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Bhopal Famous Temple: सिद्धदात्री पहाड़ावाली मैया को विदेशों से भक्त भेजते हैं चश्मा, मन्नत पूरी होने पर माता को चढ़ती है चप्पल

सिद्धदात्री पहाड़ावाला मंदिर बेटी के स्वरूप में होती है मां की पूजा, विदेशों से भी भक्त भेजते हैं पूजन सामग्रीऐसी मान्यता... मां को वस्त्र और चश्मा चढ़ाने पर मन्नतें होती हैं पूरी
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Pravin Pandey

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Updated: 18 Oct 2023, 5:41 PM IST

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श्री खेड़ापति पहाड़ावाली मंदिर भोपाल

Bhopal Famous Temple भोपाल में एक ऐसा अनोखा मंदिर है, जहां की देवी मां को जूते, चप्पल, सैंडल और वस्त्र, चश्मा आदि अर्पित किए जाते हैं। मान्यता है कि यहां की देवी मां यह सब चढ़ाने से मन्नतें पूरी करती हैं। जी हां, हम बात कर रहे हैं भोपाल स्थित कोलार इलाके में एक छोटी सी पहाड़ी पर बने मां दुर्गा के सिद्धदात्री पहाड़ावाली मंदिर की। इस मंदिर को जीजीबाई मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। यहां लोग मन्नतें मांगने आते हैं और पूरी होने के बाद माता को नई चप्पल,जूते चढ़ाते हैं। चप्पल के साथ-साथ गर्मियों में मां दुर्गा को चश्मा, टोपी और घड़ी भी चढ़ाई जाती है।

नई है चप्पल चढ़ाने की परंपरा
यह अनोखी परंपरा करीब 30 सालों से चली आ रही है। माता को चप्पल चढ़ाने के पीछे कहानी यह है कि पंडित ओम प्रकाश महाराज ने यहां मूर्ति स्थापना के साथ शिव-पार्वती विवाह कराया था, इसमें खुद कन्यादान किया था। तब से वह मां सिद्धदात्री को बेटी मानकर पूजा करते हैं और आम लोगों की तरह बेटी की हर इच्छा को पूरी करते हैं। पुजारी के अनुसार वह एक बेटी की तरह मां दुर्गा की देखभाल करते हैं।


पुजारी बताते हैं कि कई बार उन्हें आभास हो जाता है कि मां दुर्गा को पहनाए कपड़ों से वह खुश नहीं हैं तो दो-तीन घंटों में ही कपड़े बदल देते हैं। पुजारी बताते हैं कि जीजीबाई माता के लिए विदेशों में बस चुके भक्त वहां से चप्पल भेजते हैं। कभी सिंगापुर तो कभी पेरिस से माता के लिए चप्पलें आई हैं।


भक्तों द्वारा चढ़ाए जाने वाले जूते-चप्पलों को गरीब बेसहारा और जरूरतमंदों को प्रसाद के रूप में दे दिया जाता है या गरीबों के बीच इन्हें बाट दिया जाता है। इस मंदिर में पूरे साल तक समय-समय पर धार्मिक अनुष्ठान होते रहते हैं।

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तीन सौ सीढ़ी के ऊपर सजा माता का दरबार
मां सिद्धिदात्री मंदिर कोलार की पहाड़ी पर स्थित है और इस मंदिर की स्थापना ओमप्रकाश महाराज ने करीब 30 वर्ष पहले की थी। इस मंदिर में पहुंचने के लिए भक्तों को तकरीबन 300 सीढ़ी चढ़कर पहाड़ी पर पहुंचना पड़ता है। वे बताते हैं कि मंदिर की स्थापना से पहले भगवान शिव पार्वती के विवाह का अनुष्ठान कराया गया था।


इस विवाह में उन्होंने पार्वतीजी का खुद कन्यादान अपने हाथों से किया था, इसलिए पंडित ओम प्रकाश महाराज माता को बेटी मानकर पूजा करते हैं। मंदिर में जीजाबाई माता को हर रोज नई-नई पोशाक पहनाई जाती है। नवरात्रि में माता के दरबार में भक्तों की भीड़ होती है।