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खबर पढ़ी और दांडी मार्च के प्रवेश द्वार पर पहुंच गए युवा

शहर में उपेक्षित और खस्ता हाल दांडी यात्रा के प्रवेश द्वार का मामला, श्रीनाथ यूथ नेशन के साथ जुड़ी कई संस्थाएं, कायाकल्प में सहयोग का भरोसा दिया

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सूरत

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Vineet Sharma

Oct 02, 2018

patrika

खबर पढ़ी और दांडी मार्च के प्रवेश द्वार पर पहुंच गए युवा

सूरत. ऐतिहासिक दांडी यात्रा के दौरान राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने सूरत में जिस रास्ते से प्रवेश किया था, मंगलवार को युवा बड़ी संख्या में उसे देखने पहुंचे। वहां पसरी गंदगी को साफ करने के लिए श्रमदान कर उन्होंने बापू को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि दी।

दांडी यात्रा के दौरान राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने जिस रास्ते से सूरत में प्रवेश किया था, वह जर्जर हाल है। पूरे रास्ते में जगह-जगह गंदगी पसरी हुई है। सौ मीटर से भी कम के इस रास्ते को दुरुस्त कर दांडी मार्च की यात्रा के रूप में सहेजने में स्थानीय प्रशासन और राज्य सरकार पूरी तरह विफल रहे हैं।

राजस्थान पत्रिका टीम ने गांधी जयंती के अवसर पर मौके पर जाकर स्थल का जायजा लिया और दो अक्टूबर के अंक में ‘जिस मार्च ने अंग्रेजी हुकूमत की नींव हिलाई, उसके प्रवेश मार्ग की प्रशासन को सुध नहीं’ शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया। समाचार पढ़ कर शहरभर से युवा बड़ी संख्या में उस मार्ग को देखने पहुंच गए। युवा जब स्थल पर पहुंचे, श्रीनाथ यूथ नेशन की टीम रास्ते और आसपास के क्षेत्र की साफ-सफाई में जुटी थी। युवाओं ने भी इसमें बढ़-चढक़र हिस्सा लिया और श्रमदान कर बापू को याद किया। युवा ही नहीं, समाचार को पढक़र कई स्वयंसेवी संस्थाएं भी मौके पर पहुंच गईं। उन्होंने भी इस मुहिम में सहयोग का आश्वासन दिया। संस्था प्रतिनिधियों ने इस ऐतिहासिक धरोहर को बचाए रखने और कायाकल्प के अभियान से जुडऩे की इच्छा जताई।

गौरतलब है कि श्रीनाथ यूथ नेशन के हरीश गुर्जर और उनकी टीम आठ साल से गांधी जयंती के अवसर पर यहां नियमित रूप से साफ-सफाई करती है। इस बार पत्रिका में समाचार प्रकाशित हुआ तो अन्य लोग भी उनकी मुहिम से जुड़ गए। विभिन्न संस्थाओं के साथ बातचीत के बाद तय हुआ कि युवा पीढ़ी को दांडी यात्रा के महत्व और सूरत में प्रवेश मार्ग से परिचित कराने के लिए इसे स्मारक के रूप में विकसित किया जाए। इसी मौके पर बापू की प्रतिमा स्थापित करने का भी निर्णय किया गया। संबंधित विभागीय औपचारिकताओं को जल्द पूरा कर बापू की प्रतिमा स्थापित करने के साथ ही लोगों को इस क्षेत्र के महत्व से परिचित कराने के लिए शिलालेख भी लगाया जाएगा।

पत्रिका ने दी संजीवनी

सात-आठ साल से हम नियमित रूप से यहां आकर श्रमदान कर रहे हैं। लोगों में जागरुकता के अभाव में यह महज औपचारिकता-सी रह गई थी। पत्रिका में समाचार प्रकाशित होने के बाद जिस तरह लोगों और संस्थाओं ने आगे बढ़ सहयोग के लिए हाथ बढ़ाया, हमारी मुहिम को संजीवनी मिली है।
हरीश गुर्जर, श्रीनाथजी यूथ नेशन, सूरत