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प्रसूताओ को नही मिल रही सुविधाएं

कर्मचारी और सुविधाओ को तरस रहा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र

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asptal me nahi mil rahi suvidhay

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टीकमगढ़.चंदेरा क्षेत्र के ग्रामीण अंचलो में स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल है। सरकार ने भले ही लाखो की लागत से भवन निर्माण करा दिए पर स्वास्थ्य अमला देने से परहेज कर रहे है। जिसका प्रमाण चंदेरा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र है । जिसके भवन का निर्माण 2012-13 मे हो जाने के बाद 27 गांवो को लोगो को बीमार होने पर इलाज की आस जगी थी। प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में डॉक्टर के साथ ही कर्मचारी और सुविधाएं न होने से सबसे अधिक परेशानी प्रसूताओ को होती है। प्रसव पीड़ा होने पर जान की बाजी लगाकर १५ किमी का सफर तय करके जतारा जाना होता है।


घर पर कराओ या जतारा जाओ
सरकार की मंशानुसार संस्थागत प्रसव कराने की मंशा पर पानी फे रा जा रहा है। स्वास्थ्य केंद्र में स्टाफ एवं सुविधाओ की कमी होने के कारण गर्भवती महिलाओ को प्रसव के लिए जतारा जाना पड़ता है। इन ग्रामीण अंचलो में जो आर्थिक रूप से सक्षम नहीं है,उनके घरों में आज भी अस्पताल की अपेक्षा घरो में दाइयो के सहारे प्रसव हो रहे है। जटिल स्थिति होने पर जच्चा और बच्चा दोनों की जान पर बन जाती है।

आदिवासी महिलाओ मे एनीमिया एक गंभीर समस्या है । ऐसे में घर पर प्रसव होना किसी भी लिहाज से सुरक्षित नहीं है। वही घर पर प्रसव के दौरान जन्म के एक घंटे बाद स्तनपान होने की स्थितियां भी बनती है। जिससे नवजात शिशु कई बार संक्रमण की चपेट में आ जाता है।

स्वास्थ्य सुविधाओ का अभाव
चंदंरा के अस्पताल मे न तो बाउन्ड्रीबाल है और न दवाइयो को सुरक्षित रखने के लिए फ्रि ज है। दवाओ का लेखाजोखा रखने कम्प्यूटर ,एक्स-रे मशीन, स्ट्रैचर, फ र्नीचर ,कुर्सी ,टेबिल से लेकर आवश्यकता का सामान न होने से मरीजो को भारी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

अस्पताल में एक डॉक्टर सहित सिर्फ ३ लोगो का स्टाफ है। वही जतारा सामुदायिक केन्द्र पर भी डॉक्टर की कमी होने के कारण डॉ सी एल गुप्ता को सात दिन में 2 से 3 दिन जतारा समय देना पड़ता है। क्षेत्रवासियो की मांग रही है कि अगर पीएचसी में ही सारी व्यवस्थाएं जुटा दी जाए तो प्रसव,पीएम और एएमएलसी जैसे कार्य गांव में ही होने लगेंग।

ताले में बंद है पोस्टमार्टम कक्ष
सरकार ने लाखो की लागत से 2 वर्ष पूर्व पोस्टमार्टम के लिए भवन निर्माण तो करा दिया। पर स्टाफ एवं सुविधाओं के अभाव में आज तक इस भवन का ताला नही खुल सका है। नियमों के अनुसार पीएचसी मे कुल मिलाकर 15 से 18 कर्मचारियो का स्टाफ होना चाहिए ,लेकिन केवल ३ कर्मचारी २७ गांव के लोगो के ईलाज के लिए तैनात किए गए है। स्वास्थ्य केन्द्र में डॉक्टर, ड्राइवर , फ र्मासिस्ट , टेक्नेशियन ,हेल्थ वर्कर,असिस्टेंट के एक एक पर और स्टाफ नर्स के तीन एवं पांच पद चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियो के खाली पडे है।

बडी संख्या मे आते है रोगी
चंदेरा स्वास्थ्य केन्द्र के अंतर्गत 27 गांव आते है , जिनकी आबादी लगभग पचास हजार है। इस स्वास्थ्य केन्द्र के अंतर्गत चंदेरा सहित पैतपुरा, स्यावनी , काछियागुडा, नुना ,मैंदवारा ,हरकनपुरा ,वीरपुरा ,उपरारा ,जेवर ,फ तेह खिरक ,दरियापुरा ,मौरपारिया ,अजनारा ,महेबा,पठारी ,विशनपुरा ,पैगाखेरा ,रूपगंज ,विजरवान तगेडी ,वनपुरा ,मडोरी ,खुर्रमपुर ,बिजरौठा एवं मर्दनपुरा गांव के मरीजो को आना होता है।

गांव के देवीदीन चौरसिया ,बृजेन्द्र साहू, अमरदीप चौरसिया,अशोक चौरसिया ,हरिशचंद्र चौरसिया,महेंद्र कुशवाहा,सुरेन्द्र जैन,जितेंद्र तिवारी ,परमानंद कुशवाहा ने कलेक्टर से मांग की है कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में स्टाफ की कमी समेत अन्य स्वास्थ्य सुविधाओ को बेहतर किया जाए। जिससे इलाज के अभाव में किसी की जान न जाए।

कहते है कि
स्वास्थ्य केन्द्र में स्टाफ नर्स और डॉक्टर है। जतारा में कुछ समय के लिए सेवा देने के आदेश दिए थे। कर्मचारियों की कमी को जल्द दूर किया जाएगा।
डॉ ओ पी अनुरागी सीएमएचओ