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जरा देखके चलो.. मुश्किल ही नहीं, खतरनाक भी है यह डगर

-सारोली लैैण्डमार्क मार्केट से डुंभाल केनाल रोड तक का रास्ता बना वाहन चालकों का सरदर्द...

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सूरत

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Sunil Mishra

Mar 19, 2018

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दिनेश एम.त्रिवेदी

सूरत. पूणा-कुंभारिया रोड पर सारोली लैैण्डमार्क मार्केट से डुंभाल केनाल रोड तक का रास्ता इन दिनों वाहन चालकों के लिए सरदर्द बना हुआ है। वाहन चालकों के लिए यहां से निकलना मुश्किल ही नहीं, खतरनाक भी है। जगह-जगह बैरिकेटिंग, जाम और भारी वाहनों की आवाजाही से हादसे का डर बना रहता है। कपड़ा बाजार खुलने के समय यानी सुबह नौ से दोपहर एक बजे के दौरान यहां यातायात का भारी दबाव रहता है। कंगारु सर्किल पर फ्लाई ओवर ब्रिज के निर्माण के लिए सड़क के बीच का करीब आधा किलोमीटर का हिस्सा कॉर्डन किया हुआ है। इस वजह से वाहन चालकों को एक तरफ से दूसरी तरफ जाने के लिए कॉर्डन किए गए हिस्सा का लंबा चक्कर लगाना पड़ता है। इस चक्कर में कई बार वाहन इस तरह उलझ जाते हैं कि निकलना मुश्किल हो जाता है। यही सूरते-हाल शाम को सात बजे से रात दस बजे के दौरान रहती है। परवत पाटिया सर्किल पर छह मुख्य मार्गों का संगम है। इनमें एक पूणा-कुंभारिया की ओर और दूसरा सहारा दरवाजा की ओर से आता है। दो रास्ते केनाल रोड के हैं। एक रास्ता परवत गांव से और दूसरा अर्चना स्कूल की तरफ से आता है। यहां भी पीक आवर्स में एक ओर से दूसरी ओर जाना किसी भूल भुलैया में घुसने जैसा है। मॉडल टाउन सर्किल पर भी पीक आवर्स में भारी दबाव रहता है।

यहां स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत साइकिल ट्रेक बनाया गया है। फुटपाथों को चौड़ा किया गया है, जिससे सड़क पर वाहनों के लिए जगह कम हो गई है। जो हिस्सा बचा हुआ है, उस पर पीक आवर्स में सब्जियां और अन्य सामान बेचने वाले अपनी रेहडिय़ों से कब्जा कर लेते हैं। इससे वाहन चालकों के लिए निकलना मुश्किल हो जाता है। पीक आवर्स में उन्हें लंबे समय तक जाम में फंसे रहना पड़ता है। वाहनों के भीड़-भड़क्के से आम लोगों को भी परेशानी होती है। दुकानदारों को भी आए दिन मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।

सात क्षेत्रों को जोड़ता है शहर से


पूणा-कुंभारिया रोड और केनाल रोड के जरिए गोडादरा, परवत गांव, देवध, कुंभारिया, पूणागाम, सीमाड़ा और सारोली क्षेत्र में रहने वाली बड़ी आबादी शहर से जुड़ती है। इन इलाकों में रहने वालों में कई लोग रिंग रोड के कपड़ा बाजार में काम करते हैं। वह प्रतिदिन सुबह बाजार जाने और शाम को बाजार से लौटने के लिए इस रास्ते का उपयोग करते हैं।


पुलिस बल नाकाफी


वैसे तो प्रत्येक सर्किल पर एक यातायात पुलिसकर्मी के साथ टीआरबी के दो-तीन जवानों की ड्यूटी रहती है, लेकिन निर्माण कार्यों और अन्य दुव्र्यवस्थाओं के कारण वह यातायात का सुचारू संचालन नहीं कर पाते। सर्किलों के चक्कर इतने लंबे हो गए हैं कि वह एक जगह खड़े होकर यातायात का संचालन नहीं कर सकते। आम शिकायत है कि उनका ध्यान टैम्पो चालकों से अवैध वसूली पर अधिक रहता है। कई भारी वाहन चालक और निजी बसों के चालक अवैध रूप से अपने वाहन पार्क करते हैं, लेकिन उन पर कोई कार्रवाई नहीं होती।


यह है सूरते-हाल


करीब तीन किलोमीटर लंबे और 40-50 फीट चौड़े इस रास्ते पर कंगारू सर्किल, परवत पाटिया सर्किल और मॉडल टाउन सर्किल तीन बड़े जंकशन हैं। मुख्य मार्ग का बड़ा हिस्सा बीआरटीएस के लिए आरक्षित है। बीआरटीएस सेवा अभी इतनी व्यापक नहीं है कि आवगमन के लिए लोग उस पर निर्भर रह सकें। ऐसे में शहर की लाइफलाइन ऑटो रिक्शों और दुपहिया वाहनों के लिए बहुत कम जगह बचती है। इसमें एक हिस्सा फुटपाथ पर सामान बेचने वालों के अतिक्रमण का शिकार रहता है। कुछ स्थानों पर स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत फुटपाथ का विस्तार कर दिया गया है।


भारी वाहनों से खतरा


यातायात पुलिस ने पीक आवर्स में भारी वाहनों के शहर में प्रवेश पर प्रतिबंध लगा रखा है, लेकिन कपड़ा बाजार से मॉल ढुलाई करने वाले वाहन इसी रास्ते का उपयोग करते है। ट्रांसपोर्टनगर डुंभाल में ही है। दोपहर एक बजते ही सारोली पर जमा हुए ट्रक सड़क आ जाते हैं। लैण्डमार्क से डुंभाल तक सड़क पर इनकी कतार लगने से छोटे वाहनों के लिए रास्ता पार करना मुश्किल हो जाता है। जगह-जगह बैरिकेटिंग और स्टील की चद्दरों के कारण दूसरी तरफ से आ रहे भारी वाहन नजर नहीं आते, जिससे हादसे का खतरा रहता है।