फिआस्वी के चेयरमैन भरत गांधी ने कहा कि इम्पोर्टेड कपड़ों पर ड्यूटी बढ़ाने की मांग की गई थी। इस बारे में सर्कुलर आने के बावजूद अभी तक उस पर अमल नहीं हो रहा है। वीवर्स को इनपुट टैक्स क्रेडिट अभी तक नहीं मिला। कैट के प्रमोद भगत ने कहा कि इमीटेशन जरी पर 12 के स्थान पर पांच प्रतिशत जीएसटी लगाया जाए और जीएसटी में सरलीकरण किया जाए। कपड़ा उद्यमी मयूर गोलवाला और आशीष गुजराती ने कहा कि ओपनिंग स्टॉक पर वीवर्स को टैक्स क्रेडिट रिफंड मिलना चाहिए। वीवर्स का लगभग 200 करोड़ रुपए का रिफंड फंसा पड़ा है। जॉब वर्क से जीएसटी हटाना चाहिए।
ट्रांसपोर्टर युवराज देसले ने कहा कि यूपी में ई-वे बिल को लेकर परेशान किया जा रहा है। कई बार व्यापारी तीन-चार पार्सल का ई-वे बिल एक साथ बना देते हैं और माल कुछ दिनों के अंतर में भेजते हैं। ऐसे में जीएसटी अधिकारी कम कीमत का माल होने पर भी जुर्माना कर रहे हैं। व्यापारियों का माल ट्रांसपोर्टर सिर्फ 20 दिन गोडाउन में रख सकते हैं, यह नियम भी हटाया जाना चाहिए। टैक्स कंसल्टन्ट प्रशांत शाह और रोहन देसाई ने कहा कि कई व्यापारियों का ट्रान-1 का फॉर्म किसी कारण से नहीं भरा जा सका तो वह थ्री-बी और जीएसटीआर-1 भी फाइल नहीं कर पा रहे हैं। एक ही राज्य में ई-वे बिल पर अमल कुछ महीनों के लिए स्थगित किया जाए। ई-वे बिल जनरेट करने में पार्टी के नाम के स्थान पर मालिक का नाम आने की शिकायत की गई।
कपड़ा उद्यमियों की शिकायतें सुनने के बाद एसजीएसटी कमिश्नर वाघेला ने कहा कि उन्हें कपड़ा उद्यमियों की समस्याएं पता है। कपड़ा उद्यमियों के लिए जीएसटी में अलग से व्यवस्था होनी चाहिए। उनकी समस्याओं को वह ऊपर पहुंचाएंगे और जल्द निराकरण की कोशिश करेंगे। मीटिंग में जीएसटी अधिकारी प्रशांत कडुसकर, सचिन सिंह, रविन्द्र तिवारी, के.एम. पटेल, कपड़ा उद्यमी संजय सरावगी, सुभाष अग्रवाल, विकास पचेरीवाल, राजेश अग्रवाल , रंगनाथ सारड़ा सहित अन्य उपस्थित थे।
हीरा उद्यमियों से भी मिले
एसजीएसटी कमिश्नर वाघेला ने दोपहर सूरत डायमंड एसोसिएशन कार्यालय में हीरा उद्यमियों से मुलाकात की। उद्यमियों ने जॉब वर्क पर जीएसटी घटाने की मांग की। वाघेला ने उद्यमियों की मांगों पर उचित हल का आश्वासन दिया। मीटिंग में एसोसिएशन के प्रमुख बाबू गुजराती, सेक्रेटरी दामजी मावाणी सहित अन्य उद्यमी उपस्थित थे।