
VNSGU : यूजीसी के लिए दक्षेश ठाकर ही अभी तक वीएनएसजीयू कुलपति
सूरत.
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की वेबसाइट पर आज भी डॉ. दक्षेश ठाकर वीर नर्मद दक्षिण गुजरात विश्वविद्यालय के कुलपति और डॉ. जे.आर. मेहता कुलसचिव हैं, जबकि यह दोनों काफी पहले रिटायर हो चुके हैं। वीएनएसजीयू प्रशासन को बेबसाइट पर जानकारी अपडेट कराने की फुर्सत नहीं है। वीर नर्मद दक्षिण गुजरात विश्वविद्यालय के कुलपति रहे डॉ. दक्षेश ठाकर का कार्यकाल 2017 में समाप्त हो गया था। अगस्त 2017 में डॉ. शिवेन्द्र गुप्ता को कुलपति नियुक्त किया गया। इससे पहले 2016 में डॉ. जे.आर. मेहता कुलसचिव पद से रिटायर हुए थे। उनकी जगह ए.वी. धडुक को कुलसचिव का पदभार सौंपा गया। वीएनएसजीयू की ओर से जानकारी अपडेट नहीं किए जाने से यूजीसी की वेबसाइट पर वीएनएसजीयू के कुलपति और कुलसचिव के तौर पर क्रमश: डॉ. दक्षेश ठाकर और डॉ. जे.आर.मेहता का नाम है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने कई बार विश्वविद्यालयों को कुलपति, कुलसचिव की जानकारी अपडेट कर भेजने का आदेश दिया, लेकिन वीएनएसजीयू ने इस पर ध्यान नहीं दिया।
कुलपति की योग्यता की जांच के आदेश
सिंडीकेट सदस्य संजय देसाई, डॉ.महेन्द्र चौहाण, डॉ. घनश्याम रावल और अन्य ने आरोप लगाया था कि कुलपति पद पर डॉ. शिवेन्द्र गुप्ता की नियुक्ति में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के नियमों का पालन नहीं किया गया। सिंडीकेट सदस्यों ने कुलपति की पीएचडी पर भी सवाल खड़े किए और आरोप लगाया कि कुलपति पद के लिए असिस्टेंट प्रोफेसर, एसोसिएयट प्रोफेसर, प्रोफेसर पद के अनुभव होने चाहिए, जो डॉ. गुप्ता के पास नहीं हैं। सदस्यों ने आरोप लगाया कि पद का लाभ उठाकर गलत फैसले किए जा रहे हैं। कमेटियों के गठन में गड़बड़ी की जा रही है।
सिंडीकेट सदस्यों की शिकायत पर प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से कुलपति की योग्यता की जांच के आदेश जारी किए गए हैं। गुजरात के चीफ सेक्रेटरी को इसकी भी जांच करने का निर्देश दिया गया है कि कुलपति की नियुक्ति में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग और वीर नर्मद दक्षिण गुजरात विश्वविद्यालय के नियमों का पालन किया गया या नहीं।
कुलपति के पुतले का ऑपरेशन किया
सिंडीकेट चुनाव जैसे-जैसे पास आ रहे हैं, विश्वविद्यालय में तरह-तरह के विवाद सामने आ रहे हैं। सोमवार को सिंडीकेट सदस्य भावेश रबारी और एनएसयूआइ के कई कार्याकर्ता प्रशासनिक भवन के पास एकत्रित हुए। कुलपति डॉ.शिवेन्द्र गुप्ता का पुतला लाया गया। विश्वविद्यालय प्रशासन ने पुलिस को सूचना दी। बड़ी संख्या में पुलिस और अन्य सुरक्षाकर्मी विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन के पास एकत्रित हो गए। भावेश ने कुलपति के पुतले का ऑपरेशन किया। भावेश ने आरोप लगाया कि कुलपति की डिग्री, उनकी ओर से की गई मयूर चौहाण की नियुक्ति, उनकी ओर से बनाई गई एलआइसी, सभी अयोग्य हैं। इन सभी मामलों में जांच कर कार्रवाई करने की मांग की गई। बाद में कुलपति को ज्ञापन भी सौंपा गया।
Published on:
04 Oct 2018 07:25 pm
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