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नपा की लापरवाही से लैप्स हो गए आवास योजना के 2.5 करोड़

- मामला सामने आने पर अध्यक्ष ने सीएमओ को दिए जांच के आदेश

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2.5 crores of the housing scheme lapsed due to the negligence of NAPA

2.5 crores of the housing scheme lapsed due to the negligence of NAPA

टीकमगढ़. नगर पालिका की व्यवस्थाएं पटरी पर आती नहीं दिख रही है। नई नपा का गठन होने के बाद से लगातार लापरवाहियां एवं अनियमितताएं सामने आ रही है। पुराने स्वीकृत कार्यों की टेंडर प्रक्रिया हो या नियम विरूद्ध तरीके से लगाए गए टेंडर। यहां के हर काम उलझते दिख रहे है। अब जाता मामला गरीबों के आवास योजना में लापरवाही का सामने आया है। ऐसे में अनेक गरीबों के हिस्से की किस्त का 2.5 करोड़ रुपए लैप्स हो गया है।


विदित हो कि नगर पालिका द्वारा अब तक शहरी क्षेत्र के 5754 हितग्राहियों को आवास योजना का लाभ दिया गया है। शासन द्वारा इस योजना के लिए इस बार नगर पालिका को 6 करोड़ रुपए का बजट आवंटित किया गया था। इस बजट में से कुछ हितग्राहियों की पहली, तो कुछ की दूसरी और जिनके आवास पूर्ण हो चुके है, उनकी आखिरी किश्त जारी की जानी थी। इस राशि में से 2 करोड़ रुपए की किश्ते हितग्राहियों के खातों में डाल दी गई है। वहीं इसके बाद शेष बचे 4.10 करोड़ रुपए में से 2.5 करोड़ का अब तक नपा द्वारा किसी प्रकार का उपयोग न किए जाने से वह शासन को समर्पित हो गई है। शेष राशि अब भी नपा के खाते में है। सूत्रों की माने तो यदि इसका भी उपयोग नहीं होता है तो यह भी वापस चली जाएगी। विदित हो कि शहर के अनेक हितग्राही कई दिनों से अपनी दूसरी और तीसरी किश्त के लिए नपा के चक्कर काट रहे है। वहीं इस लापरवाही के चलते 2.5 करोड़ रुपए की राशि लैप्स हो गई है। ऐसे में अब हितग्राहियों को फिर से लंबा इंतजार करना पड़ेगा।

जांच के आदेश, बनाई समिति
इस मामले में नपाध्यक्ष अब्दुल गफ्फार का कहना है कि इस मामले की जानकारी होने पर उन्होंने सीएमओ को पत्र लिखकर जांच के आदेश दिए है। उन्होंने बताया कि इसके लिए उनके द्वारा पीआईसी सदस्य, सहायक यंत्री अंजली शुक्ला, उपयंत्री जेबा मंसूरी, सहायक लेखा अधिकारी वर्षा जैन, सहायक राजस्व निरीक्षक प्रवीण खरे को शामिल करते हुए जांच समिति बनाकर पूरे मामले की जांच करने को कहा गया है। उन्होंने इस लापरवाही का आरोप संबंधित कर्मचारियों पर लगाया है। उनका कहना है कि आवास योजना में तमाम प्रकार की लारवाहियों एवं रुपयों के लेने-देन की शिकायतों के बाद सख्ती की गई है। ऐसे में यह कर्मचारियों को रास नहीं आ रह है और इस प्रकार की लापरवाहियां की जा रही है।