट से लेकर बड़े ब्रांडेड यूनिट तक महिलाओं की आवश्यकता है। एक यूनिट में स्वीपर से लेकर रिसेप्सनिस्ट, कपड़ा सुखाने, टाका लगाने, सिलाई करने, डिजाइन बनाने, क्वाॉलिटी चेक करने, अकाउन्टेन्ट और एम्ब्रॉयडरी मशीनों में महिलाएं काम कर रही हैं। यह महिलाएं सुबह घरेलू काम निपटाने के बाद नौ बजे से यूनिट पर आती हैं और शाम सात-आठ बजे तक काम करती हैं। इनका वेतन कम से कम 12 हजार रुपए प्रतिमाह है। यूनिट के अलावा कपड़ा मार्केट में अकाउन्टेन्ट, सीए, सेल्स गर्ल, पैकिंग बॉक्स बनाने सहित कई काम बखूबी कर रही हैं। साडिय़ों की ब्रांडिंग और प्रमोशन कार्य में भी हजारों मॉडल्स जुड़ी हैं। कहा जा रहा है कि सूरत के कपड़ा उद्योग में श्रमिकों की कमी है, लेकिन उद्यमी उनके विकल्प में महिलाओं को मान रहे हैं, क्योंकि सुपरवाइजर, मैनेजर और अकाउन्टेन्ट जैसे कई काम अब महिलाएं करनी लगी हैं। उद्यमियों का मानना है कि सूरत के कपड़ा उद्योग में महिलाओं का बड़ा योगदान है। आगे चलकर कपड़ा उद्योग में महिलाओं की भागीदारी पचास प्रतिशत तक हो सकती है।
कहां कितनी महिलाएं (लगभग)
घर से काम करने वाली - 1.50 लाख
कपड़ा मार्केट में काम करने वाली- 1 लाख
लूम्स और प्रोसेसिंग मिल में- 25 हजार
रिसेप्शन और छिटपुट काम - 10 हजार
मॉडलिंग और मॉर्फिंग - 15 हजार
घरकाम के साथ नौकरी (फोटो है)
महिलाएं अब जागरूक हो रही हैं। समय के साथ महिलाएं भी कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़ रही हैं। कपड़ा उद्योग में महिलाओं के लिए स्थान है। हमें यहां अपने ज्ञान को आगे बढ़ाने का अवसर मिलता है।
मयूरिका वैष्णव, डिजाइनर(मैनेजर)
बदल रहा है समय
अपने परिजनों की सहमति के साथ काम कर रही हूं। मशीनों पर कपड़ों के उत्पादन की प्लानिंग करती हूं। तय समय के अंदर काम करना होता है, लेकिन यह काम भी बड़ी सरलता से हो जाता है। कपड़ा उद्योग महिलाओं के लिए सुरक्षित है।
गीतिका ओटवानी, प्रोडक्शन प्लानर
महिलाओं के हाथ में बागडोर
महिलाओं ने समय के साथ अपने आप को मजबूत किया है। डिजाइङ्क्षनग के काम में तो महिलाओं का बोलबाला है। महिलाएं अपने पैरों पर खड़ी हो चुकी हैं और आने वाले दिनों में और सशक्त होंगी।
अपेक्षा पटेल, कीर्ति नायर, वनिता गढिय़ा(डिजाइनर)
महिलाएं कर सकती हैं कई काम
कपड़ा उद्योग में पुरुषों के लिए जो काम हैं, वह काम महिलाएं भी कर सकती हैं। अकाउंटिंग से लेकर क्वॉलिटी एश्योरेन्स और लेब टेस्टिंग तक का काम महिलाएं कर रही हैं। सुबह से लेकर रात तक काम कर महिलाएं अपना भविष्य संवार रही हैं।
निराली परमार, खुशबू शर्मा, सुवर्णा मोरे, अविस्मीता त्रिपाठी, सुमेधा प्रकाश कर्मचारी
Published on:
08 Mar 2018 12:18 pm
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