
रेल टिकट के लिए मशक्कत
सिलवासा. प्रवासियों को दीपावली पर घर जाने के लिए लम्बी दूरी की रेलगाडियों में टिकट नहीं मिल पा रही है और उनके पास तत्काल टिकट ही अंतिम विकल्प के रूप में बचा है। तत्काल टिकट के लिए आरक्षण विंडो पर सुबह छह बजे से ही लोगों की कतार लग जाती है जबकि विंडो पर सुबह दस बजे एसी और नॉन एसी तत्काल टिकट की बुकिंग सुबह 11 बजे से होती है।
दीपावली पर्व पर मुंबई, सूरत से बिहार, उत्तरप्रदेश, राजस्थान, दिल्ली, जम्मू, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, छत्तीसगढ़, एमपी जाने वाली लम्बी दूरी की टे्रनों में 300 से ज्यादा वेटिंग चल रही है। स्थिति यह है कि किसी भी ट्रेन में स्लीपर एवं एससी कोच में आरक्षित टिकट नहीं है। दीपावली के बाद भी चालू माह में रेलों में जगह नहीं है। दीपोत्सव तथा विधानसभा चुनाव होने से राजस्थान जाने वाली गणगौर, बांद्रा जयुपर एक्सप्रेस, अरावली, सुर्यनगरी, रणकपुर, बांद्रा चंडीगढ़ एक्सप्रेस, बांद्रा हिसार, बांद्रा सराय रोहिला, पुणे जयपुर, बांद्रा-जैसलमेर, अजमेर एक्सप्रेस में पैर रखने को जगह नहीं हैं। रविवार को चलने वाली अरावली, गणगौैर, बांद्रा-अजमेर/ उदयपुर सुपर एक्सप्रेस, स्वराज एक्सप्रेस में तत्काल टिकट प्राप्त करने के लिए शनिवार को बड़ी संख्या में यात्री विंडों पर पहुंचे। इनमें पहले दो यात्रियों को ही तत्काल टिकट नसीब हुई। तत्काल टिकट का समय शुरू होते ही चंद सैकण्ड में ही वेटिंग आ गई।
महिला विंडो का अभाव
ओआईडीसी द्वारा संचालित रेलवे आरक्षण विंडो पर टिकट के लिए महिलाओं की अलग व्यवस्था नहीं है। महिलाओं को पुरुषों की कतार में नंबर से खड़ा होना पड़ता है। तत्काल टिकट के लिए भी वरिष्ठ नागरिक व महिलाओं के लिए कोई विशेष प्रबंध नहीं है। भारी भीड़ होने से कॉमन लाइन में महिलाओं को टिकट नसीब नहीं होती है। दीपोत्सव के कारण आरक्षण केन्द्र खुलने से पहले बाहर यात्रियों का मेला लग जाता है। मोबाइल टिकटिंग सर्विस के बावजूद औद्योगिक इकाइयों के श्रमिक एवं कर्मचारी आरक्षण विंडों से टिकट प्राप्त करने में ज्यादा विश्वास करते हैं। यात्रियों का कहना है कि विंडों से प्राप्त कोई भी टिकट पर यात्रा के लिए वैद्य रहती है, जबकि इंटरनेट से कंफर्म टिकट ही वेलिड होती है।

Published on:
03 Nov 2018 07:26 pm
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