महादेव का मंदिर: जिसे एक रात में बनाया था पांडवों ने और यहां शिला पीती थी गाय का दूध!

Mahadev Temple : यह है भगवान शिव और माता पार्वती की पावन स्थली...

By: दीपेश तिवारी

Published: 23 Apr 2021, 12:00 PM IST

भगवान शिव lord shiv का सनातन धर्म के आदि पांच देवों सहित त्रिदेवों में एक खास स्थान है। इन्हें संहार का देवता माना जाता है। वहीं भगवान शंकर bhagwan shankar ji के अत्यंत भोले होने के कारण इन्हें भोलेनाथ भी कहा जाता है। ऐसे में हर भक्त भगवान शिव को प्रसन्न कर उनका आशीर्वाद blessings पाना चाहता है।

भगवान शिव की भक्ति के चलते यूं तो देश में कई जगह उनके मंदिर मौजूद हैं, वहीं देश के अलावा विदेशों में भी कई जगह भगवान शंकर temple of lord shiv के मंदिर हैं।

ऐसे में आज हम आपको देवभूमि DevBhoomi उत्तराखंड में बने महादेव के ऐसे मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं जिसे लेकर मान्यता है कि इस मंदिर को पांडवों के द्वारा एक रात में बनाया गया था। यह भगवान शिव और माता पार्वती की पावन स्थली मानी जाती है। इस मंदिर का नाम है बिनेश्वर महादेव मंदिर (बिनसर)...

लोकश्रुति के अनुसार काफी समय पहले यहां मौजूद शिला के ऊपर एक ग्रामीण की गाय हर रोज खड़ी होकर दूध छोड़ देती थी और देखने पर साफ दिखता था जैसे ये शिला दूध पी रही हो।

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बिनेश्वर महादेव मंदिर (बिनसर) एक लोकप्रिय हिंदू मंदिर hindu temple है। यह मंदिर देवभूमि उत्तराखंड के रानीखेत से लगभग 20 किमी की दूरी पर स्थित है। मोटे देवदार के बीच में बिनेश्वर (बिनसर- Binser Mahadev ) महादेव का पवित्र मंदिर स्थित है। अपनी दिव्यता और आध्यात्मिक माहौल के साथ, यह जगह अपनी अदुतीय प्रकृति की सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है।

कुंज नदी के सुरम्य तट पर करीब साढ़े पांच हजार फीट की ऊंचाई पर बिनसर महादेव shiv temple का भव्य मंदिर है । समुद्र स्तर या सतह से 2480 मीटर की ऊंचाई पर बना यह मंदिर हरे-भरे देवदार आदि के जंगलों से घिरा हुआ है ।

कहा जाता है कि बाद में बिनेश्वर (बिनसर) महादेव 9/10 वीं सदी में चंद वंश chand vansh के दौरान फिर बनाया गया था और इसलिए ये उत्तराखंड में सदियों से एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल रहा है। ये गणेश shri Ganesh , हर गौरी और महेशमर्दिनी की मूर्तियों के साथ, अपनी स्थापत्य कला के लिए जाना जाता है।

Mahadev Special temple

अपने धार्मिक महत्व के अलावा मंदिर templeपनी प्रभावशाली वास्तु उत्कृष्टता के लिए भी जाना जाता है। कोई भी इस मंदिर में जाने के लिए प्रसिद्ध बिनसर वन्यजीव अभयारण्य में जा सकता है। यही मौजूद महेशमर्दिनी की मूर्ति 9 वीं शताब्दी की तारीख में ‘नगरीलिपी’ में ग्रंथों के साथ उत्कीर्ण है।

माना जाता है कि यह मंदिर अपने पिता बिंदू की याद में राजा पिठ्ठ द्वारा निर्मित है और इसे बिंदेश्वर मंदिर के रूप में भी जाना जाता है। देवदार,पाइन और ओक के जंगल से घिरा हुआ यह मंदिर राज्य में आने के लिए अपना एक अलग स्थान रखता है।

बिनेश्वर (बिनसर - Binser Mahadev) महादेव मंदिर के इतिहास के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है। फिर भी कई शोधकर्ताओं ने इस मंदिर के बारे में तथ्यों और मिथकों का पता लगाने का प्रयास किया है।

बिनेश्वर (बिनसर - Binser Mahadev) महादेव मंदिर अपने पुरातात्विक महत्व और वनस्पति के लिए लोकप्रिय है। मंदिर के बारे में सीमित दस्तावेजों के कारण, अलग-अलग लोगों की अलग-अलग कहानी है जो इसकी खोज के बारे में बताती है।

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बिनेश्वर (बिनसर) महादेव को लेकर हैं कई मान्यताएं : BELIEFS OF BINSAR MAHADEV TEMPLE

: मंदिर के सम्बन्ध में माना जाता है कि सौनी बिनसर के निकट किरोला गांव में एक 65 वर्षीय नि:संतानी वृद्ध थे। उन्हें सपने में एक साधु ने दर्शन देकर कहा कि कुंज नदी के तट की एक झाड़ी में शिवलिंग lord shiv पड़ा है। उसे प्रतिष्ठित कर मंदिर का निर्माण करो। उस व्यक्ति ने आदेश पाकर मंदिर बनाया और उसे पुत्र प्राप्त हो गया।

पूर्व में इस स्थान पर छोटा सा मंदिर स्थापित था। वर्ष 1959 में श्री पंच दशनाम जूना अखाड़ा से जुड़े ब्रह्मलीन नागा बाबा मोहन गिरि के नेतृत्व में इस स्थान पर भव्य मंदिर का जीर्णोद्घार शुरू हुआ। इस मंदिर में वर्ष 1970 से अखंड ज्योति जल रही है।

: एक अन्य मान्यता के अनुसार पूर्व में बिनसर के निकटवर्ती सौनी गांव में मनिहार लोग रहते थे। उनमें से एक की दुधारु गाय रोजाना बिनसर क्षेत्र में घास चरने जाती थी।

घर आने पर इस गाय का दूध निकला रहता था। एक दिन मनिहार गाय का पीछा करने चल दिया। उसने देखा कि जंगल में एक शिला lord bholenath के ऊपर खड़ी होकर गाय दूध छोड़ रही थी और शिला दूध पी रही थी।

इससे गुस्साए मनिहार ने गाय को धक्का देकर कुल्हाड़ी के उल्टे हिस्से से शिला पर प्रहार कर दिया। इससे शिला से रक्त की धार बहने लगी। उसी रात एक बाबा ने स्वप्न में आकर मनिहारों को गांव छोड़ने को कहा और वह गांव छोड़कर रामनगर चले गए।

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बिनेश्वर (बिनसर) महादेव मंदिर Mahadev Temple के आसपास की घूमने लायक खास जगह - गायरार गोलू देवता,बिनसर वन्यजीव अभयारण्य, परियादेव पासन।

यात्रा का सर्वोत्तम समय best Timing for visit - अक्टूबर और नवंबर

ऐसे पहुंचे बिनेश्वर (बिनसर) महादेव मंदिर...
- हवाई यात्रा : यहां के लिए रानीखेत के नजदीकी हवाई अड्डा, पंतनगर में स्थित है, जो रानीखेत से लगभग 125 और अल्मोड़ा से लगभग 127 किलोमीटर दूर है। पंतनगर से आगे कि यात्रा सड़क मार्ग से करनी होगी।

- रेल मार्ग : यहां के लिए निकटतम रेलवे स्टेशन काठगोदाम करीब 120 किलोमीटर दूर स्थित है। काठगोदाम से आगे कि यात्रा सड़क मार्ग से करनी होगी। काठगोदाम रेलवे से सीधे दिल्ली भारत की राजधानी, उत्तर प्रदेश राज्य की राजधानी लखनऊ और उत्तराखंड राज्य की राजधानी देहरादून पहुंचा जा सकता है।

- सड़क मार्ग : सड़क नेटवर्क के माध्यम से बिनसर महादेव मंदिर अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। इसकी मदद से आप सीधे यहां पहुंच सकते हैं।

दरअसल उत्तराखंड में हवाई और रेल संपर्क सीमित है, ऐसे में यहां के लिए सड़क परिवहन सबसे अच्छा और आसानी से उपलब्ध विकल्प है। आप या तो सोनी बिनसर ,रानीखेत के लिए ड्राइव कर सकते हैं या एक टैक्सी / टैक्सी को किराए के लिए दिल्ली या किसी भी दूसरे शहर के बिनसर महादेव मंदिर,रानीखेत तक पहुंच सकते हैं।

दीपेश तिवारी
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