
सूरत. भारत का अर्थ होता है जहां से प्रकाश का प्रसार हो...। जिसने गणना का ज्ञान कराया, मन और बुद्धि से अलग जिसने आत्मा का बोध कराया है। जिसने परमात्मा का भान कराया है वह देश भारत है। यह बात जुना पीठाधीश्वर स्वामी अवधेशानंदगिरी महाराज नेश्रीमद्भागवत कथा के समापन मौके पर श्रीश्याम मंदिर , सूरतधाम के कथा पंडाल में कही।
जीवन में पुस्तकें पढऩी व लिखनी चाहिए
महाराज ने सुदामा-कृष्ण प्रसंग सुनाते हुए बताया कि जब आपके पास सम्पन्नता आए तो अपनों को जरूर याद करना चाहिए। श्रीश्याम मंदिर, सूरतधाम के प्रथम पाटोत्सव मौके पर आयोजित श्रीमद्भागवत कथा की समाप्ति पर महाराज ने पुस्तकों का महत्व बताते हुए कहा कि जीवन में पुस्तकें पढऩी व लिखनी चाहिए। एक दिन ऐसा होना चाहिए, जिस दिन तकिए की जगह पुस्तक हो। महाराज ने बताया कि खुद के लिए समय निकालकर ध्यान में बैठो एवं व्यसन से दूर रहो। जल्दी सोना-जल्दी उठना, गीता का अध्ययन, गौ ग्रास निकालने की आदत दिनचर्या में सभी को शामिल करनी चाहिए। अंत में महाराज ने भागवत का प्रतम व अंतिम श्लोक का उच्चारण कर कथा का समापन किया एवं भारत देश की प्रगति की कामना व्यक्त की। इस अवसर पर आरती के बाद गायिका ने ज्योत से ज्योत जगाते चलो, प्रेम की गंगा बहाते चलो...गीत का गायन किया।
होंगे अनूठे आयोजन
श्रीश्याम सेवा ट्रस्ट की ओर से श्रीमद्भागवत कथा की पूर्णाहुति के मौके पर गुरुवार सुबह आठ बजे से मंदिर प्रांगण में हवन व कन्या पूजन की शुरुआत होगी। ट्रस्ट के अध्यक्ष कौशल खंडेलिया ने बताया कि पहले पूर्णाहुति हवन होगा और बाद में दोपहर सवा बारह बजे से 108 कन्याओं का पूजन किया जाएगा। ट्रस्ट के सचिव सुशील चिराणिया ने बताया कि शाम सात बजे से रास गरबा व डांडिया के आयोजन होंगे और इसमें गुजरात के कलाकार पारंपरिक तरीके से गरबा खेलेंगे।
परिक्रमा के लिए श्रद्धालुओं का तांता
कथा पंडाल में श्रीमद्भागवत कथा की 108 मूल भागवत के पंडाल में नित्य पूजन का दौर बुधवार सुबह को भी चला। इस दौरान 108 यजमान सपरिवार पूजन में शामिल रहे। वहीं, मूल भागवत के पूजा स्थल की परिक्रमा के लिए बुधवार सुबह से ही श्रद्धालुओं का मेला लगा रहा और इस दौरान वे श्रद्धाभाव के साथ 11, 21, 51 और अनगिनत श्रद्धालुओं ने 108 परिक्रमा लगाई। परिक्रमा के दौर में कथा की पूर्णाहुति पर तेजी देखने को मिली।
कच्चे मेवे से सजे बाबा श्याम
ट्रस्ट के मीडिया प्रभारी कपीश खाटूवाला ने बताया कि बुधवार को बाबा श्याम की प्रतिमा का अनूठा शृंगार किया गया। 108 किलोग्राम के कच्चे मेवे के शृंगार में शामिल काजू, बादाम, अंजीर, अखरोट समेत अन्य वस्तुएं इसमें शामिल रही। कच्चे मेवे की कुल 31 माला व गुलाब समेत अन्य पुष्पों की 20 माला शृंगार में शामिल थी। कच्चे मेवे की एक माला को बनाने में एक कारीगर को तीन दिन का समय लगा और कोलकाता के 13-14 कारीगरों ने अनूठे शृंगार के लिए यह मालाएं 7-8 दिन की मेहनत से तैयार की है।
Published on:
25 Jan 2018 12:42 pm
बड़ी खबरें
View Allसूरत
गुजरात
ट्रेंडिंग
