
अडाजण में वर्किंग वुमन हॉस्टल पर फैसला कल
सूरत. बढ़ती आबादी के साथ ही लोगों की समस्याएं भी बढ़ी हैं। जोनवार आबादी के दबाव को देखते हुए प्रशासनिक दृष्टि से वराछा और सेंट्रल जोन को पहले ही दो हिस्सों में बांटा जा चुका है। अब अन्य जोन में भी इसी तरह के बंटवारे की कवायद शुरू हुई है। सोमवार को महापौर की आयुक्त और अन्य अधिकारियों के साथ हुई संकलन बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा की गई।
आबादी के लिहाज से वराछा शहर का सबसे बड़ा जोन है। प्रशासनिक मुश्किलों को देखते हुए मनपा प्रशासन ने इसे दो हिस्सों में बांटकर अधिकारियों की अलग-अलग टीम गठित की है। सेंट्रल जोन में भी अधिकारियों ने इसी व्यवस्था पर अमल किया है, जिसके सकारात्मक परिणाम मिले हैं। इसका लाभ क्षेत्र में रह रहे लोगों को भी मिला। उन्हें अपनी समस्या लेकर दूर तक नहीं जाना पड़ता।
रांदेर, अठवा और उधना जोन में भी लोगों को कमोबेश इसी समस्या से जूझना पड़ता है। डूमस के लोगों को दिक्कत होती है तो कई किमी का चक्कर काटकर अठवा जोन दफ्तार आना होता है। इसी तरह पाल अडाजण के लोगों को मुश्किल पडऩे पर रांदेर में जोन दफ्तर की दौड़ लगानी पड़ती है। यही हाल उधना जोन के लोगों का है। सचिन से लोगों को अपनी मुश्किलेें लेकर उधना जोन दफ्तर आना पड़ता है। सोमवार को आयुक्त एम. थेन्नारसन के साथ हुई बैठक में महापौर जगदीश पटेल ने लोगों की इस मुश्किल का हल खोजने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि प्रशासन इतना सहज बनाया जाए, जिससे लोगों को सहूलियत हो और परेशानी से निजात के लिए अधिकारियों तक पहुंचने में परेशान न होना पड़े।
नुकसान की समीक्षा
बैठक में वराछा क्षेत्र में रविवार रात हुई हिंसा से मनपा की संपत्ति को हुए नुकसान की समीक्षा भी की गई। महापौर ने कहा कि इस तरह के उपाय हों, जिससे मनपा की संपत्ति को बचाया जा सके। बैठक में महापौर ने सड़कों पर घूम रहे आवारा पशुओं को पकडऩे और उनके रख-रखाव, कलाकुंज खाड़ी तथा ब्रिज सेल के दूसरे मामलों की समीक्षा की। महापौर ने कहा कि गार्बेज के लिए कंटेनर धीरे-धीरे बंद कर गार्बेज कलेक्शन के वैकल्पिक उपाय खोजे जाएं। उन्होंने रिंगरोड पर कपड़ा बाजार में सबवे के सकारात्मक उपयोग बढ़ाने के उपाय खोजने की हिदायत दी।

Published on:
21 Aug 2018 12:42 pm
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